रीवा रेलवे स्टेशन: भ्रष्टाचार की 'लिफ्ट' में फंसी जनता की जान, करोड़ों डकार कर मौत परोस रहा प्रबंधन!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल।  रीवा रेलवे स्टेशन पर बुधवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्टेशन की लिफ्ट अचानक खराब हो जाने से 2 बच्चों समेत 7 यात्री अंदर फंस गए। इनमें 4 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल था। यात्रियों को करीब ढाई घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। घटना के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया और मौके पर एम्बुलेंस तक बुलानी पड़ी। 

जिसे हम 'आधुनिक स्टेशन' और 'एयरपोर्ट जैसी सुविधा' कह रहे हैं, हकीकत में वह भ्रष्टाचार का ऐसा अड्डा बन चुका है जहाँ ऊपर से नीचे तक अधिकारी और ठेकेदार मिलकर जनता का पैसा डकार रहे हैं। बुधवार को लिफ्ट में फंसी 7 जिंदगियां सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि रेलवे के उस सड़े हुए सिस्टम का सबूत थी, जो कमीशनखोरी के चक्कर में यात्रियों को मौत के मुंह में धकेल रहा है।

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रीवा रेलवे स्टेशन की लिफ्ट में यात्री क्यों फंसे
जानकारी के अनुसार इतवारी-रीवा ट्रेन सुबह करीब 9 बजे स्टेशन पहुंची थी। यात्री प्लेटफॉर्म नंबर 2 से प्लेटफॉर्म नंबर 1 की ओर जाने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल कर रहे थे। जैसे ही लिफ्ट ऊपर जाने लगी, वह अचानक बीच में रुक गई।
पहले यात्रियों को लगा कि बिजली चली गई है, लेकिन काफी देर तक लिफ्ट शुरू नहीं हुई। अंदर फंसे लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई जिसके बाद स्टेशन कर्मचारियों को जानकारी मिली।

बच्चों सहित यात्री लिफ्ट में कैसे फंसे
बताया गया कि लिफ्ट में दो परिवार मौजूद थे। एक परिवार कोरबा से आया था जबकि दूसरा परिवार जबलपुर से रीवा पहुंचा था। सभी रिश्तेदारी में शादी समारोह में शामिल होने आए थे।
लिफ्ट बीच फ्लोर में फंस गई थी, जिसके कारण यात्रियों को तुरंत बाहर निकालना संभव नहीं हो पाया। लंबे समय तक बंद रहने से अंदर मौजूद लोगों का दम घुटने लगा।

रेलवे प्रशासन ने क्या कार्रवाई की
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे स्टेशन प्रबंधन सक्रिय हुआ। इलेक्ट्रिकल और तकनीकी विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कई घंटे की कोशिश के बाद दोपहर करीब 12 बजे लिफ्ट को चालू किया गया।
लिफ्ट नीचे आने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकलने के बाद यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया।

रीवा स्टेशन पर एम्बुलेंस क्यों बुलाई गई
लंबे समय तक लिफ्ट बंद रहने के कारण प्रशासन को डर था कि अंदर मौजूद लोगों की तबीयत बिगड़ सकती है। इसी वजह से स्टेशन परिसर में एम्बुलेंस और मेडिकल स्टाफ को बुलाया गया।
हालांकि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी की हालत गंभीर नहीं हुई।

रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था क्यों फेल हुई
घटना के बाद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा और मेंटेनेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन पर लगी लिफ्टों की नियमित जांच नहीं होती।
बताया जा रहा है कि लिफ्ट संचालन के दौरान कोई ऑपरेटर मौजूद नहीं था और यात्री खुद ही लिफ्ट चला रहे थे। यही लापरवाही हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है।

भ्रष्टाचार का खेल: ऊपर से नीचे तक मलाई काट रहे जिम्मेदार
रीवा रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। लेकिन सवाल यह है कि वो पैसा गया कहाँ?

घटिया मेंटेनेंस: लिफ्ट लगाने वाले ठेकेदार सतेंद्र मिश्रा से लेकर मॉनिटरिंग करने वाले SSE अशोक मिश्रा और JE रविशंकर कौशल तक, सब अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
कमीशन का चश्मा: जब ठेका दिया जाता है, तभी तय हो जाता है कि कौन कितना 'हिस्सा' खाएगा। यही वजह है कि न तो लिफ्ट का ऑपरेटर नियुक्त किया गया और न ही इमरजेंसी अलार्म की व्यवस्था दुरुस्त की गई।
लूट की छूट: जनता के टैक्स के पैसे से ऐश करने वाले ये अफसर तब जागते हैं जब कोई लाश गिरती है। 2.5 घंटे तक बच्चे और महिलाएं अंदर दम घुटने से तड़पते रहे, और साहब लोग ऑफिस में बैठकर फाइलें घुमा रहे थे।

रीवा न्यूज़ मीडिया की चेतावनियों को ठेंगा
यह कोई पहली बार नहीं है जब रेलवे की बदहाली का मुद्दा उठा है। रीवा न्यूज़ मीडिया डिजिटल और प्रमुख समाचार पत्र लगातार रेलवे की इन जानलेवा कमियों को उजागर करते आ रहे हैं।
 "हमने बार-बार आगाह किया कि स्टेशन का प्रबंधन वेंटिलेटर पर है, लेकिन रेलवे की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली। आज की घटना ने साबित कर दिया कि मामला कितना संगीन है। क्या प्रशासन किसी बड़ी बलि का इंतजार कर रहा है?"

हवाई सुविधाएं, जमीनी हकीकत है डरावनी
स्टेशन को चमका देने से वह सुरक्षित नहीं हो जाता।

मरीजों के साथ खिलवाड़: इतवारी ट्रेन में अधिकतर मरीज होते हैं। जो पहले से बीमार हैं, उन्हें 2.5 घंटे लिफ्ट में बंद रखना हत्या की कोशिश से कम नहीं है।
एम्बुलेंस का खौफ: स्टेशन पर एम्बुलेंस का पहुंचना इस बात का गवाह है कि स्थिति कितनी भयावह थी। अंदर ऑक्सीजन खत्म हो रही थी, लोग चीख रहे थे, लेकिन 'डिजिटल इंडिया' की लिफ्ट टस से मस नहीं हुई।

अब आर-पार की लड़ाई: जवाबदेही तय हो!
सिर्फ खानापूर्ति के लिए जांच नहीं, बल्कि इन भ्रष्ट अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) होनी चाहिए। ठेकेदार का लाइसेंस रद्द हो और दोषी इंजीनियरों को सस्पेंड किया जाए। रीवा की जनता अब इन 'सफेद हाथियों' की लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी।

रेलवे लिफ्ट में फंसने पर क्या करें
अगर कभी किसी लिफ्ट में फंस जाएं तो घबराएं नहीं। कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है:

  • इमरजेंसी बटन दबाएं
  • मोबाइल से हेल्पलाइन पर कॉल करें
  • लिफ्ट का दरवाजा जबरन खोलने की कोशिश न करें
  • शांत रहें और सांस सामान्य रखें
  • लगातार आवाज देकर मदद मांगें

रेलवे स्टेशन में लिफ्ट ऑपरेटर क्यों जरूरी है
विशेषज्ञों के अनुसार भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट ऑपरेटर और नियमित तकनीकी निरीक्षण बेहद जरूरी होता है। इससे तकनीकी खराबी होने पर तुरंत सहायता मिल सकती है।
अगर लिफ्ट का समय-समय पर मेंटेनेंस न हो तो यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

यात्रियों ने रेलवे प्रबंधन पर उठाए सवाल
घटना के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाया जा रहा है, लेकिन मूलभूत सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है।
यात्रियों ने मांग की है कि स्टेशन की सभी लिफ्टों और एस्केलेटर की जांच कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

रेलवे प्रशासन क्या कदम उठा सकता है
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे प्रशासन को कई जरूरी कदम उठाने होंगे:

  • सभी लिफ्टों का नियमित मेंटेनेंस
  • 24 घंटे तकनीकी स्टाफ की तैनाती
  • इमरजेंसी अलार्म सिस्टम की जांच
  • यात्रियों के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था
  • स्टेशन पर सुरक्षा ऑडिट

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