क्या रीवा स्टेशन पर सुरक्षित हैं महिलाएँ? पार्किंग में गुंडों का पहरा, पत्रकारों से भी 'हफ्ता' वसूली, देखें प्रशासन की मिलीभगत का पूरा सच

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा रेलवे स्टेशन की पार्किंग व्यवस्था अब आम यात्रियों के लिए खौफ का केंद्र बन गई है। बुधवार को यहाँ की फिजाओं में तब उबाल आ गया जब पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह 'बन्ना' अपने समर्थकों के साथ सीधे पार्किंग स्थल पर पहुँच गए और जमीन पर बैठकर 'सत्याग्रह' शुरू कर दिया। यह विरोध केवल अवैध वसूली के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्किंग स्थल पर फल-फूल रहे 'गुंडा राज' के खिलाफ था।

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रीवा न्यूज़ मीडिया का खुलासा: चौथे स्तंभ पर भी 'प्रहार'
स्थानीय मीडिया ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए बताया कि पार्किंग ठेकेदार ने वहां बाकायदा गुंडे तैनात कर रखे हैं। ये गुंडे इतने बेखौफ हैं कि पत्रकारों से भी जबरन वसूली की कोशिश की जा रही है। कवरेज करने गए पत्रकारों को डराना-धमकाना और उनसे पार्किंग शुल्क के नाम पर अवैध पैसे मांगना यहाँ की नई नियति बन गई है।

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महिलाओं से अभद्रता और खून-खराबा: शर्मनाक हुआ मामला
विवाद केवल पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह मानवीय गरिमा पर चोट कर रहा है:

  • महिलाओं से बदतमीजी: पार्किंग में मौजूद ठेकेदार के कारिंदे महिला यात्रियों के साथ ऊँचे स्वर में बात करते हैं और भद्दी टिप्पणियाँ (गाली-गलौज) करते हैं। महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
  • मारपीट और फ्रैक्चर: धरने के दौरान उस युवक को पेश किया गया, जिसका हाथ पार्किंग गुंडों ने सिर्फ इसलिए तोड़ दिया क्योंकि उसने तय रेट से ज्यादा पैसे देने से मना किया था। यह घटना सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।

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"ऊपर से नीचे तक बँट रहा है पैसा": प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप
पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने साफ कहा कि:

"यह गुंडागर्दी बिना सरकारी संरक्षण के संभव नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि इस अवैध वसूली का हिस्सा ऊपर से नीचे तक सबको जा रहा है, तभी तो न रेलवे पुलिस (GRP/RPF) कार्रवाई करती है और न ही स्थानीय पुलिस। यहाँ नियम नहीं, गुंडों का डंडा चलता है।"

अंतिम चेतावनी: पूर्व विधायक ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि पार्किंग माफिया के गुंडों को बाहर नहीं किया गया और अवैध वसूली तुरंत बंद नहीं हुई, तो वे चक्का जाम कर रीवा की जनता के साथ बड़ा आंदोलन करेंगे। प्रशासन ने फिलहाल जाँच का भरोसा देकर धरना समाप्त कराया है, लेकिन जनता का आक्रोश चरम पर है।

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