रीवा जनपद CEO पूनम द्विवेदी पर उठे गंभीर सवाल: सहिजना का तालाब छलनी, फिर भी भ्रष्ट सिंडिकेट को क्यों दे रहीं संरक्षण?

 
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ग्राम पंचायत सहिजना नं 1 में बिना प्रस्ताव तालाब खोदकर 1000 गाड़ी मिट्टी बेची। सरपंच सुधा मिश्रा, सचिव हरिकृष्ण नारायण और CEO पूनम द्विवेदी पर गंभीर आरोप।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा। जिले के ग्रामीण अंचलों में पंचायती राज व्यवस्था के तहत विकास के नाम पर सरकारी संपत्तियों को डकारने का एक और सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। जनपद पंचायत रीवा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सहिजना नं. 1 में रसूखदारों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की जुगलबंदी ने मिलकर एक समूचे शासकीय तालाब की पोखरी को ही छलनी कर दिया। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता और खनिज चोरी के मामले में 'रीवा न्यूज़ मीडिया' के हाथ लगे पुख्ता दस्तावेजों ने साबित कर दिया है कि पंचायत की कमान संभालने वाले लोग किस तरह दिनदहाड़े शासकीय राजस्व को चूना लगा रहे हैं।

बिना प्रस्ताव JCB का तांडव: सरंपच सुधा मिश्रा के देवर नटवर ने बेची 1000 गाड़ी मिट्टी
पूरा मामला सहिजना नं. 1 में स्थित ऐतिहासिक 'मासमासी मंदिर' के ठीक पीछे स्थित एक शासकीय तालाब (पोखरी) से जुड़ा हुआ है। नियमों के मुताबिक किसी भी जल संरचना के गहरीकरण या खुदाई के लिए जनपद और तकनीकी विभाग से बाकायदा प्रस्ताव पास होना अनिवार्य है।

लेकिन यहाँ सरपंच सुधा मिश्रा, उनके सचिव हरिकृष्ण नारायण पांडेय और सरपंच के रसूखदार देवर नटवर मिश्रा (नेटवर मिश्रा) ने नियमों को अपनी जेब में रखकर बिना किसी शासकीय स्वीकृति या प्रस्ताव के रातों-रात मौके पर हैवी JCB मशीनें उतार दीं। गहरीकरण के ढोंग के पीछे का असली खेल तब सामने आया जब यहाँ से निकाली गई लगभग 1000 गाड़ी कीमती मिट्टी को अवैध तरीके से बाजारों और निजी लोगों को मोटी रकम लेकर बेच दिया गया।

रसूखदारों के आंगन में डंप है चोरी का माल: इन नामों का हुआ भंडाफोड़
इस महाघोटाले के सबूत इतने पुख्ता हैं कि इन्हें छुपाना नामुमकिन है। नटवर मिश्रा के सिंडिकेट द्वारा बेची गई यह सरकारी मिट्टी आज भी गाँव के कई प्रभावशाली रसूखदारों के दरवाजों और खेतों में डंप पाई गई है।

चोरी की मिट्टी के खरीदार और डंपिंग साइट्स:
गाँव के सजग नागरिकों ने साक्ष्यों के साथ उजागर किया है कि यह अवैध मिट्टी मुख्य रूप से वंशराखन सिंह, रामबिहारी सिंह, अशोक चतुर्वेदी, राजभान सिंह, और समरजीत सिंह के घरों के आस-पास भारी मात्रा में गिराई गई है। यह डंप मिट्टी इस बात की गवाही दे रही है कि सरकारी संपत्ति की लूट में गाँव के रसूखदार भी बराबर के हिस्सेदार बने बैठे हैं।

तहसीलदार की रिपोर्ट में घोटाला साबित, फिर भी मौन रहीं जनपद CEO पूनम द्विवेदी!
मामले में सबसे शर्मनाक और संदेहास्पद भूमिका जनपद प्रशासन की रही है। ग्रामीणों की शिकायत पर राजस्व अमले और खुद तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर विधिवत जांच और नाप-जोख की थी। तहसीलदार द्वारा तैयार किए गए आधिकारिक प्रतिवेदन में यह ऑन-रिकॉर्ड दर्ज है कि मौके पर 90 मीटर लंबा, 34 मीटर चौड़ा और 3 फीट गहरा पूरी तरह अवैध उत्खनन किया गया है।

तहसीलदार की इस कड़क रिपोर्ट के बाद कायदे से आरोपियों पर तुरंत जेल की कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन जनपद पंचायत रीवा की सीईओ (CEO) पूनम द्विवेदी इस गंभीर रिपोर्ट को दबाकर बैठ गईं। इतने बड़े सरकारी साक्ष्य के बावजूद सीईओ पूनम द्विवेदी द्वारा आज दिनांक तक सरपंच सुधा मिश्रा, सचिव हरिकृष्ण नारायण पांडेय और नटवर मिश्रा के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई गई और न ही चोरी की गई मिट्टी को जब्त किया गया। यह ढुलमुल रवैया साफ इशारा करता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें जनपद कार्यालय तक जुड़ी हुई हैं।

SDO का शर्मनाक कारनामा: शिकायतकर्ता से सादे कागज पर साइन कराने की कोशिश
मामले को ठंडे बस्ते में डालने और आरोपियों को क्लीन चिट देने का खेल यहीं नहीं रुका। जनपद सीईओ पूनम द्विवेदी द्वारा इस स्पष्ट मामले को और लटकाने के उद्देश्य से पुनः जांच के नाम पर एसडीओ (SDO) को मौके पर भेजा गया।

मौके पर मुआयना करने पहुंचे एसडीओ ने कोई नया निष्पक्ष प्रतिवेदन तैयार करने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब एसडीओ द्वारा शिकायतकर्ता को बहला-फुसलाकर एक सादे कागज पर हस्ताक्षर (Sign) कराने की साजिश रची गई। लेकिन ग्रामीणों की सजगता के चलते उन्होंने सादे कागज पर अंगूठा या दस्तखत करने से साफ मना कर दिया, जिससे भ्रष्टाचार को दबाने की अफसरों की यह बड़ी चाल नाकाम हो गई।

कमिश्नर के दरबार में गुहार: जांच टीम गठित करने और FIR की मांग
जनपद स्तर पर मची इस भयंकर लीपापोती और अफसरों की मिलीभगत से तंग आकर अब सहिजना पंचायत के ग्रामीण और सजग नागरिक सीधे माननीय कमिश्नर (आयुक्त) रीवा संभाग के दरबार में पहुंच गए हैं। कमिश्नर महोदय को सौंपे गए शिकायती पत्र में जनपद स्तर के भ्रष्ट अधिकारियों को दरकिनार कर संभाग स्तर की एक स्वतंत्र जांच टीम गठित करने की मांग की गई है।

महाघोटाले पर जिम्मेदारों के हैरान करने वाले बयान: 'रीवा न्यूज़ मीडिया' की ग्राउंड रिपोर्ट
ग्राम पंचायत सहिजना नं. 1 में हुए इस बड़े भ्रष्टाचार को लेकर जब "रीवा न्यूज़ मीडिया" की टीम ने सीधे जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत के रसूखदारों से संपर्क साधा, तो बेहद चौंकाने वाली और गैर-जिम्मेदाराना स्थितियां सामने आईं:

  • जनपद सीईओ पूनम द्विवेदी का पक्ष: जब पूरे मामले और तहसीलदार के प्रतिवेदन पर कार्रवाई न होने को लेकर जनपद सीईओ पूनम द्विवेदी से सीधा संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा— "मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है, जांच रिपोर्ट आते ही जल्द ही कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।" (अब सवाल यह है कि तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद और कितनी जांच कमेटियां बनेंगी?)
  • सचिव हरिकृष्ण नारायण पांडेय का ड्रामा: जब घोटाले के सह-आरोपी सचिव हरिकृष्ण नारायण पांडेय के पर्सनल मोबाइल नंबर पर टीम ने फोन लगाया, तो उन्होंने खुद को बचाने के लिए एक अजीब पैंतरा चला। उन्होंने फोन पर सीधे झूठ बोलते हुए कहा कि— "मैं सचिव नहीं हूँ" और यह कहकर टीम को गुमराह करने की कोशिश की, जबकि पुख्ता तौर पर वह नंबर खुद सचिव का ही था!
  • सरपंच के देवर नटवर मिश्रा की सफाई: मुख्य सूत्रधार और मिट्टी बेचने के आरोपी नटवर मिश्रा से जब 'रीवा न्यूज़ मीडिया' ने तीखे सवाल किए, तो उन्होंने घबराते हुए कहा— "ऐसा कुछ भी नहीं है, आपको पूरी तरह से गलत जानकारी दी जा रही है।" इस पर जब हमारे संवाददाता ने उन्हें दोटूक कहा कि— "साक्ष्य मौजूद हैं और यह पूरी तरह जांच का विषय है, जांच में साफ हो जाएगा कि क्या सही है और क्या गलत" तो उनके पास कोई जवाब नहीं था।
  • तहसीलदार का फोन बंद: इस पूरे मामले में सबसे निष्पक्ष और कड़क रिपोर्ट तैयार करने वाले तहसीलदार से जब उनका पक्ष जानने और आगामी कार्रवाई पर बात करने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका आधिकारिक मोबाइल नंबर पूरी तरह बंद (Switch Off) आता रहा।

सिस्टम के इन बयानों और भागने के तरीकों से साफ जाहिर होता है कि सहिजना पंचायत में दाल के साथ-साथ पूरी हांडी ही काली है! अब देखना यह है कि रीवा कमिश्नर के दरबार में मामला पहुंचने के बाद इन गुमराह करने वाले चेहरों पर क्या कार्रवाई होती है।

ग्रामीणों की सीधी मांग:

  • सरपंच सुधा मिश्रा, सचिव हरिकृष्ण नारायण पांडेय और मुख्य सरगना नटवर मिश्रा पर खनिज चोरी का मुकदमा दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
  • जिन रसूखदारों (वंशराखन सिंह, रामबिहारी सिंह आदि) के घरों के बाहर शासकीय मिट्टी जब्त हुई है, उन्हें सह-आरोपी बनाया जाए।
  • मामले को संरक्षण देने वाली जनपद सीईओ पूनम द्विवेदी और सादे कागज पर साइन कराने वाले एसडीओ के खिलाफ दंडात्मक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

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