रीवा में 'ऑपरेशन रिकवरी': जेल जाने के खौफ से सरपंचों ने सरेंडर किए 91 लाख, अधूरे पड़े विकास कार्यों में आई जान!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले में ग्रामीण विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। लंबे समय से ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले सरपंचों, सचिवों और अधिकारियों पर प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। रीवा जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता की गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा विकास कार्यों में ही खर्च होना चाहिए। इस कड़े रुख का परिणाम यह हुआ है कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोग अब स्वयं आगे आकर सरकारी राशि लौटा रहे हैं।
जिला पंचायत सीईओ का विशेष अभियान और सख्त निगरानी
रीवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने जिले की कमान संभालते ही विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने का संकल्प लिया। उन्होंने मार्च 2025 से दिसंबर तक एक विशेष अभियान चलाकर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों की सूक्ष्म समीक्षा की। इस दौरान यह पाया गया कि कई पंचायतों में राशि आहरित कर ली गई थी, लेकिन काम या तो शुरू ही नहीं हुए थे या फिर अधर में लटके थे। सीईओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए लापरवाह सरपंचों और सचिवों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी कर सुनवाई शुरू की।

91 लाख की रिकॉर्ड वसूली: जेल के डर से लौटा सरकारी पैसा
प्रशासनिक सख्ती और जेल वारंट जारी करने की चेतावनी का असर जमीन पर दिखने लगा है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के डर से भ्रष्ट सरपंचों, सचिवों और संबंधित अधिकारियों ने अब तक कुल 91,08,865 रुपये सरकारी खजाने में जमा करा दिए हैं। यह राशि उन कार्यों की है जिन्हें पूरा करने के बजाय पैसा दबा लिया गया था। वसूली की इस प्रक्रिया ने जिले के अन्य भ्रष्ट कर्मियों के मन में भी भय पैदा कर दिया है, जिससे भविष्य में अनियमितता की संभावना कम होगी।
जनपद पंचायतों में वसूली का लेखा-जोखा: कहाँ से कितना पैसा आया?
रीवा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से वसूली की राशि अलग-अलग रही है। रायपुर कर्चुलियान जनपद से सर्वाधिक 25 लाख 83 हजार 974 रुपये की वसूली की गई है। इसके बाद सिरमौर जनपद का स्थान है जहाँ से 21 लाख 85 हजार 412 रुपये वसूले गए। जवा जनपद से 12 लाख 67 हजार 444 रुपये और नईगढ़ी से 9 लाख 85 हजार 960 रुपये जमा कराए गए। इसी क्रम में त्योंथर से 7.64 लाख, गंगेव से 5.79 लाख, हनुमना से 5.41 लाख, रीवा से 1.23 लाख और मऊगंज से 77 हजार 28 रुपये की वसूली हुई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जिले के लगभग हर हिस्से में वसूली अभियान ने असर दिखाया है।

अधूरे निर्माण कार्यों का पुनरुद्धार: अब विकास में नहीं आएगी बाधा
वसूली गई इस भारी-भरकम राशि का उपयोग अब उन विकास कार्यों को पूरा करने में किया जा रहा है जो वर्षों से लंबित पड़े थे। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाना, पंचायत भवनों की मरम्मत, सामुदायिक शौचालयों का निर्माण और जल संरक्षण के कार्यों को अब प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा रहा है। सीईओ ने स्पष्ट किया है कि यह पैसा जिस मद का है, उसी मद में और उसी स्थान पर खर्च किया जाएगा ताकि ग्रामीणों को उनकी हक की सुविधाएं मिल सकें।
सरपंचों और सचिवों पर कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया
प्रशासन ने केवल वसूली तक ही सीमित न रहकर कानूनी कार्रवाई को भी गति दी है। जिन मामलों में राशि जमा करने में आनाकानी की गई, वहाँ सरपंचों और सचिवों के विरुद्ध धारा 92 के तहत कुर्की और जेल भेजने की प्रक्रिया अपनाई गई। ग्राम रोजगार सहायक, उपयंत्री और सहायक यंत्रियों को भी उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए जवाबदेह बनाया गया। इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार में सहयोग करने वाले अधिकारी भी अब बच नहीं पाएंगे।
भविष्य के लिए कड़े निर्देश: समय सीमा में कार्य पूर्णता अनिवार्य
मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने जिले के सभी पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा है कि ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाली प्रत्येक पाई का सदुपयोग होना चाहिए। निर्माण कार्यों के लिए जो समय सीमा तय की गई है, उसे हर हाल में मानना होगा। यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो बिना किसी रियायत के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
रीवा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ छिड़ी यह जंग एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। 91 लाख रुपये की वसूली केवल एक वित्तीय सफलता नहीं है, बल्कि यह उन ग्रामीणों की जीत है जो वर्षों से अपने गांव में विकास की राह देख रहे थे। प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचेगा, बल्कि तंत्र में शुचिता और पारदर्शिता भी आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: रीवा में अब तक कितनी राशि की वसूली हुई है? उत्तर: जिला प्रशासन ने अब तक 91 लाख 8 हजार 865 रुपये की वसूली की है।
प्रश्न 2: क्या सरपंचों के अलावा अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है? उत्तर: हाँ, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, उपयंत्री और सहायक यंत्रियों पर भी लापरवाही के चलते कार्रवाई की गई है।
प्रश्न 3: वसूली गई राशि का उपयोग कैसे किया जाएगा? उत्तर: इस राशि का उपयोग ग्राम पंचायतों में रुके हुए अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है।
प्रश्न 4: प्रशासन ने सरपंचों को क्या चेतावनी दी है? उत्तर: प्रशासन ने साफ कहा है कि अगर समय पर विकास कार्य पूरे नहीं हुए और राशि का दुरुपयोग हुआ, तो जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न 5: सबसे कम वसूली किस जनपद से हुई है? उत्तर: उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मऊगंज जनपद से सबसे कम 77,028 रुपये की वसूली हुई है।