"DEO साहब, ये कैसा भुगतान? गुढ़ में गिर रही छतें और ऑफिस से ठेकेदार को बिना पुताई के मिल गए 28 लाख, शिक्षा विभाग का बड़ा पर्दाफाश!

 
ffgfg

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा के स्कूल शिक्षा विभाग में घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो सरकारी योजनाओं का क्या हश्र होता है, इसका ताजा उदाहरण स्कूलों के मरम्मत बजट में देखने को मिला है। बच्चों के सिर पर छत सुरक्षित रहे और स्कूल साफ-सुथरे दिखें, इसके लिए भोपाल से बजट तो आया, लेकिन वह स्कूलों की दीवारों तक पहुँचने के बजाय भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में समा गया।

कागजों पर चमकीं दीवारें, ठेकेदार की जेब में आए 28 लाख
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रीवा जिले को स्कूलों की मरम्मत और पुताई के लिए 50 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था। नियम था कि बारिश से पहले जून के महीने में काम पूरा हो जाना चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि 6 सरकारी स्कूलों में बिना काम पूरा हुए ही 28 लाख 38 हजार 229 रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह पूरा खेल जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय और ठेकेदार की जुगलबंदी से खेला गया।

'अदृश्य' काम और 'जादुई' भुगतान: प्राचार्यों को भनक तक नहीं लगी
हैरानी की बात यह है कि जिन स्कूलों में काम होना था, वहां के प्राचार्यों को भुगतान की जानकारी तक नहीं दी गई। बिना भौतिक सत्यापन और बिना कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के ही 20 सितंबर 2025 को खजाने से राशि निकाल ली गई। जब स्कूलों की दीवारें आज भी उखड़ी पड़ी हैं, तो विभाग ने किस आधार पर ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी (सत्यव्रत कंस्ट्रक्शन) को भुगतान कर दिया? यह सीधा-सीधा सरकारी धन का गबन है।

गुढ़ पीएम श्री स्कूल: भ्रष्टाचार ने ली मासूमों की जान?
भ्रष्टाचार की सबसे खौफनाक तस्वीर पीएम श्री हायर सेकेण्डरी स्कूल गुढ़ में दिखी। यहाँ मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती की गई। नतीजा यह हुआ कि शुक्रवार की रात एक कक्षा की छत का भारी-भरकम प्लास्टर भरभरा कर गिर गया। गनीमत रही कि हादसा रात में हुआ; अगर यह दिन में होता, तो कई मासूम छात्र लहूलुहान हो सकते थे। प्राचार्य विनय मिश्रा ने बताया कि ठेकेदार ने पुताई के नाम पर धोखा दिया और दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराए।

शिकायतों का पुलिंदा, पर कार्रवाई सिफर
गुढ़ स्कूल के प्राचार्य ने अपनी अमानत राशि बचाने के लिए ठेकेदार के जो चेक बैंक में लगाए, वे बाउंस हो गए। इस धोखाधड़ी की शिकायत एसडीएम अनुराग तिवारी, स्थानीय थाना और डीईओ कार्यालय में लिखित रूप से की गई। एसडीएम ने 26 घंटे में जवाब मांगा, नोटिस जारी किया, लेकिन ठेकेदार के रसूख के आगे प्रशासन नतमस्तक दिखा। न तो भुगतान रुका और न ही ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया।

इन 6 स्कूलों के नाम पर डकारी गई जनता की गाढ़ी कमाई
घोटाले की फेहरिस्त में ये स्कूल शामिल हैं जहाँ काम अधूरा छोड़ दिया गया:

शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल पैपखरा

  • हाई स्कूल दुआरी
  • पीएमश्री हायर सेकेण्डरी स्कूल गुढ़
  • हायर सेकेण्डरी स्कूल खैरा
  • हाई स्कूल बर्रैया
  • हाई स्कूल कन्या खटखरी

अधिकारी-ठेकेदार की 'सांठगांठ': कमीशन का काला खेल
इस फर्जीवाड़े की जड़ें डीईओ कार्यालय में गहरे तक धंसी हैं। रमसा (RMSA) प्रभारी और अन्य बाबुओं ने प्राचार्यों के विरोध पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। पैपखरा स्कूल के प्राचार्य बृजेश निगम ने तो साफ कह दिया कि उन्होंने किसी कागज पर दस्तखत नहीं किए, फिर भी भुगतान हो गया। यह साफ करता है कि अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षर या तकनीकी सेंधमारी कर पैसे निकाले हैं।

निष्कर्ष: अब कलेक्टर की बारी
यह मामला केवल 28 लाख की चोरी का नहीं है, बल्कि उन हजारों बच्चों की जान से खिलवाड़ का है जो इन जर्जर स्कूलों में बैठते हैं। क्या रीवा कलेक्टर इस महाघोटाले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराएंगे? क्या दोषियों को जेल भेजा जाएगा या हर बार की तरह फाइलें दबा दी जाएंगी? जनता जवाब चाहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: रीवा स्कूल मरम्मत घोटाले का मुख्य आरोपी कौन है? उत्तर: प्राथमिक तौर पर सत्यव्रत कंस्ट्रक्शन का ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के संबंधित भुगतान अधिकारी संदेह के घेरे में हैं।
प्रश्न 2: क्या गुढ़ स्कूल के हादसे में कोई घायल हुआ? उत्तर: नहीं, प्लास्टर रात में गिरा था, इसलिए बच्चे बाल-बाल बच गए। लेकिन स्कूल की स्थिति अब भी खतरनाक बनी हुई है।
प्रश्न 3: प्राचार्यों ने भुगतान रोकने के लिए क्या कदम उठाए? उत्तर: प्राचार्यों ने डीईओ, रमसा प्रभारी और एसडीएम को लिखित पत्र लिखकर काम अधूरा होने की जानकारी दी थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
प्रश्न 4: चेक बाउंस होने पर ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? उत्तर: एसडीएम ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई या एफआईआर की सूचना नहीं है।

Related Topics

Latest News