करोड़ों का ठेका और ठेंगा जैसी सुरक्षा : एजाइल और हाइट्स कंपनी का टेंडर निरस्त क्यों नहीं? अस्पताल में रंगे हाथ हो रही लाखों की चोरी, फिर भी मेहरबान हैं डीन साहब

 
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रीवा के संजय गांधी अस्पताल (SGMH) में सुरक्षाकर्मियों की फौज के बावजूद लाखों की चोरी। हाइट्स और एजाइल कंपनी का टेंडर निरस्त न होने पर उठे गंभीर सवाल।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संजय गांधी अस्पताल (SGMH) और गांधी स्मृति चिकित्सालय (GMH) में मरीजों के इलाज की व्यवस्था सुधरे न सुधरे, लेकिन चोरों के हौसले दिन-ब-दिन बुलंद होते जा रहे हैं। अस्पताल परिसर के भीतर सुरक्षा के नाम पर तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी महज़ एक छलावा साबित हो रही है। करोड़ों रुपए का बजट पानी की तरह बहाने के बाद भी अस्पताल के संवेदनशील वार्डों से लाखों रुपए का सरकारी सामान गायब हो रहा है। ताज़ा मामला जीएमएच के शिशु रोग विभाग और डॉक्टरों के ड्यूटी रूम का है, जहां सुरक्षाकर्मियों की नाक के नीचे से चोरों ने पांच एयर कंडीशनर (AC) के कीमती कॉपर वायर उड़ा दिए। यह घटना बताती है कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है।

एसी सुधारने पहुंचे मैकेनिक के उड़े होश: ऐसे खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
इस बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाली चोरी का खुलासा तब हुआ जब भीषण गर्मी के चलते अस्पताल के एसएमटीयू (SMTU) वार्ड और डॉक्टर ड्यूटी रूम में लंबे समय से बंद पड़े पांच एसी को चालू करने की कवायद शुरू हुई। विभाग की ओर से इसकी लिखित शिकायत अस्पताल अधीक्षक को दी गई थी, जिसके बाद तकनीकी सुधार के लिए मैकेनिक को बुलाया गया।

जब मैकेनिक ने एसी यूनिट्स की जांच शुरू की, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। इन सभी पांचों एसी के आउटडोर यूनिट तक जाने वाले कीमती कॉपर वायर (तांबे के तार) गायब थे। चोरों ने बड़ी ही सफाई से कई मीटर लंबा कॉपर वायर काट लिया था। जैसे ही मैकेनिक ने इस बात की जानकारी विभागाध्यक्ष और वार्ड इंचार्ज को दी, पूरे अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।

तीसरी मंजिल से पूरा आउटडोर गायब: चोरों के हौसले बुलंद, एजेंसियां मस्त
संजय गांधी अस्पताल के इतिहास में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी चोरों ने अस्पताल प्रबंधन की मुस्तैदी का मज़ाक उड़ाया था। कुछ समय पूर्व मेडिसिन विभाग के मीटिंग हॉल में लगे एसी का पूरा का पूरा भारी-भरकम आउटडोर यूनिट ही गायब कर दिया गया था।

"चोरी की हद तो देखिए, यह आउटडोर यूनिट तीसरी मंजिल पर स्थित एसपीडब्लू के बाथरूम के पास लगा था। चोर इतनी ऊंचाई से भारी-भरकम मशीन उतार ले गए और सुरक्षा के ऊंचे दावे करने वाली एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी।"
जब उस वक्त भी इंजीनियर खराबी सुधारने पहुंचा, तब इस बड़ी चोरी का पता चला था। मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष ने तत्कालीन अधीक्षक को लिखित सूचना दी थी, लेकिन हमेशा की तरह फाइल को दबा दिया गया और किसी भी दोषी पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया।

हाइट्स और एजाइल कंपनी के 'बूढ़े पहरेदारों' के भरोसे विंध्य का सबसे बड़ा अस्पताल
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज (SSMC) प्रबंधन द्वारा अस्पताल की सुरक्षा और साफ-सफाई का जिम्मा 'हाइट्स' (HITES) और 'एजाइल' (Ajrayle) जैसी नामचीन आउटसोर्स कंपनियों को सौंप रखा है। इन कंपनियों को हर महीने रीवा की जनता की गाढ़ी कमाई से करोड़ों रुपए का भुगतान किया जाता है। इसके बदले में अस्पताल को क्या मिल रहा है? सुरक्षा के नाम पर ऐसे सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है जो शारीरिक रूप से अक्षम और उम्रदराज हैं। इन बूढ़े कंधों पर विंध्य के सबसे बड़े और संवेदनशील अस्पताल की सुरक्षा का जिम्मा सौंपकर कंपनियां केवल अपना मुनाफा कमाने में लगी हैं। सुरक्षाकर्मियों की इतनी बड़ी फौज होने के बावजूद अगर अस्पताल के अंदर से कई मीटर लंबी कॉपर वायर और भारी मशीनें चोरी हो रही हैं, तो यह सीधे तौर पर इन कंपनियों की घोर लापरवाही और नाकामी को उजागर करता है।

बड़ा खेल: डेढ़ साल से खत्म टेंडर, फिर भी किसके संरक्षण में हो रही अवैध पार्किंग वसूली?
अस्पताल के भीतर सिर्फ सामान की चोरी ही नहीं हो रही, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की जेब पर भी सरेआम डाका डाला जा रहा है। संजय गांधी अस्पताल परिसर में चल रहे पार्किंग स्टैंड का टेंडर खत्म हुए डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। नियमानुसार टेंडर अवधि समाप्त होने के बाद तत्काल नया टेंडर होना चाहिए था या फिर वसूली बंद होनी चाहिए थी, लेकिन यहाँ तो नियम-कायदों की धज्जियाँ उड़ाकर अवैध वसूली का नंगा नाच चल रहा है।

"आखिर वो कौन सी अदृश्य और ताकतवर शक्ति है, जिसके संरक्षण में डेढ़ साल से बिना किसी वैध टेंडर के कफन चोरों की तरह मरीजों के परिजनों से पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है? यह सीधे तौर पर करोड़ों रुपए का राजस्व घोटाला है।"

बिना टेंडर हो रही इस वसूली की पूरी जानकारी होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन और डीन का मौन रहना इस बात का पुख्ता सबूत है कि इस अवैध कमाई का हिस्सा ऊपर तक जा रहा है। एक तरफ सुरक्षा एजेंसियां फेल हैं, दूसरी तरफ पार्किंग के नाम पर गुंडागर्दी और अवैध वसूली धड़ल्ले से जारी है।

डिप्टी सीएम की फटकार भी बेअसर: डीन और आउटसोर्स कंपनियों की जुगलबंदी पर उठते सवाल
संजय गांधी अस्पताल की इस दुर्दशा पर प्रदेश के डिप्टी सीएम (जो स्वास्थ्य विभाग की कमान भी संभालते हैं) खुद दौरा कर गहरी नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने साफ-सफाई की बदहाली और बंद पड़े एसी को लेकर अधिकारियों को कड़े लहजे में सुधरने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अस्पताल के डीन (Dean) और प्रशासनिक अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

अस्पताल में लगातार हो रही चोरियों और लचर सुरक्षा के बावजूद हाइट्स और एजाइल कंपनी को हर महीने करोड़ों का भुगतान जारी है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस कदर मची खुली लूट के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन (डीन) पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है। जीरो पेनल्टी पॉलिसी के तहत आज तक इन कंपनियों पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया और न ही उनका टेंडर रद्द करने की कोई हिम्मत दिखाई गई। संजय गांधी अस्पताल की सरकारी संपत्ति की इस लूट और मरीजों को हो रही असुविधा पर प्रबंधन सिर्फ कागजी जांच का नाटक कर रहा है। यह रहस्यमयी चुप्पी सीधे तौर पर अधिकारियों और आउटसोर्स कंपनियों के बीच की तगड़ी साठगांठ की ओर इशारा करती है।

रीवा की जनता के टैक्स के पैसे का कब तक होता रहेगा तमाशा?
संजय गांधी अस्पताल में बार-बार होने वाली चोरियां केवल एक आपराधिक घटना नहीं हैं, बल्कि यह एक प्रशासनिक सड़न का प्रतीक हैं। जब तक करोड़ों का ठेका लेने वाली हाइट्स और एजाइल जैसी कंपनियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और उनका टेंडर ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाएगा, तब तक यह मजाक चलता रहेगा। अस्पताल प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ानी चाहिए, सुरक्षाकर्मियों के फिटनेस मानकों की जांच करनी चाहिए और इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए, ताकि जनता के पैसे की इस तरह हो रही सरेआम लूट को रोका जा सके।

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