"कमिश्नर साहब! कलेक्ट्रेट गेट पर 'मौत' बिक रही है और आप चैन की नींद सो रहे? GDC की 100 गुमटियां या नशे की पाठशाला? जवाब दो निगम आयुक्त!"

 
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शिल्पी प्लाजा के पीछे अतिक्रमण से जाम, स्कूल-कॉलेज के पास खुलेआम बिक रहा गांजा और ब्राउन शुगर, सो रहा रीवा प्रशासन। 

शिल्पी प्लाजा के पीछे विकास नहीं, 'विनाश' की कहानी सुनातीं ये अवैध गुमटियां

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर का सबसे व्यस्ततम इलाका शिल्पी प्लाजा आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। नगर निगम आयुक्त के 'स्वच्छ और साफ-सुथरा' रीवा बनाने के दावों की पोल शिल्पी प्लाजा के पीछे की ये गुमटियां खोल रही हैं। फुटपाथ पर दुकान और सड़क पर वाहन खड़े होने के कारण पैदल चलने वालों का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है। आलम यह है कि यहाँ से चार पहिया वाहन का निकलना तो दूर, दो पहिया वाहनों के कारण भी घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है।

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शिक्षा विभाग के मुख्य द्वार पर 'नशे की दुकान': क्या यही है मध्य प्रदेश का भविष्य?
हैरानी की बात तो यह है कि यहाँ जिला शिक्षा विभाग (DEO) का कार्यालय है, जिसके सामने ही 25 से 50 अवैध गुमटियां तान दी गई हैं। इन गुमटियों पर दिन भर पान-गुटका बिकता है और शाम होते ही यहाँ 'जाम से जाम' टकराते हैं। स्थानीय लोगों और रीवा न्यूज़ मीडिया की टीम की पड़ताल में सामने आया है कि यहाँ खुलेआम कोरेक्स, गांजा और ब्राउन शुगर का सेवन कराया जाता है। बगल में ही GDC कॉलेज, एक्सीलेंस स्कूल और मार्तण्ड स्कूल (1-3) का कैंपस है, जहाँ हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। 

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नगर निगम की 'महीने वाली सेटिंग': कार्रवाई सिर्फ दिखावा, हकीकत में 'वसूली' का खेल
जब हमारी टीम ने विभाग के लोगों से चर्चा की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। लोगों का आरोप है कि नगर निगम के कर्मचारी इन गुमटी संचालकों से महीने का पैसा वसूलते हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 2-3 दिन के लिए इन्हें हटाया जाता है और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। क्षेत्रीय अधिकारी रावेंद्र शुक्ला को कई बार जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन रिजल्ट शून्य है।

कलेक्टर, कमिश्नर और निगम आयुक्त: क्या सबकी मिलीभगत से चल रहा है 'ब्राउन शुगर' का कारोबार?
शिल्पी प्लाजा क्षेत्र में कमिश्नर कार्यालय, जनसंपर्क कार्यालय और खुद नगर निगम का दफ्तर बगल में ही है। इसके बावजूद प्रशासन 'धृतराष्ट्र' बना हुआ है। पुराने न्यायालय परिसर के पीछे एक श्रीवास्तव नामक गुमटी संचालक तो खुलेआम कहता है कि "प्रशासन मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।" दिखावे के लिए यहाँ 'MP ऑनलाइन' की दुकान है, लेकिन अंदर नशे का काला कारोबार चल रहा है।

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मुख्यमंत्री जी, वार्ड 17 और 18 में अतिक्रमण के कारण आम जनता का जीना मुहाल
एक ओर जहाँ आम जनता से संपत्ति कर पर दोगुना जुर्माना वसूला जा रहा है, वहीं रसूखदार अतिक्रमणकारियों को खुली छूट दी गई है। वार्ड 17 और 18 का अतिक्रमण आज तक नहीं हटाया जा सका। क्या नगर निगम केवल गरीबों के ठेले पलटने के लिए है? या इन बड़े नशे के सौदागरों पर भी कभी बुलडोजर चलेगा?

GDC कॉलेज और 100 गुमटियां: छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़
रीवा का गौरव कहे जाने वाले GDC कन्या महाविद्यालय के ठीक सामने लगभग 100 अवैध गुमटियों का जाल बिछा हुआ है। सुबह 10 बजे जब कॉलेज और ऑफिसों का समय होता है, तब इन गुमटियों के कारण रास्ता निकलना मुश्किल हो जाता है। शाम होते ही इन गुमटियों का स्वरूप बदल जाता है और ये 'नशे के अहाते' बन जाती हैं। छात्राओं की सुरक्षा को ताक पर रखकर यहाँ खुलेआम नशे का सेवन किया जाता है, लेकिन पुलिस और नगर निगम की नजरें यहाँ इनायत नहीं होतीं।

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पुराने कोर्ट और मंदिर की आड़ में 'ब्राउन शुगर' का काला धंधा
रीवा न्यूज़ मीडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में एक और भयानक सच सामने आया है। पुराने न्यायालय परिसर के पीछे और मंदिर वाली बिल्डिंग के नीचे 'कोरेक्स' पीने वालों का हुजूम लगा रहता है। ताज्जुब की बात यह है कि यहाँ MP ऑनलाइन की आड़ में ब्राउन शुगर, कोरेक्स और गांजा बेचा जा रहा है। नशा बेचने वाले इतने बेखौफ हैं कि वे सरेआम प्रशासन को चुनौती देते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

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कलेक्ट्रेट गेट और सेंट्रल किचन: नशेड़ियों का नया 'हॉटस्पॉट'
शहर का सबसे सुरक्षित कहा जाने वाला कलेक्ट्रेट गेट के पीछे का हिस्सा और सेंट्रल किचन के पास का इलाका नशेड़ियों की शरणस्थली बन चुका है। यह शहर का मुख्य मार्केट और VIP जोन है, जहाँ से जिले के तमाम आला अधिकारी गुजरते हैं। इसके बावजूद यहाँ नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे शाम को आम नागरिकों और महिलाओं का निकलना दूभर हो गया है।

पार्किंग के नाम पर 'जबरन वसूली': पुलिस और नगर निगम का दोहरा चेहरा
शिल्पी प्लाजा और आसपास के पार्किंग क्षेत्रों में वसूली का एक संगठित गिरोह चल रहा है। निर्धारित पार्किंग शुल्क से अधिक की वसूली तो आम बात है, लेकिन अब हद पार हो गई है। आरोप है कि अगर कोई गाड़ी पार्किंग के थोड़ा बाहर भी खड़ी है, तो उससे भी पुलिस के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं। सवाल यह है कि यह पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?

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सिविल लाइन और अमहिया थाना: 'रिजल्ट जीरो' क्यों?
यह पूरा इलाका सिविल लाइन और अमहिया थाना के अंतर्गत आता है। नगर निगम आयुक्त से लेकर पुलिस के आला अधिकारियों को कई बार साक्ष्यों के साथ जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन परिणाम हमेशा 'शून्य' रहता है। मौके पर आकर कोई भी देख सकता है कि नशे का यह कारोबार कितनी गहराई तक जड़ें जमा चुका है, पर क्या पुलिस को यह दिखाई नहीं देता?

मुख्यमंत्री जी, रीवा की जनता अब कहाँ गुहार लगाए?
रीवा को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे करने वाला प्रशासन आज एक 'गुमटी माफिया' के सामने बेबस नजर आ रहा है। वार्ड 17 और 18 में अतिक्रमण और नशे का यह तांडव मुख्यमंत्री के 'नशा मुक्त प्रदेश' के संकल्प को चिढ़ा रहा है। क्या कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर इन माफियाओं पर नकेल कसेंगे या रीवा की युवा पीढ़ी इसी तरह नशे की गर्त में डूबती रहेगी?

रीवा के इस प्रमुख मार्ग पर शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। नशा, जाम और अवैध कब्जे ने इस स्मार्ट सिटी की तस्वीर को बदरंग कर दिया है। अगर समय रहते कलेक्टर और कमिश्नर ने सुध नहीं ली, तो यह क्षेत्र अपराध का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा।

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