सो रहा सिस्टम, जाग रहा माफिया: रीवा की सड़कों पर 'व्यापारिक गुंडागर्दी', स्टाइल बाजार के अवैध बोर्ड और मां होंडा की पार्किंग ने छीना राहगीरों का हक 

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। सफेद शेरों की भूमि और उप-मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के बावजूद रीवा शहर आज अराजकता की भेंट चढ़ चुका है। शहर की यातायात व्यवस्था (Traffic System) से लेकर कानून व्यवस्था तक, सब कुछ भगवान भरोसे है। शहर के किसी भी कोने में चले जाइये—चाहे वह जय स्तंभ हो, प्लाजा हो, या सिरमौर चौराहा—हर जगह ऑटो, बस, कार और बाइक बिना किसी डर और नियम के घुस रहे हैं।

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सिरमौर चौराहा: नया कमर्शियल हब या जाम का अड्डा?
रीवा का सबसे मुख्य बाजार अब प्लाजा से खिसक कर सिरमौर चौराहा की ओर शिफ्ट हो गया है। यहाँ बड़े ब्रांड्स के शोरूम तो खुल गए हैं, लेकिन प्रशासन पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट की व्यवस्था करना भूल गया। करोड़ों की लागत से बने फ्लाईओवर की सौगात भी जाम से मुक्ति नहीं दिला पाई। शाम 5 बजते ही यहाँ की व्यवस्था ऐसी चरमराती है कि लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। सिग्नल का कोई पालन नहीं करता और पुलिसकर्मी केवल कोने में खड़े होकर मोबाइल चलाने में व्यस्त रहते हैं।

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कमिश्नर से लेकर निगमायुक्त तक सब मौन: अतिक्रमण की भेंट चढ़ी सड़कें
शहर के अमहिया, साईं मंदिर, प्रकाश चौराहा, सब्जी मंडी, फोर्ट रोड, और वेंकट भवन मार्ग की स्थिति दयनीय है। कलेक्ट्रेट और कमिश्नर कार्यालय जाने वाली सड़कों पर भी अतिक्रमण का बोलबाला है। कमिश्नर बी.एस. जामोद, एसपी शैलेंद्र सिंह और निगमायुक्त अक्षत जैन को बार-बार जानकारी देने के बाद भी धरातल पर कार्यवाही 'जीरो' है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है, जो "चार दिन की चांदनी" साबित होती है।

एसपी ऑफिस से 100 मीटर की दूरी पर 'नशे का साम्राज्य'
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एसपी कार्यालय और यातायात थाने से महज कुछ दूरी पर स्थित कबाड़ी मोहल्ला (अब गंगा नगर) में नशे का कारोबार सीना ठोक कर चल रहा है। यहाँ कोरेक्स, गांजा और ब्राउन शुगर जैसे घातक नशे खुलेआम बिक रहे हैं। सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद यह अवैध धंधा पुलिस की नाक के नीचे फल-फूल रहा है। आरोप है कि पुलिस के कुछ संरक्षणदाता खुद इस खेल में शामिल हैं, जिसके चलते आज तक यहाँ पूरी तरह सफाई नहीं हो पाई।

नो एंट्री में ट्रकों का तांडव: यातायात टीआई की लापरवाही
रीवा शहर के बीचों-बीच से दिन के उजाले में भी भारी वाहन (Trucks) और नो-एंट्री वाले वाहन गुजर रहे हैं। यातायात टीआई को शहर की व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं दिखता। पुलिस की ड्यूटी केवल चालान काटने तक सीमित है, वह भी तब जब ऊपर से दबाव हो। आम आदमी की सुरक्षा और सुविधा इनके एजेंडे में नहीं है। ऑटो और ई-रिक्शा वालों की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि वे राहगीरों से मारपीट और लूटपाट करने से भी बाज नहीं आते।

शाम ढलते ही असुरक्षित हो जाता है शहर
समान थाना के बगल से लेकर सिविल लाइन तक, शाम होते ही शहर की सड़कों पर अराजकता का माहौल रहता है। शराब के अहाते देर रात तक खुले रहते हैं, जहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। महिला सुरक्षा के दावे रीवा में पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। पुलिस विभाग केवल मीडिया में प्रेस नोट जारी कर अपनी पीठ थपथपाने (Hero बनने) में व्यस्त है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि रीवा का आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

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'स्टाइल बाजार' का नया कारनामा: सड़क पर 'नो पार्किंग' का बोर्ड और खुद का कब्जा
सिरमौर चौराहा क्षेत्र में खुले नए मार्केट्स ने जनता की राह मुश्किल कर दी है। इसमें सबसे ऊपर नाम आता है स्टाइल बाजार (Style Bazar) का। स्टाइल बाजार द्वारा सड़कों पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हद तो तब हो गई जब इन्होंने सार्वजनिक सड़क पर खुद ही 'नो पार्किंग' का बोर्ड लगा दिया है, ताकि वहां केवल इनके शोरूम के वाहन खड़े हो सकें। यह सार्वजनिक संपत्ति पर निजी कब्जे का खुला खेल है, जिस पर नगर निगम और यातायात पुलिस आँखें मूंद कर बैठी है।

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'मां होंडा' और अमित कोहली: मीडिया की नसीहत को किया दरकिनार
सिरमौर चौराहा स्थित मां होंडा (Maa Honda) शोरूम, जिसका संचालन अमित कोहली द्वारा किया जाता है, ट्रैफिक व्यवस्था के लिए नासूर बन चुका है। रीवा न्यूज़ मीडिया की टीम ने धरातल पर जाकर कई बार शोरूम प्रबंधन और अमित कोहली को हिदायत दी कि शोरूम की गाड़ियों को सही ढंग से खड़ा किया जाए ताकि आम जनता को निकलने में परेशानी न हो।

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लेकिन रसूख के नशे में चूर संचालक ने नियमों को ठेंगे पर रखा हुआ है। फोटो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे मां होंडा की नई और पुरानी गाड़ियां सड़कों पर बेतरतीब खड़ी रहती हैं, जिससे हर वक्त दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

सिर्फ आम आदमी का कटता है चालान, शोरूम वाले 'आजाद'
रीवा की जनता का सवाल है कि क्या यातायात नियम सिर्फ गरीबों और आम बाइक चलाने वालों के लिए हैं? एसपी शैलेंद्र सिंह और यातायात टीआई की टीम को इन शोरूमों के बाहर खड़ी गाड़ियां क्यों नहीं दिखतीं? क्या अमित कोहली और स्टाइल बाजार जैसे रसूखदारों पर कार्यवाही करने में पुलिस के हाथ कांपते हैं?

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मिलीभगत या मजबूरी?
रीवा न्यूज़ मीडिया की ग्राउंड रिपोर्ट यह साबित करती है कि जब तक प्रशासन इन बड़े मगरमच्छों पर कार्यवाही नहीं करेगा, तब तक शहर को जाम से मुक्ति नहीं मिल सकती। नगर निगम आयुक्त अक्षत जैन को यह जवाब देना चाहिए कि इन शोरूम्स को बिना पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था के एनओसी (NOC) कैसे मिल गई?

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