रीवा का 'ड्रग सिंडिकेट': बार-बार रेड के बाद भी कैसे बच जाता है विद्याभूषण मेडिकल? क्या हफ्ता वसूली का है खेल?

 
fgfg
विद्याभूषण मेडिकल स्टोर पर रेड, 900 नशीली गोलियां जब्त। आखिर बार-बार अपराध के बाद भी लाइसेंस रद्द क्यों नहीं होता? क्या यह 'हफ्ता वसूली' का खेल है?

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के ठीक बाहर 'मौत का सामान' खुलेआम बिक रहा है. कहने को तो पुलिस और ड्रग विभाग ने सोमवार को विद्याभूषण मेडिकल हाल में दबिश देकर 900 से अधिक नशीली गोलियां जब्त की हैं और दुकान को सील कर दिया है, लेकिन यह पूरी कार्रवाई व्यवस्था के गाल पर एक तमाचा है। सवाल यह है कि जब यह दुकान पहले भी कई बार विवादों में रही, तो आखिर इसका लाइसेंस अब तक परमानेंट रद्द क्यों नहीं किया गया?

छापेमारी की 'रस्म अदायगी' या दिखावा?
अमहिया थाना पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टर राधेश्याम वट्टी की टीम ने सोमवार को विद्याभूषण मेडिकल स्टोर पर रेड मारी. जाँच में पाया गया कि वहां न तो कोई फार्मासिस्ट था और न ही दवाओं का कोई रिकॉर्ड. बिना डॉक्टर की पर्ची के धड़ल्ले से ट्रामाडोल जैसी नशीली दवाइयां बेची जा रही थीं. मौके से करीब 900 नशीली टैबलेट के पत्ते जब्त कर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

सिस्टम पर कड़े सवाल: आखिर किसका है वरदहस्त?
यह पहली बार नहीं है जब रीवा में किसी मेडिकल स्टोर पर ऐसी कार्रवाई हुई है. लेकिन जनता अब यह पूछ रही है:

  • लाइसेंस रद्द क्यों नहीं? ड्रग विभाग छोटी-मोटी अनियमितता पर दुकानें बंद करा देता है, लेकिन जो मेडिकल स्टोर युवाओं की रगों में जहर घोल रहे हैं, उनके लाइसेंस पर स्थायी ताला क्यों नहीं जड़ा जाता?
  • क्या 'ऊपर' तक जा रहा है हिस्सा? चर्चा जोरों पर है कि क्या इन काली कमाई करने वाले स्टोर संचालकों का 'हफ्ता' विभाग के गलियारों तक पहुँचता है? क्या यह रेड सिर्फ इसलिए पड़ी क्योंकि इस बार 'हिसाब' बराबर नहीं हुआ?
  • पुलिस और प्रशासन की चुप्पी: सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के पास हजारों लोगों की आवाजाही रहती है, वहां दिन-रात नशे की दवाइयां बिकती रहीं और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई थीं?

बिना फार्मासिस्ट के चल रहा मौत का व्यापार
छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दुकान पर कोई भी पंजीकृत फार्मासिस्ट मौजूद नहीं था. बिना विशेषज्ञ के ही नशीली दवाइयां बांटी जा रही थीं. यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।

सिर्फ सील करना काफी नहीं
ड्रग विभाग का कहना है कि दुकान सील कर दी गई है. लेकिन रीवा की जनता अब खोखली कार्यवाहियों से ऊब चुकी है। जब तक नशे के इन अड्डों के लाइसेंस पूरी तरह खत्म नहीं किए जाते और इनके पीछे बैठे 'सफेदपोशों' को बेनकाब नहीं किया जाता, तब तक रीवा की गलियों में यह जहर बिकता रहेगा।

Related Topics

Latest News