Rewa Medical Miracle : अब दिल्ली-मुंबई जाने की जरूरत नहीं! 6 साल की मासूम के दिल का छेद भरा, डॉ. त्रिपाठी ने विंध्य में रचा नया इतिहास

 
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विंध्य के बच्चों को मिली नई जिंदगी; सुपरस्पेशलिटी अस्पताल रीवा में पहली बार हुई जटिल बाल हृदय प्रक्रिया, आयुष्मान से मिला मुफ्त इलाज। 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य की माटी और यहाँ की चिकित्सा व्यवस्था ने आज एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा है, जिसने रीवा को प्रदेश के मानचित्र पर एक 'मेडिकल हब' के रूप में स्थापित कर दिया है। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, रीवा के सुप्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर डॉ. एस.के. त्रिपाठी ने पन्ना जिले की एक 6 वर्षीय बालिका, नायरा बानो के हृदय का सफल ऑपरेशन कर क्षेत्र की पहली पीडियाट्रिक (बाल चिकित्सा) कार्डियक प्रक्रिया को अंजाम दिया है।

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यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि अब तक ऐसे जटिल ऑपरेशनों के लिए विंध्य के लोगों को नागपुर, दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था, जो आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला होता था।

क्या होता है PDA (पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस) और यह कितना खतरनाक है? 
मासूम नायरा जन्म से ही PDA (Patent Ductus Arteriosus) नामक बीमारी से ग्रसित थी। सरल शब्दों में कहें तो, दिल की दो मुख्य धमनियों के बीच एक असामान्य रास्ता या छेद रह गया था।

हृदय में छेद के प्रमुख लक्षण:
बच्चे का वजन सामान्य रूप से न बढ़ना।

  • थोड़ा सा चलने या खेलने पर सांस फूलना और थकान होना।
  • बार-बार सर्दी-खांसी और निमोनिया की चपेट में आना।
  • दूध पीने या खाना खाने में कठिनाई महसूस करना।

नायरा के माता-पिता ने कई शहरों के चक्कर काटे, लेकिन कहीं सही रास्ता नहीं सूझा। अंततः डॉ. त्रिपाठी की विशेषज्ञता पर भरोसा कर वे रीवा आए, जहाँ इकोकार्डियोग्राफी के जरिए इस छेद की सटीक स्थिति का पता लगाया गया।

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चुनौतियों से भरा था ऑपरेशन: आधुनिक तकनीक और अटूट संकल्प 
बच्चों के हृदय की संरचना बेहद कोमल और सूक्ष्म होती है। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में बड़ों के हृदय के ऑपरेशन तो नियमित होते थे, लेकिन एक 6 साल की बच्ची के लिए यह प्रक्रिया किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी।
डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी समर्पित टीम ने अत्याधुनिक कैथ लैब का उपयोग करते हुए, बिना किसी बड़े चीर-फाड़ के, एक विशेष डिवाइस के जरिए हृदय के उस छेद को पूरी तरह बंद कर दिया। इस प्रक्रिया के दौरान सूक्ष्मता का विशेष ध्यान रखा गया ताकि बच्ची को भविष्य में कोई शारीरिक समस्या न हो।

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सफलता के सूत्रधार: टीम का योगदान
इस ऐतिहासिक पल में डॉ. त्रिपाठी के साथ निम्नलिखित विशेषज्ञों ने अपना पसीना बहाया:

  • एनेस्थेटिस्ट: डॉ. लाल प्रवीण
  • कैथ टीम: मनीष, सुधांशु, सोनाली, विजय, अमन, जय
  • नर्सिंग स्टाफ: सतेंद्र, किशोर, निधि और मनीषा

आयुष्मान भारत योजना: गरीब परिवारों के लिए संजीवनी 
इस सफल सर्जरी का एक सबसे सुखद पहलू यह रहा कि परिवार को इलाज के लिए एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। आयुष्मान भारत योजना के तहत यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क संपन्न हुई। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयासों से आज रीवा का यह अस्पताल निजी कॉरपोरेट अस्पतालों जैसी सुविधाएं गरीबों को मुफ्त में प्रदान कर रहा है।

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"मेरा सपना है कि विंध्य का कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में दम न तोड़े। रीवा को मेडिकल हब बनाना सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि हमारा मिशन है।" — श्री राजेंद्र शुक्ल, उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री

रीवा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल: आधुनिक चिकित्सा का नया केंद्र 
अस्पताल के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल और अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने इस सफलता को पूरे संस्थान की जीत बताया है। उनका मानना है कि डॉ. त्रिपाठी की इस पहल से अब अन्य जटिल हृदय रोगों (जैसे ASD, VSD) के इलाज का रास्ता भी खुल गया है।

अब पन्ना, सतना, सीधी, सिंगरौली और शहडोल के मरीजों को गंभीर स्थिति में भटकने की आवश्यकता नहीं है। सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की कैथ लैब और अनुभवी डॉक्टर अब किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

विंध्य की सेहत के लिए मील का पत्थर 
नायरा अब पूरी तरह स्वस्थ है। उसकी आँखों की चमक और माता-पिता के चेहरे की मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का मेल हो, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं। डॉ. एस.के. त्रिपाठी की यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह विंध्य क्षेत्र के चिकित्सा इतिहास में एक नई क्रांति की शुरुआत है।

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