रीवा में पुलिस और पत्रकार की प्रताड़ना से तंग आकर सीएम राइज स्कूल के शिक्षक ने की आत्महत्या की कोशिश

 
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रीवा के लालगांव सीएम राइज स्कूल में पदस्थ शिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने हाथ की नस काटी, हालत गंभीर

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद झकझोर देने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ खाकी और मीडिया के एक कथित गठजोड़ की प्रताड़ना से तंग आकर एक शासकीय शिक्षक ने आत्मघाती कदम उठा लिया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (सीएम राइज स्कूल) लालगांव में पदस्थ वरिष्ठ शिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने अपने ही घर में हाथ की नस काटकर खुदकुशी करने का प्रयास किया।

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घटना के तुरंत बाद लहूलुहान हालत में उन्हें रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने में जुटी हुई है। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से पूरे रीवा जिले के शिक्षक समुदाय और प्रशासनिक गलियारे में भारी आक्रोश और हड़कंप व्याप्त है।

जैसे ही परिजनों को नस काटने की जानकारी मिली, वे तुरंत घर पहुंचे और टीचर को अस्पताल ले गए।

जैसे ही परिजनों को नस काटने की जानकारी मिली, वे तुरंत घर पहुंचे और टीचर को अस्पताल ले गए।

पेड़ काटने के विवाद से शुरू हुई प्रताड़ना की कहानी
पारिवारिक सूत्रों और पीड़ित शिक्षक के बेटे के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ एक बेहद मामूली घटना थी, जो बाद में जानलेवा उत्पीड़न में बदल गई। पीड़ित शिक्षक के पैतृक गांव में उनकी निजी भूमि पर लगे एक हरे-भरे पेड़ को विपक्षी मिश्रा परिवार द्वारा बिना किसी अनुमति के काट दिया गया था।

जब शिक्षक अनिल कुमार तिवारी और उनके परिवार ने इस अवैध कृत्य का शांतिपूर्वक विरोध किया, तो बात सुलझाने के बजाय आरोपी पक्ष परमानंद मिश्रा, गीता मिश्रा और उनके पत्रकार बेटे निशांत मिश्रा उर्फ अंकित मिश्रा ने उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां देना शुरू कर दिया। आरोप है कि अपने रसूख और पत्रकारिता के रौब का इस्तेमाल करते हुए मिश्रा परिवार ने शिक्षक के खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में एक पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी मुकदमा दर्ज करवा दिया।

टीचर ने सुसाइड नोट में टीआई और पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

टीचर ने सुसाइड नोट में टीआई और पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और पत्रकार पर गंभीर आरोप
अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे शिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने कदम उठाने से पहले एक विस्तृत 5 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा है। इस पत्र में उन्होंने सीधे तौर पर रीवा के विश्वविद्यालय थाना प्रभारी (TI) हितेंद्र शर्मा और पत्रकार निशांत मिश्रा उर्फ अंकित मिश्रा को अपनी इस दुर्दशा का मुख्य सूत्रधार बताया है।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और सहकर्मी शिक्षक अस्पताल पहुंच गए।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और सहकर्मी शिक्षक अस्पताल पहुंच गए।

शिक्षक ने सुसाइड नोट में स्पष्ट शब्दों में लिखा:

"मैं अनिल कुमार तिवारी पूरे होशो-हवास में यह लिख रहा हूं कि मैंने आज तक अपने जीवन में कोई अपराध नहीं किया। मुझे, मेरे भाई और मेरे निर्दोष बेटे को एक झूठे मामले में जबरन घसीटा जा रहा है। विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र शर्मा ने पैसे के लालच में आकर बिना किसी निष्पक्ष जांच के मुझे मुल्जिम बना दिया। इस थाना प्रभारी को पुलिस विभाग में नहीं, बल्कि किसी जल्लाद की जगह होना चाहिए था।"

5 पन्नों का दर्द: "28 साल की बेदाग नौकरी पर लगा दिया दाग"
शिक्षक अनिल तिवारी ने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने शिक्षा विभाग में रहते हुए 28 वर्षों तक अत्यंत ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ देश के भविष्य का निर्माण किया। उनके पूरे करियर पर कभी कोई आंच नहीं आई, लेकिन पुलिस और रसूखदारों के इस गठजोड़ ने उनकी जीवनभर की कमाई यानी उनकी प्रतिष्ठा को पल भर में मिट्टी में मिला दिया।

पत्र में आगे लिखा है कि आरोपी परमानंद मिश्रा का बड़ा बेटा, जो भारतीय सेना (फौज) में कार्यरत है, उसने भी बीती 15 मई को फोन पर शिक्षक को सरेआम गोली मारने की धमकी दी थी। शिक्षक ने जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के रवैये पर भी गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि कलेक्टर महोदय को अपने उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारी पर भरोसा जताना चाहिए था, लेकिन उन्हें पुरस्कार के बदले मानसिक प्रताड़ना और दंड मिला, जिससे आहत होकर अब उनके पास किसी को मुंह दिखाने का साहस नहीं बचा था।

शिक्षक समुदाय में भारी आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस घटना की जानकारी जैसे ही सोशल मीडिया और शिक्षक संगठनों के व्हाट्सएप ग्रुप्स पर फैली, पूरे जिले के शासकीय सेवक और शिक्षक संजय गांधी अस्पताल पहुंचने लगे। बताया जा रहा है कि आत्मघाती कदम उठाने के ठीक बाद शिक्षक ने अपनी एक तस्वीर अनजाने में सहकर्मियों के ग्रुप में साझा की थी, जिसे देखकर परिजनों को तत्काल सूचित किया गया और समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सका, जिससे उनकी जान बच सकी।

वर्तमान में शिक्षक संघों ने एकजुट होकर रीवा पुलिस महानिरीक्षक (IG) और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर ली है। सुसाइड नोट में पीड़ित शिक्षक ने देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और मानव अधिकार आयोग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय या सीबीआई (CBI) जांच कराने की गुहार लगाई है, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

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