रीवा में सिस्टम से हारा एक शिक्षक: नस काटने के बाद न्याय न मिलने पर खाया जहर, टीआई और पत्रकार पर प्रताड़ना का गंभीर आरोप, पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल

 
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रीवा में सरकारी शिक्षक अनिल तिवारी ने नस काटने के बाद जहर खाया। TI और पत्रकार पर प्रताड़ना का आरोप। जानें पेड़ विवाद से शुरू हुए इस मामले की पूरी सच्चाई।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी शिक्षक ने पुलिस और स्थानीय रसूखदारों के कथित अत्याचारों से तंग आकर दो दिन के भीतर दूसरी बार आत्महत्या करने की कोशिश की है। पहली बार हाथ की नस काटने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही पीड़ित शिक्षक ने जहर खा लिया, जिसके बाद उन्हें अत्यंत गंभीर हालत में रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने रीवा पुलिस प्रशासन और स्थानीय सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी को दोबारा संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी को दोबारा संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दो दिन में दूसरी बार आत्मघाती कदम: नस काटने के बाद जहर खाया
रीवा के लालगांव स्थित सीएम राइज स्कूल (शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल) में पदस्थ उत्कृष्ट शिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने व्यवस्था से निराश होकर मौत को गले लगाने का प्रयास किया। उन्होंने सबसे पहले कलाई की नस काट ली थी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था।

अनिल ने दोबारा आत्महत्या की कोशिश की, इससे उनकी पत्नी सदमे में हैं।

अनिल ने दोबारा आत्महत्या की कोशिश की, इससे उनकी पत्नी सदमे में हैं।

शुक्रवार को जब शिक्षक अनिल तिवारी को होश आया, तो उन्होंने सबसे पहले अपने बेटे से पूछा कि क्या उनकी फरियाद पर पुलिस या प्रशासन ने कोई कार्रवाई की? जब बेटे ने बताया कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया, तो शिक्षक बुरी तरह टूट गए। अस्पताल से जबरन डिस्चार्ज किए जाने के बाद, घर पहुँचते ही उन्होंने निराशा में जहर खा लिया। फिलहाल वे वेंटिलेटर पर हैं और डॉक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

अनिल के जहर खाने की जानकारी मिलते ही परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए।

अनिल के जहर खाने की जानकारी मिलते ही परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए।

विवाद की मुख्य वजह: रीवा में पेड़ काटने का विवाद क्या है?
इस पूरे विवाद की जड़ एक बेहद मामूली बात से शुरू हुई थी जो बाद में एक ईमानदार शिक्षक के लिए जी का जंजाल बन गई। पीड़ित परिवार के मुताबिक, पड़ोस में रहने वाले मिश्रा परिवार ने शिक्षक अनिल तिवारी की निजी जमीन पर लगा एक हरा-भरा पेड़ बिना उनकी अनुमति के काट दिया था।

जब शिक्षक और उनके परिवार ने इस अवैध कटाई का विरोध किया, तो आरोपी पक्ष ने न सिर्फ उन्हें जान से मारने की धमकियां दीं, बल्कि अपने रसूख का इस्तेमाल कर पीड़ित शिक्षक के खिलाफ ही थाने में एक फर्जी केस दर्ज करवा दिया। शिक्षक के बेटे का आरोप है कि इस झूठे मुकदमे और सामाजिक बदनामी के कारण उनके पिता मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे।

21 मई को टीचर ने अपनी कलाई काट ली थी। उन्होंने 5 पेज का सुसाइड नोट भी लिखा था।

21 मई को टीचर ने अपनी कलाई काट ली थी। उन्होंने 5 पेज का सुसाइड नोट भी लिखा था।

सरकारी शिक्षक के सुसाइड नोट में क्या लिखा है और विश्वविद्यालय थाना प्रभारी पर क्या आरोप हैं?
कलाई काटने से पहले शिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने 5 पन्नों का एक विस्तृत सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें उन्होंने अपनी इस दुर्दशा के लिए सीधे तौर पर पुलिस और एक स्थानीय पत्रकार को जिम्मेदार ठहराया है।

थाना प्रभारी पर पैसे लेकर फंसाने का आरोप
सुसाइड नोट में लिखा गया है कि विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र शर्मा ने विरोधी पक्ष से मोटी रकम लेकर उन्हें, उनके भाई और बेटे को एक झूठे और अवैध मामले में फंसाया है। शिक्षक ने लिखा:

"मेरी 28 वर्ष की बेदाग और साफ-सुथरी नौकरी पर इस थाना प्रभारी ने दाग लगा दिया है। उसे पुलिस में नहीं, बल्कि जल्लाद होना चाहिए था। उसने मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाई है और अब मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहा।"

पत्रकार और फौजी बेटे की धमकियां
शिक्षक ने सुसाइड नोट में आगे लिखा कि परमानंद मिश्रा, गीता मिश्रा और उनके पत्रकार बेटे निशांत मिश्रा उर्फ अंकित ने मिलकर यह पूरी साजिश रची है। इसके अलावा, परमानंद के बड़े बेटे, जो सेना (Fauj) में कार्यरत है, उसने 15 मई को फोन पर शिक्षक को सीधे गोली मारने की धमकी दी थी। पीड़ित ने मांग की है कि यदि थाना प्रभारी और पत्रकार के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) निकाली जाए, तो पूरी साजिश बेनकाब हो जाएगी।

बंदूक के साथ निशांत मिश्रा उर्फ अंकित।

बंदूक के साथ निशांत मिश्रा उर्फ अंकित।

कलेक्टर की कार्रवाई से निराशा और उच्च स्तरीय जांच की मांग
अनिल तिवारी अपनी ईमानदारी और उत्कृष्ट कार्य के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में जिले के कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी की कार्यप्रणाली पर भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा कि कलेक्टर को अपने ही विभाग के एक उत्कृष्ट कर्मचारी पर भरोसा करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने सच्चाई जाने बिना दंड तय कर दिया।

क्या रीवा शिक्षक मामले की सीबीआई जांच होगी?
पीड़ित शिक्षक ने मरने से पहले देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय या सीबीआई (CBI) जांच कराने की गुहार लगाई है। उन्होंने लिखा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य निर्दोष और ईमानदार नागरिक को इस तरह तिल-तिल कर मरने पर मजबूर न होना पड़े।

सामूहिक आत्महत्या की धमकी क्यों दी गई और परिजनों का क्या कहना है?
शिक्षक के दोबारा जहर खाने की खबर मिलते ही उनके परिजनों और रिश्तेदारों में कोहराम मच गया। शिक्षक की बेटी प्रिया तिवारी ने अत्यंत भावुक और आक्रोशित होते हुए पुलिस प्रशासन को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया है।

प्रिया ने कहा:

"एक तथाकथित पत्रकार और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों ने मिलकर मेरे पापा की जिंदगी को नरक बना दिया। हमारा पूरा परिवार न्याय की भीख मांगने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटता रहा, लेकिन यह अंधा और बहरा सिस्टम कुछ नहीं सुन रहा। एक ईमानदार इंसान को आखिरकार मौत चुननी पड़ी। अगर मेरे पापा को कुछ भी हुआ, तो हमारा पूरा परिवार सामूहिक आत्महत्या कर लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रीवा पुलिस और जिला प्रशासन की होगी।"

रीवा पुलिस अधीक्षक (SP) का इस मामले पर क्या बयान है?
इस बेहद संवेदनशील मामले में लापरवाही बरतने के आरोपों के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इससे पहले गुरुवार को पीड़ित परिवार ने रीवा के एसपी गुरुकरण सिंह से भी मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने कहा है कि परिवार का पक्ष सुना गया है और वे एकतरफा कार्रवाई से परेशान थे। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं और आश्वस्त किया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर थाना प्रभारी सहित दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

रीवा की यह घटना इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जब रसूखदार, भ्रष्ट तंत्र और कलम का गलत इस्तेमाल करने वाले लोग एक साथ मिल जाते हैं, तो एक आम और ईमानदार नागरिक का जीना किस कदर मुहाल हो जाता है। 28 साल तक समाज को शिक्षित करने वाले एक गुरु को आज वेंटिलेटर पर अपनी जिंदगी की भीख मांगनी पड़ रही है। अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या सूबे की सरकार और वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में त्वरित संज्ञान लेकर दोषियों को जेल भेजते हैं या फिर पीड़ित परिवार को अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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