पुल में दरारें या सिस्टम के छेद? भ्रष्टाचार की 'सरिया' ने थामी विंध्य की रफ्तार, मैहर से रीवा तक वाहनों का 'महा-रेला'! बीहर पुल ने छीनी 10 हजार ड्राइवरों की नींद, बेला बायपास बना 'बंधक'
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य की हृदयस्थली रीवा में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। चोरहटा बायपास स्थित बीहर नदी के पुल में दरारें आने के बाद प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध ने शहर के बाहरी रास्तों को ट्रकों के कब्रिस्तान में बदल दिया है। बुधवार रात 9 बजे से शुरू हुआ यह जाम गुरुवार दोपहर तक 15 किलोमीटर की लंबाई पार कर चुका है।
जाम की 4 तस्वीरें…




15 किलोमीटर की कतार: बेला बायपास से मैहर टोल तक थमे पहिए
ताजा जानकारी के अनुसार, बेला बायपास और उससे जुड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर हजारों भारी वाहन सड़क के दोनों ओर बेतरतीब खड़े हैं। जाम का असर इतना व्यापक है कि यह बेला-गोविंदगढ़ रोड से होते हुए मैहर टोल प्लाजा तक पहुँच गया है। छोटे वाहन और एम्बुलेंस भी इस कतार के बीच फंसने को मजबूर हैं।
बीहर पुल की बदहाली: भ्रष्टाचार या तकनीकी चूक?
साल 2005 में पाथ इंडिया कंपनी द्वारा निर्मित यह पुल महज 20 वर्षों में ही जवाब दे गया, जबकि इसकी अनुमानित आयु 50 वर्ष थी। पुल के गर्डर और पियर कैप में आई गंभीर दरारों के बाद प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से 30 अप्रैल 2026 तक भारी वाहनों की एंट्री बैन कर दी है। इसी कारण रताहरा से चोरहटा तक का मुख्य मार्ग ठप पड़ा है।
मरम्मत कार्य के कारण ट्रैफिक डायवर्जन किया गया

रीवा बायपास मार्ग पर स्थित बीहर नदी पुल के मरम्मत कार्य के कारण ट्रैफिक डायवर्जन किया गया है। सतना, मैहर, प्रयागराज और मिर्जापुर की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए नए मार्ग निर्धारित किए गए हैं।
भूखे-प्यासे ट्रक ड्राइवर: पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
जाम में फंसे ड्राइवरों का दर्द छलक उठा है। ड्राइवर मुकेश और राजेश ने बताया कि वे रात भर से बिना पानी और भोजन के सड़क पर खड़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सतना से आए ट्रैफिक डीएसपी संजय खरे ने आरोप लगाया है कि रीवा पुलिस जाम खुलवाने में सक्रिय सहयोग नहीं कर रही है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।

पुल की बदहाली और जाम का गणित: आखिर क्यों थमी रीवा की रफ्तार?
रीवा: चौरहटा बायपास पर स्थित बीहर नदी पुल की जर्जर हालत ने विंध्य के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग को ठप कर दिया है। साल 2005 में पाथ इंडिया कंपनी द्वारा निर्मित इस पुल की मियाद (Life) 50 साल तय की गई थी, लेकिन विडंबना देखिए कि महज 20 साल के भीतर ही यह पुल जवाब दे गया।
पुल में आई दरारें और प्रशासन की सख्ती
पुल के मुख्य ढांचे यानी गर्डर और पियर कैप में गंभीर दरारें देखी गई हैं, जो किसी भी समय बड़े खतरे का संकेत हैं। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने 30 अप्रैल 2026 तक भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस पाबंदी से रताहरा से लेकर चौरहटा तक की मुख्य सड़क पर सन्नाटा है, लेकिन इसका सारा बोझ वैकल्पिक मार्गों पर आ गया है।
मैदानी स्थिति और प्रशासनिक निरीक्षण
लगातार बिगड़ते हालातों के बीच हुजूर एसडीएम डॉ. अनुराग तिवारी ने स्वयं मोर्चा संभाला और ग्राउंड जीरो पर जाकर पुल का मुआयना किया। उन्होंने यातायात अधिकारियों को व्यवस्था सुचारू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, जनता में इस बात को लेकर आक्रोश है कि वैकल्पिक सड़कों की हालत दुरुस्त किए बिना ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया।

ट्रैफिक डायवर्जन: मैहर और सतना पर बढ़ा बोझ
पुल बंद होने के बाद प्रयागराज और वाराणसी की ओर जाने वाले ट्रकों और भारी ट्रालों को अब मैहर-सतना-चित्रकूट मार्ग से भेजा जा रहा है। अचानक वाहनों का दबाव बढ़ने से नेशनल हाईवे-30 (मैहर) पर स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है।
अधिकारियों की अपील: वैकल्पिक मार्ग ही सहारा
मैहर एसपी अवधेश प्रताप सिंह ने चालकों से अपील की है कि वे लंबी दूरी के लिए निर्धारित रूट का ही पालन करें ताकि अव्यवस्था कम हो। वहीं, स्थानीय यात्रियों और हल्के वाहनों के लिए प्रशासन ने रीवा शहर के पुराने रूट को खुला रखा है, ताकि छोटे वाहनों को इस महाजाम से बचाया जा सके।
मुख्य बिंदु
- निर्माता: पाथ इंडिया कंपनी (2005)
- समस्या: 20 साल में ही गर्डर और पियर कैप में आई दरारें।
- प्रतिबंध: 30 अप्रैल 2026 तक भारी वाहन वर्जित।
- रूट डायवर्जन: भारी वाहन मैहर-सतना-चित्रकूट होकर निकलेंगे।
- प्रशासनिक पहल: एसडीएम अनुराग तिवारी और मैहर एसपी अवधेश प्रताप सिंह लगातार निगरानी में।
नया डायवर्जन प्लान: यात्रियों के लिए जरूरी सूचना
प्रशासन ने भारी वाहनों को पूरी तरह से डायवर्ट कर दिया है:
- भारी वाहन: प्रयागराज और वाराणसी जाने वाले ट्रकों को अब मैहर-सतना-चित्रकूट मार्ग से जाना होगा।
- हल्के वाहन: कार और छोटी गाड़ियाँ रीवा शहर के पुराने अंदरूनी रास्तों का उपयोग कर सकती हैं।
- चेतावनी: महाराजा स्कूल के सामने भी भारी भीड़ के चलते जाम की स्थिति बनी हुई है।
क्यों टूटा पुल? विशेषज्ञों का बड़ा खुलासा
पुल विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं:
पास में खुदाई: नए पुल के निर्माण के लिए पुराने पुल के पास बहुत गहरी खुदाई की गई, जिससे जमीन धंस गई और पुराने पुल के पियर कैप में दरारें आ गईं।
घटिया सामग्री: तकनीकी जांच में संकेत मिले हैं कि जहाँ 20 एमएम सरिया इस्तेमाल होना था, वहाँ कथित तौर पर 10 एमएम सरिया का अधिक उपयोग किया गया।
प्रशासनिक मुस्तैदी: भारी वाहनों के लिए रूट में फेरबदल
बीहर पुल की नाजुक स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी ने पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के साथ पुल का संयुक्त निरीक्षण किया। तकनीकी विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद, उन्होंने तत्काल प्रभाव से भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्तों पर भेजने (डायवर्ट करने) का निर्णय लिया है।

ग्राउंड जीरो पर तैनात पुलिस और प्रशासन
पुल पर दबाव कम करने के लिए प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर डटी हुई हैं। वर्तमान में:

- सख्ती से रोक: भारी लोडिंग वाहनों को पुल की तरफ आने से रोका जा रहा है।
- रूट मैनेजमेंट: पुलिस बल तैनात होकर हर ट्रक और भारी वाहन को निर्धारित डायवर्जन रूट की ओर मोड़ रहा है।
- निगरानी: स्थिति को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए अधिकारी पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि यातायात सुचारू बना रहे।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे को टालना और जर्जर हो चुके पुल को और अधिक क्षति से बचाना है।