रीवा ब्रेकिंग: आरक्षक पीयूष मिश्रा ने उठाया खौफनाक कदम, जहर खाने के बाद आईसीयू में जिंदगी की जंग

 
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रीवा के विश्वविद्यालय थाने में पदस्थ आरक्षक पीयूष मिश्रा ने जहरीला पदार्थ खाया, संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू में हालत गंभीर। पारिवारिक कारण की आशंका।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से पुलिस विभाग को हिला देने वाली एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है। शहर के संवेदनशील माने जाने वाले विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अंतर्गत पदस्थ एक आरक्षक (Constable) ने अज्ञात कारणों के चलते कीटनाशक पदार्थ का सेवन कर लिया। इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में पुलिसकर्मी को गंभीर हालत में शहर के सबसे बड़े शासकीय संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल (SGMH) में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और डॉक्टरों की विशेष टीम उनकी जान बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है।

गुरुवार शाम को आरक्षक की तबीयत बिगड़ने पर कैसे अस्पताल पहुंचाया गया?
घटना का घटनाक्रम गुरुवार शाम का बताया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय थाने में अपनी सेवाएं दे रहे आरक्षक पीयूष मिश्रा ने अचानक किसी जहरीले कीटनाशक का सेवन कर लिया। जहर शरीर में जाते ही उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिससे परिवार और आसपास के लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

जब साथियों और परिजनों को इस बात की भनक लगी कि आरक्षक ने कोई घातक रसायन गटक लिया है, तो बिना एक पल गंवाए उन्हें तुरंत आपातकालीन स्थिति में रीवा के संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचते ही आपातकालीन कक्ष (Emergency Ward) के चिकित्सा कर्मियों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया और स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्हें तत्काल आईसीयू (Intensive Care Unit) में शिफ्ट कर दिया गया।

संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू में कैसी है आरक्षक की हालत?
आरक्षक पीयूष मिश्रा वर्तमान में संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू वार्ड की गहन निगरानी में हैं। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों और विशेषज्ञों की एक टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

चिकित्सकीय बुलेटिन: डॉक्टरों के मुताबिक, कीटनाशक का असर उनके शरीर के अंदरूनी अंगों पर काफी तेजी से हुआ है, जिसके कारण उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
जीवन रक्षक प्रणाली: उन्हें डॉक्टरों की देखरेख में विशेष चिकित्सा उपकरणों और दवाओं के सहारे स्थिर रखने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारी लगातार उनके स्वास्थ्य की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।

घटना के पीछे पारिवारिक कलह या तनाव की क्या है आशंका?
इस गंभीर घटना के सामने आने के बाद से ही तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। प्रारंभिक पुलिस जांच और शुरुआती जानकारियों में यह आशंका जताई जा रही है कि इस घटना के पीछे कोई पारिवारिक वजह या आंतरिक मानसिक तनाव हो सकता है।

हालांकि, अभी तक किसी भी आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरक्षक पीयूष मिश्रा ने आखिर किन परिस्थितियों और किस दबाव में आकर इतना बड़ा और खौफनाक कदम उठाया। क्या यह घरेलू कलह का परिणाम था या फिर कार्यस्थल का कोई मानसिक दबाव, इन तमाम पहलुओं पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी इस बात की गहराई से छानबीन कर रहे हैं कि आखिर गुरुवार शाम ऐसा क्या हुआ था जिसके कारण एक जिम्मेदार पुलिसकर्मी को यह कदम उठाना पड़ा।

पुलिस विभाग में इस गंभीर घटना के बाद क्या स्थिति बनी हुई है?
पीयूष मिश्रा रीवा के विश्वविद्यालय थाने में बतौर आरक्षक अपनी सेवाएं दे रहे थे। खाकी वर्दी पहनने वाला एक सिपाही जब खुद इस तरह की चरम स्थिति से गुजरता है, तो यह पूरे पुलिस प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय बन जाता है।

घटना की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाने के अन्य साथी पुलिसकर्मी और कई वरिष्ठ अधिकारी तुरंत संजय गांधी अस्पताल पहुंचे। वे लगातार डॉक्टरों के संपर्क में हैं और परिवारिक जनों से भी बातचीत कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जब आरक्षक की सेहत में सुधार होगा और वे बयान देने की स्थिति में आएंगे, तभी उनके मजिस्ट्रेट या पुलिस के सामने दिए जाने वाले बयानों के आधार पर ही असली वजह से पर्दा उठ सकेगा। फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस आरक्षक की जान बचाने और उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित करने पर है।

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