नरक बना रीवा का बोदाबाग! धूल और गंदे पानी से त्रस्त जनता का फूटा गुस्सा, कल चक्काजाम का ऐलान

 
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रीवा शहर के बोदाबाग में जर्जर सड़क, उड़ती धूल और टूटी पाइपलाइन से नाराज होकर स्थानीय लोगों ने रविवार को रविदास चौराहे पर चक्काजाम करने का ऐलान किया है।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा शहर अंतर्गत बोदाबाग इलाके से बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के अभाव, उखड़ी हुई सड़कों, लगातार उड़ते धूल के गुबार और क्षतिग्रस्त हो चुकी बुनियादी अधोसंरचना के कारण स्थानीय नागरिकों और छोटे व्यापारियों का धैर्य अब पूरी तरह टूट चुका है। प्रशासनिक उपेक्षा से त्रस्त होकर क्षेत्र के निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने प्रशासन को दोटूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज समस्याओं का तुरंत निराकरण नहीं किया गया, तो वे रविवार को बोदाबाग स्थित रविदास चौराहा पर एकत्रित होकर शांतिपूर्ण ढंग से चक्काजाम आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

धंस गई डामर सड़क, सीवर और पेयजल पाइपलाइन हुई क्षतिग्रस्त
स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक, नीम चौराहा से लेकर बाईपास तक जाने वाली मुख्य डामर सड़क की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। इस मार्ग पर चौबीसों घंटे भारी वाहनों (Heavy Vehicles) का दबाव रहता है, जिसके कारण करोड़ों रुपए की लागत से तैयार की गई यह सड़क पूरी तरह से जर्जर होकर कई स्थानों पर धंस चुकी है।

सड़क धंसने का सबसे बुरा असर जमीन के नीचे बिछाई गई सीवर मेन लाइन और चैंबरों पर पड़ा है, जो कई जगह से टूट चुके हैं। इसके साथ ही नालियां और स्वच्छ पेयजल सप्लाई करने वाली पाइपलाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वर्तमान में सबसे बड़ा डर यह बना हुआ है कि सीवर का गंदा और दूषित पानी पेयजल की पाइपलाइन में मिक्स हो सकता है, जिससे पूरे इलाके में कोई भयंकर जलजनित महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

धूल के गुबार से सांस लेना हुआ दूभर, सेहत पर मंडराया खतरा
बोदाबाग के नागरिकों ने बताया कि बाईपास निर्माण में लगी ठेका कंपनी ने अपनी लापरवाही छुपाने के लिए सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों में सिर्फ मिट्टी और मुरम डंप करवा दी। डामरीकरण न होने के कारण जब भी वहां से कोई भारी वाहन तेज रफ्तार में गुजरता है, तो पूरी सड़क से धूल का एक बड़ा गुबार उठता है।

यह स्थिति पूरे दिन बनी रहती है जिससे पूरे इलाके में विजिबिलिटी कम हो रही है और सांस लेना दूभर हो गया है। इस अत्यधिक धूल प्रदूषण (Dust Pollution) की वजह से घरों में रहने वाले नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और विशेषकर अस्थमा (दमा) के मरीजों की सेहत बहुत तेजी से बिगड़ रही है। इसके साथ ही जर्जर सड़क पर गड्ढों के कारण आए दिन राहगीर और दोपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।

कारोबार ठप और गंदे पानी की आशंका से सहमे स्थानीय रहवासी
बोदाबाग क्षेत्र की इस दुर्दशा पर वहां के विभिन्न वर्गों के लोगों का दर्द छलक उठा है:

व्यापारियों का नुकसान: स्थानीय दुकानदार और व्यापारी राजेश गुप्ता का कहना है कि दिनभर उड़ने वाली धूल के कारण दुकानों में रखा हुआ कीमती सामान पूरी तरह खराब हो रहा है। सड़क पर गहरे गड्ढे और धूल होने की वजह से ग्राहकों ने इस मार्ग पर आना लगभग बंद कर दिया है, जिससे दुकानदारों का व्यापार पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।

महिलाओं की चिंता: गृहिणी सुनीता मिश्रा ने घरेलू मोर्चे पर आ रही दिक्कतों को साझा करते हुए कहा कि पाइपलाइन टूटने की वजह से घरों में दूषित पानी आने का अंदेशा हर समय बना रहता है। इस डर से वे बच्चों और परिवार के बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित हैं।
शोर और मानसिक तनाव: क्षेत्र के निवासी अशोक मालानी ने बताया कि भारी ट्रकों और डंपरों के अनियंत्रित आवागमन ने शांतिपूर्ण रहवासी इलाके को नरक बना दिया है। दिन-रात होने वाले शोर और धूल के कारण लोगों का घरों में चैन से बैठना भी मुश्किल हो गया है।

बोदाबाग क्षेत्रवासियों की प्रशासन से प्रमुख मांगें क्या हैं?
आंदोलन की राह पर चलने को मजबूर बोदाबाग के रहवासियों ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन के सामने कुछ बेहद महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जो इस प्रकार हैं:

तत्काल डामरीकरण: नीम चौराहा से बाईपास तक की पूरी सड़क का बिना किसी देरी के नए सिरे से डामरीकरण (Road Tarring) किया जाए।
पाइपलाइनों की मरम्मत: क्षतिग्रस्त हो चुकी नालियों, सीवर लाइनों और साफ पानी की पाइपलाइनों को तुरंत सुधारा जाए ताकि गंदे पानी की आपूर्ति न हो।
भारी वाहनों पर नो-एंट्री: रहवासी क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग पर भारी कमर्शियल वाहनों के प्रवेश और आवागमन के लिए एक निश्चित समय सीमा (Time Limit) तय की जाए।
नियमित जलाव छिड़काव: जब तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक उड़ती धूल को दबाने के लिए नगर निगम द्वारा दिन में कम से कम तीन से चार बार पानी का छिड़काव अनिवार्य रूप से किया जाए।

नागरिकों का साफ कहना है कि यदि इन बुनियादी मांगों पर नगर निगम और जिला प्रशासन ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो रविवार के चक्काजाम के बाद वे इस पूरे मामले को लेकर माननीय न्यायालय (Court) का दरवाजा खटखटाएंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।

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