रीवा का चर्चित 28 लाख का अनुरक्षण घोटाला: पूर्व DEO की बढ़ीं मुश्किलें, नए कमिश्नर ने बैठाई विभागीय जांच
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्कूल भवनों के रखरखाव और कायाकल्प के नाम पर हुए बहुचर्चित 28 लाख रुपये के अनुरक्षण मद (Maintenance Fund) घोटाले में प्रशासनिक गाज गिरना जारी है। मामले में लीपापोती की कोशिशों को दरकिनार करते हुए नए रीवा संभागायुक्त शीलेंद्र सिंह ने सख्त रुख अख्तियार किया है। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और वर्तमान में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैकुंठपुर के प्राचार्य रामराज मिश्रा द्वारा प्रस्तुत जवाबों को अस्वीकार करते हुए कमिश्नर ने औपचारिक विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के आदेश जारी कर दिए हैं।
फर्जी कागजात और बिना काम 28 लाख का वारा-न्यारा
प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय विद्यालयों के रखरखाव के लिए जिला स्तर पर 50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, जिसमें से उत्कृष्ट विद्यालय (Excellence School) के लिए 5 लाख रुपये अलग से आवंटित थे। रीवा जिले में इस बजट की आड़ में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया गया।
जांच में सामने आया कि निर्माण एजेंसी सत्यव्रत कंस्ट्रक्शन को 6 विद्यालयों में मरम्मत कार्य का ठेका दिया गया था। ठेकेदार ने धरातल पर किसी भी प्रकार का काम नहीं कराया, लेकिन विभागीय साठगांठ से फर्जी बिल तैयार किए गए। अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन के 'कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र' (Work Completion Certificate) जारी कर दिए और लगभग 28 लाख रुपये की राशि का भुगतान ठेकेदार के खाते में कर दिया गया। जब प्रशासनिक स्तर पर इसकी फाइलें खंगाली गईं, तो मौके पर कोई कार्य नहीं पाया गया और पूरे तंत्र की कलई खुल गई।
तत्कालीन कमिश्नर की कार्रवाई पर उठे थे सवाल, अब खारिज हुआ DEO का जवाब
इससे पूर्व तत्कालीन संभागायुक्त बीएस जामोद के कार्यकाल के दौरान इस घोटाले पर दोहरी कार्रवाई के आरोप लगे थे। उस समय गुढ़ प्राचार्य विनय मिश्रा और एडीपीसी सुधाकर तिवारी को निलंबित कर दिया गया था, जबकि तत्कालीन डीईओ रामराज मिश्रा और लेखा अधिकारी पुष्पा पुसाम को कारण बताओ नोटिस और आरोप पत्र जारी कर सीमित कार्रवाई की गई थी।
मामले में कलेक्टर द्वारा भेजे गए कार्रवाई प्रस्ताव और दो बार जारी आरोप पत्रों के जवाब में पूर्व डीईओ रामराज मिश्रा ने जो तर्क पेश किए थे, उन्हें संयुक्त संचालक (JD) और संभागायुक्त स्तर पर असंतोषजनक पाया गया। तर्कों में कोई ठोस आधार न होने के कारण कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने उनके जवाब को नामंजूर कर दिया।
ADM बने जांच अधिकारी, 3 महीने में मांगी गई फाइनल रिपोर्ट
संभागायुक्त शीलेंद्र सिंह द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, पूर्व डीईओ रामराज मिश्रा के विरुद्ध विभागीय जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस जांच के लिए अपर कलेक्टर (ADM) को जांच अधिकारी (Inquiry Officer) नियुक्त किया गया है, जबकि वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी (Presenting Officer) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि तीन माह की समयावधि के भीतर पूरे साक्ष्यों और मूल दस्तावेजों के साथ विभागीय जांच प्रतिवेदन (Inquiry Report) संभागायुक्त कार्यालय को प्रस्तुत किया जाए। इस कड़े रुख से साफ है कि शासकीय राशि के गबन के इस मामले में सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके अधिकारियों को भी राहत मिलने के आसार नहीं हैं।