कबाड़ माफियाओं के आगे नतमस्तक रीवा का अमला! बिना NOC के धड़ल्ले से चल रहा अवैध धंधा; कब होगी खुली जांच? आखिर कौन है इनका आका? 

 
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मध्य प्रदेश के रीवा शहर से एक ऐसा सनसनीखेज और आंखें खोल देने वाला मामला सामने आया है, जो न सिर्फ शहर की सुरक्षा को चुनौती दे रहा है बल्कि स्थानीय कानून व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। रीवा के कई वार्डों और घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में चल रहा कबाड़ का कारोबार अब सिर्फ कचरा बटोरने तक सीमित नहीं रह गया है। यह धंधा अब एक संगठित 'क्राइम सिंडिकेट' का रूप ले चुका है। कबाड़ की इन दुकानों की आड़ में शहर और आसपास के जिलों से चोरी की गई गाड़ियां (बाइक और चार पहिया वाहन) धड़ल्ले से काटी जा रही हैं और चोरी का माल खुलेआम खरीदा-बेचा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस खौफनाक और अवैध खेल का असली जिम्मेदार कौन है?

सिर्फ कबाड़ या चोरी के माल का अड्डा? शहर के भीतर चल रहा है 'ब्लैक मार्केट'
स्थानीय नागरिकों और खुफिया सूत्रों की मानें तो शहर के भीतर गली-कूचों में तने कबाड़ के ये बड़े-बड़े गोदाम अपराधियों की महफूज पनाहगाह बन चुके हैं। रात के अंधेरे में इन दुकानों के शटर गिरते ही एक अलग ही दुनिया शुरू होती है। शहर में रोजाना चोरी होने वाले दोपहिया वाहन, सरकारी संपत्तियों के लोहे के गार्डर, बिजली के तार और अन्य कीमती सामान कौड़ियों के दाम पर इन कबाड़खानों में डंप कर दिए जाते हैं।

चूंकि इन दुकानों का कोई सरकारी रिकॉर्ड या प्रॉपर इनवॉइस (बिल) सिस्टम नहीं होता, इसलिए चोरों के लिए अपना माल ठिकाने लगाने का यह सबसे आसान जरिया बन गया है। कुछ ही घंटों के भीतर वाहनों को काटकर उनके पुर्जे अलग कर दिए जाते हैं, जिससे पुलिस के लिए भी सबूत जुटाना नामुमकिन हो जाता है।

जिम्मेदारों की आंखों पर 'गांधी छाप' पट्टी: आखिर पुलिस और नगर निगम क्यों हैं खामोश?
अब सबसे तीखा और सीधा सवाल रीवा के प्रशासनिक अमले पर उठता है। शहर के बीचों-बीच, घनी बस्तियों में बिना किसी वैध दस्तावेज, बिना ट्रेड लाइसेंस और बिना फायर एनओसी (NOC) के ये कबाड़खाने कैसे फल-फूल रहे हैं? क्या स्थानीय पुलिस प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को इसकी भनक नहीं है?

यह पूरा खेल 'ऊपर से नीचे तक' सैटिंग के दम पर चल रहा है। हर महीने कबाड़ माफियाओं द्वारा जिम्मेदारों की जेबें गर्म की जाती हैं, जिसके बदले उन्हें अवैध रूप से धंधा चलाने और चोरी की गाड़ियां काटने की मूक सहमति मिल जाती है। जब भी कोई छोटी-मोटी शिकायत होती है, तो अधिकारी जांच का नाटक रचकर फाइल बंद कर देते हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर इन भ्रष्ट अफसरों और कबाड़ माफियाओं के गठजोड़ पर नकेल कौन कसेगा?

बारूद के ढेर पर सो रहा है विंध्य का केंद्र: बिना NOC के सुलग रहे रिहायशी इलाके
चोरी के माल की खरीद-बिक्री के अलावा, ये अवैध गोदाम स्थानीय नागरिकों के लिए सीधे तौर पर मौत का कुआं साबित हो रहे हैं। इन अड्डों पर टन के हिसाब से प्लास्टिक, सूखा कागज, रबर के टायर और अन्य केमिकल युक्त कबाड़ का असुरक्षित भंडारण किया गया है। यहाँ न तो आग बुझाने का कोई इंतजाम है और न ही सुरक्षा के कोई मापदंड।

अग्निशमन विभाग ने बिना जांच किए इन्हें शहर के बीचों-बीच चलने दिया है। वहीं, स्थानीय पुलिस प्रशासन के बीट प्रभारियों की मिलीभगत से यहाँ चोरी के वाहन कट रहे हैं। नगर निगम रीवा ने भी इनके लाइसेंस और ड्रेनेज की कभी कोई चेकिंग नहीं की। अगर किसी दिन इन कबाड़खानों में एक छोटी सी चिंगारी भी भड़की, तो रीवा शहर के रिहायशी इलाके श्मशान घाट में तदेन हो जाएंगे, क्योंकि संकरी गलियों में दमकल की गाड़ियों का घुसना नामुमकिन है।

चोरी की गाड़ियां कटीं, लोहे के गार्डर बिके... और साहेब बोले- 'हमें खबर ही नहीं!'
रीवा के प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। शहर के अलग-अलग कोनों से लगातार यह मांग उठ रही है कि पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलें और इन कबाड़खानों पर छापा मारें। हैरानी की बात देखिए कि नियम कहते हैं कि कबाड़ व्यवसाय के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगरीय निकाय और अग्निशमन विभाग तीनों की अनुमति अनिवार्य है। लेकिन यहाँ तीनों विभागों के साहबान अपनी कुर्सियों पर बैठकर आंखें मूंदे हुए हैं और शायद किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं।

कब टूटेगी रीवा प्रशासन की कुंभकर्णी नींद?
यह खबर रीवा कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षक के लिए एक सीधा अल्टीमेटम है। जनता अब खोखले आश्वासनों से थक चुकी है। मांग सीधी है कि शहर के सभी कबाड़ गोदामों का तत्काल औचक निरीक्षण हो। कबाड़ के स्टॉक रजिस्टर की जांच की जाए कि उनके पास कबाड़ कहां से आ रहा है और वहां कटे हुए वाहनों के चेसिस नंबर खंगाले जाएं। बिना वैध अनुमतियों और सुरक्षा मानकों के चल रहे गोदामों को तुरंत सील कर शहर से बाहर खदेड़ा जाए। इसके साथ ही जिन बीट प्रभारियों और नगर निगम के बाबुओं के संरक्षण में यह अवैध धंधा चल रहा है, उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए।

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