सड़ा केला ऊपर से ग्राहक को धमकी! पडरा के खुशी फ्रेश बाजार जा वीडियो वायरल, फिर भी रीवा खाद्य विभाग मौन; कलेक्टर साहब, कब होगी जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई?

 
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रीवा के पडरा में खुशी फ्रिज बाजार पर सड़े केले बेचने और शिकायत पर धमकी देने का आरोप। दीपक सिंह बघेल ने खाद्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के शहरी क्षेत्र पडरा से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पडरा क्षेत्र स्थित एक प्रसिद्ध प्रतिष्ठान 'खुशी फ्रिज बाजार' पर एक जागरूक ग्राहक ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि उक्त दुकान पर ग्राहकों की सेहत और स्वास्थ्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

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आमतौर पर ग्राहक किसी बड़ी या नामी दुकान पर इस भरोसे के साथ जाता है कि उसे उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता और स्वास्थ्यकर वस्तुएं मिलेंगी। लेकिन इस मामले ने स्थानीय उपभोक्ताओं के मन में एक बड़ा संशय पैदा कर दिया है। रीवा के स्थानीय निवासी दीपक सिंह बघेल ने इस संबंध में खुलकर अपनी बात रखी है और वीडियो साक्ष्य के साथ प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस घटना ने रीवा के व्यापारिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। इस पूरे विवाद की शुरुआत एक बेहद सामान्य खरीदारी से हुई, जो बाद में एक बड़े विवाद में बदल गई। शिकायतकर्ता दीपक सिंह बघेल के अनुसार, उन्होंने पडरा स्थित खुशी फ्रिज बाजार से ₹60 मूल्य के केले खरीदे थे। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि प्रतिष्ठान की प्रतिष्ठा के अनुरूप फल ताजे और खाने योग्य होंगे।

शिकायत की मुख्य बात: दीपक सिंह बघेल ने बताया कि खरीदे गए केलों में से 14 केले पूरी तरह से खराब और सड़े हुए पाए गए।
वीडियो साक्ष्यों और शिकायतकर्ता के बयानों के अनुसार, केलों की स्थिति इतनी बदतर थी कि उन्हें सामान्य रूप से छिला भी नहीं जा सकता था। फलों का छिलका बाहरी तौर पर ही पूरी तरह से काला और गला हुआ नजर आ रहा था, जो यह साफ दर्शाता है कि सामान को बेचने से पहले उसकी गुणवत्ता की न्यूनतम जांच भी नहीं की गई थी। सड़े हुए फलों का सेवन सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए, गंभीर फूड पॉइजनिंग या पेट की बीमारियों का कारण बन सकता है।

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यह मामला केवल खराब सामग्री बेचने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें एक नया और गंभीर मोड़ तब आया जब पीड़ित ग्राहक ने इस लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई। दीपक सिंह बघेल का आरोप है कि जब उन्होंने खुशी फ्रिज बाजार के प्रबंधन या संबंधित कर्मियों के सामने इस खराब गुणवत्ता वाले सामान को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और सवाल पूछे, तो उन्हें उचित समाधान देने के बजाय धमकी दी गई।

किसी भी सभ्य समाज और विधिक व्यवस्था में ग्राहक भगवान का रूप माना जाता है। यदि कोई उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता है, तो उसकी समस्या का निवारण करना दुकानदार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। लेकिन यहाँ शिकायतकर्ता को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं जवाबदेही से बचने की कोशिश की जा रही है। इस रवैये के बाद पीड़ित ने मामले को सार्वजनिक करने और संबंधित विभागों के समक्ष ले जाने का निर्णय लिया।

यह घटना सीधे तौर पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के उल्लंघन का संकेत देती है। कानून के अनुसार:

  • प्रत्येक विक्रेता यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि वह जो खाद्य सामग्री बेच रहा है, वह मानव उपभोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हो।
  • यदि कोई दुकानदार सड़ा-गला या दूषित खाद्य पदार्थ बेचता है, तो यह खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत एक दंडनीय अपराध है।
  • ग्राहकों को खराब सामान के बदले रिफंड या रिप्लेसमेंट पाने का पूरा विधिक अधिकार है।

यदि दीपक सिंह बघेल द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो खुशी फ्रिज बाजार के खिलाफ न केवल भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, बल्कि खाद्य विभाग द्वारा दुकान का लाइसेंस भी निलंबित किया जा सकता है। ग्राहकों को धमकी देना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत भी एक गंभीर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।

मामले के वीडियो और विवरण सोशल मीडिया तथा स्थानीय मीडिया में आने के बाद, अब रीवा जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department Rewa) से एक सुर में निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की जा रही है। स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि रीवा के पडरा जैसे व्यस्त और वीआईपी क्षेत्रों में अगर इस तरह की लापरवाही हो रही है, तो अन्य छोटे बाजारों की स्थिति क्या होगी?

दीपक सिंह बघेल ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे पहले खुशी फ्रिज बाजार को एक विश्वसनीय और अच्छा प्रतिष्ठान मानते थे, लेकिन इस कड़वे अनुभव और उसके बाद मिले दुर्व्यवहार ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया है। अब यह जिला कलेक्टर, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इस मामले का संज्ञान लें, दुकान के स्टॉक की जांच करें और दूध का दूध व पानी का पानी करें।

यह कोई पहला मामला नहीं है जब रीवा में किसी दुकान पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हों। त्योहारों के सीजन में या सामान्य दिनों में भी कई बार बासी फल, मिलावटी मिठाइयां और दूषित सामग्रियां पकड़ी जाती रही हैं। लेकिन खुशी फ्रिज बाजार का यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यहाँ ग्राहक को जागरूक होने की सजा धमकी के रूप में मिली।

यह टाइमलाइन दर्शाती है कि पीड़ित ने क्रमबद्ध तरीके से अपनी समस्या को उठाया है। अगर छिलके से ही फल सड़ा हुआ दिख रहा था, तो उसे काउंटर पर बिक्री के लिए क्यों रखा गया? यह सीधे तौर पर व्यापारिक मुनाफे के लिए जनस्वास्थ्य की अनदेखी का मामला प्रतीत होता है। इस पूरे घटनाक्रम से यह निष्कर्ष निकलता है कि रीवा के पडरा क्षेत्र की इस घटना ने एक बार फिर उपभोक्ता अधिकारों की बहस को तेज कर दिया है।

दीपक सिंह बघेल की सजगता सराहनीय है कि उन्होंने इस नुकसान को चुपचाप सहने के बजाय समाज के सामने लाना उचित समझा। जब तक रीवा का खाद्य विभाग ऐसी दुकानों पर औचक निरीक्षण और सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक आम नागरिकों की सेहत इसी तरह खतरे में बनी रहेगी। इस मामले में निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है ताकि सच सामने आ सके और यदि प्रतिष्ठान दोषी है, तो उसे कड़ा सबक मिले, जिससे अन्य दुकानदारों को भी यह संदेश जाए कि ग्राहकों की सेहत और सम्मान सर्वोपरि है।

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