मंत्री जी के आने पर 'चकाचक', जाने पर 'कबाड़'! रीवा की बेटी ने खोली पोल: अस्पताल के चौथे फ्लोर पर मधुमक्खियों का राज, SGMH में अधिकारियों ने आंखों में झोंकी धूल, जागिए मंत्री जी

 
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स्वास्थ्य मंत्री के रीवा में अस्पताल का बुरा हाल, वार्डों में मधुमक्खी और कबूतरों ने दिया डेरा, अधीक्षक राहुल मिश्रा की लापरवाही पर जनता का फूटा गुस्सा।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले रीवा का सबसे बड़ा अस्पताल 'संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय' आज खुद बीमार नजर आ रहा है। जिस अस्पताल पर विंध्य के लाखों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं, वह आज कबूतरों का बसेरा और मधुमक्खियों का छत्ता बन चुका है। विडंबना देखिए कि एक तरफ स्वास्थ्य मंत्री जी की हर जगह तारीफ होती है, वहीं दूसरी ओर उनके नाक के नीचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व्यवस्था को दीमक की तरह चाट रहे हैं।

कबूतरों के अंडे और मधुमक्खी के छत्ते: क्या यही है हाई-टेक वार्ड? 
अस्पताल के चौथे फ्लोर (C4 वार्ड) की स्थिति देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कांप जाएगी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मरीजों के बेड के ठीक बगल में कबूतरों ने अंडे दे रखे हैं और दीवारों पर मधुमक्खियों के बड़े-बड़े छत्ते लगे हैं।

  • मरीज जो पहले से ही गंभीर बीमारियों से लड़ रहे हैं, उन्हें अब मधुमक्खियों के काटने का डर सता रहा है।
  • कबूतरों की गंदगी और बीट से संक्रमण (Infection) फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
  • वार्ड की हालत ऐसी है कि वहां रुकना तो दूर, सांस लेना भी दूभर है।

वीडियो वायरल: रोती व्यवस्था और जिम्मेदारों की बेशर्मी 
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक युवती अस्पताल की पोल खोलते हुए नजर आ रही है। वह दिखा रही है कि कैसे मरीजों के बेड के पास गंदगी का अंबार लगा है। युवती का कहना है कि जब स्वास्थ्य मंत्री जी दौरे पर आते हैं, तो उससे पहले पूरे अस्पताल को कांच की तरह चमका दिया जाता है, लेकिन जैसे ही वह जाते हैं, व्यवस्था वापस ढर्रे पर लौट आती है। जनता का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा मंत्री जी की आँखों में धूल झोंकी जा रही है।

अधीक्षक राहुल मिश्रा और प्रशासन पर उठते गंभीर सवाल 
इस पूरी अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर अस्पताल के अधीक्षक राहुल मिश्रा और उनका प्रशासन जिम्मेदार है।

  • निरीक्षण का अभाव: क्या अधीक्षक महोदय कभी वार्डों का दौरा नहीं करते? क्या उन्हें ये छत्ते और कबूतर नजर नहीं आते?
  • लापरवाही की इंतहा: वार्ड बॉय से लेकर सफाई कर्मचारियों तक की फौज होने के बावजूद मरीजों को ऐसी नारकीय स्थिति में क्यों रखा जा रहा है?
  • सिस्टम का फेलियर: जब विभाग के मुखिया रीवा से ही हैं, तब अधिकारियों की यह हिम्मत कैसे हो रही है कि वे व्यवस्था के नाम पर खिलवाड़ करें?

माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी, जनता का दर्द भी सुनिए 
रीवा की जनता का कहना है कि वे अपने विधायक और स्वास्थ्य मंत्री का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन अस्पताल के यह हालात उनके सम्मान को ठेस पहुँचा रहे हैं। लोग कह रहे हैं— "जब हमारे विधायक खुद स्वास्थ्य मंत्री हैं, तब यह हाल है, तो बाकी प्रदेश का क्या होगा?" मंत्री जी, आपसे निवेदन है कि अचानक (Surprise Visit) दौरा करें, बिना किसी पूर्व सूचना के। तब आपको पता चलेगा कि आपका प्रशासन आपको गुमराह कर रहा है। इन लापरवाह अधिकारियों पर जब तक डंडा नहीं चलेगा, तब तक गरीब मरीज पिसता रहेगा।

दिखावे की सफाई बनाम कड़वी हकीकत 
संजय गांधी अस्पताल की यह तस्वीर सरकार के 'स्वच्छ भारत' और 'बेहतर स्वास्थ्य' के दावों की पोल खोलती है। अस्पताल को केवल मंत्री के आने पर नहीं, बल्कि मरीजों के लिए हमेशा साफ रहना चाहिए। अधीक्षक राहुल मिश्रा और संबंधित वार्ड प्रभारियों पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि विंध्य की जनता को वह इलाज मिल सके जिसके वे हकदार हैं।

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