संकट में सेमरिया विधायक! अभय मिश्रा की कुर्सी जाएगी या बचेगी? हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : 9 केस और करोड़ों का कर्ज छिपाने का आरोप
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। महज 637 वोटों के बारीक अंतर से मिली उनकी जीत अब कानूनी पेच में फंस गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने विधायक की उस अर्जी को ठुकरा दिया है जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खारिज करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट की दो टूक: सुनवाई है जरूरी
जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य हैं। कोर्ट ने माना कि यह मामला केवल तकनीकी आधार पर बंद नहीं किया जा सकता, बल्कि अब इस पर नियमित 'ट्रायल' (सुनवाई) चलेगी।
क्यों संकट में है विधायकी? (मुख्य आरोप)
भाजपा प्रत्याशी रहे कृष्णपति त्रिपाठी द्वारा दायर इस याचिका में मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं:
-
आपराधिक मामलों को छिपाना: याचिकाकर्ता का दावा है कि अभय मिश्रा ने नामांकन दाखिल करते समय दिए गए शपथ पत्र (फॉर्म-26) में अपने खिलाफ दर्ज 9 आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी और वहां "Not Applicable" लिख दिया। आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर इसे 'भ्रष्ट आचरण' की श्रेणी में रखा गया है।
-
लाखों का कर्ज छिपाने का आरोप: आरोप है कि विधायक ने एक निजी बैंक (ICICI) से लिए गए लगभग 23 लाख के लोन की जानकारी छिपाई, जो ब्याज समेत अब 50 लाख के करीब पहुंच चुका है। हालांकि, विधायक पक्ष का तर्क है कि यह लोन एक कंपनी का था जिससे वे 2008 में ही अलग हो चुके हैं।
-
आय के स्रोत और अनुबंध: याचिका में आय के स्रोतों की अधूरी जानकारी और सरकारी विभागों के साथ कथित अनुबंधों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
मतदाताओं के अधिकार का मामला
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि उम्मीदवारों द्वारा दी गई जानकारी सीधे तौर पर मतदाताओं के सही निर्णय लेने के अधिकार से जुड़ी होती है। यदि शपथ पत्र में तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया है, तो यह चुनाव की वैधता को प्रभावित कर सकता है।
अगला कदम: 4 हफ्ते का समय
हाईकोर्ट ने अब विधायक अभय मिश्रा को इन सभी आरोपों पर अपना लिखित जवाब पेश करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। यदि ट्रायल के दौरान आरोप सच साबित होते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द होने तक की नौबत आ सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: क्या अभय मिश्रा की विधायकी अभी चली गई है? उत्तर: नहीं, अभी केवल याचिका पर सुनवाई (Trial) शुरू हुई है। अंतिम फैसला साक्ष्यों की जांच के बाद आएगा।
प्रश्न 2: चुनाव याचिका (Election Petition) क्या होती है? उत्तर: जब किसी चुनाव परिणाम में धांधली या उम्मीदवार द्वारा गलत जानकारी देने का संदेह होता है, तो प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी हाईकोर्ट में इसे चुनौती देता है।
प्रश्न 3: अगर आरोप साबित हुए तो क्या होगा? उत्तर: यदि कोर्ट शपथ पत्र में गलत जानकारी देने या भ्रष्ट आचरण को सही पाता है, तो विधायक का निर्वाचन शून्य (Void) घोषित किया जा सकता है।