"रीवा से दिल्ली तक छात्रों का हुंकार: 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के नारों से गूंजी ट्रेन, जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने विंध्य के युवा रवाना!"

 
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देश की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक छात्र आंदोलन ने अब पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र और विशेष रूप से रीवा जिले से सैकड़ों की संख्या में छात्र एवं युवा एकजुट होकर दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। देश की वर्तमान शिक्षा नीति, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधलियों और छात्रों की बुनियादी समस्याओं को लेकर युवाओं का यह आक्रोश अब सड़कों और ट्रेनों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

रीवा रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार होकर दिल्ली जा रहे इन छात्रों में अपार उत्साह और आक्रोश का मिला-जुला रूप देखने को मिला। युवाओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि देश के पूरे छात्र समुदाय के भविष्य से जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में लिए जा रहे निर्णयों और नीतिगत विफलताओं के विरोध में विंध्य की यह युवा शक्ति जंतर-मंतर पर हुंकार भरने जा रही है।

ट्रेन बनी विरोध का केंद्र: "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" के नारों से गूंजे कोच
रीवा से दिल्ली जाने वाली ट्रेन के भीतर का नज़ारा किसी जन-आंदोलन के मंच जैसा प्रतीत हो रहा था। ट्रेन के रवाना होते ही विभिन्न डिब्बों में सवार छात्रों ने एक स्वर में नारेबाजी शुरू कर दी। "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो", "शिक्षा का निजीकरण बंद करो", और "छात्र एकता जिंदाबाद" जैसे गगनभेदी नारों से ट्रेन के कई कोच लगातार गूंजते रहे।

छात्रों के हाथों में विभिन्न प्रकार के पोस्टर, तख्तियां और बैनर थे, जिन पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़े संदेश लिखे हुए थे। यात्रा के दौरान युवाओं ने केवल नारेबाजी ही नहीं की, बल्कि आपस में संवाद स्थापित कर इस आंदोलन को और अधिक व्यवस्थित बनाने की रणनीतियों पर भी चर्चा की।

दिल्ली में हुए लाठीचार्ज के खिलाफ विंध्य के छात्रों में जबरदस्त आक्रोश
दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए हालिया लाठीचार्ज ने आग में घी डालने का काम किया है। रीवा से जा रहे युवाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिल्ली में अपने अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे छात्र-छात्राओं पर पुलिसिया बल प्रयोग अत्यंत निंदनीय और लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत है।

छात्रों का मानना है कि सरकार युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाने के लिए दमनकारी नीतियां अपना रही है। लाठीचार्ज की घटना के विरोध में ही रीवा और पूरे विंध्य अंचल के युवाओं ने यह तय किया कि वे घरों में बैठने के बजाय सीधे दिल्ली जाकर अपने साथियों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे। युवाओं का कहना है कि लाठियों के दम पर छात्रों के हौसलों को तोड़ना संभव नहीं है।

ट्रेन के अन्य यात्रियों ने भी जाना छात्रों का दर्द और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
ट्रेन के सफर के दौरान छात्रों द्वारा किए जा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नारेबाजी ने ट्रेन में सफर कर रहे अन्य आम यात्रियों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया। कई यात्रियों ने छात्रों से बात की और यह जानने का प्रयास किया कि वे इतनी बड़ी संख्या में दिल्ली क्यों जा रहे हैं।

छात्रों ने बहुत ही शालीनता और स्पष्टता के साथ अन्य सह-यात्रियों को वर्तमान शिक्षा प्रणाली की कमियों, बढ़ती फीस, परीक्षाओं की अनिश्चितता और दिल्ली में साथी छात्रों पर हुए अत्याचार के बारे में जानकारी दी। छात्रों के तर्कों को सुनकर कई आम नागरिकों ने भी उनकी मांगों का नैतिक समर्थन किया और माना कि सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले मुद्दों पर तुरंत गंभीर कदम उठाने चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए ट्रेन के भीतर नारेबाजी के वीडियो
ट्रेन के अंदर छात्रों द्वारा की जा रही नारेबाजी और प्रदर्शन के कई वीडियो यात्रियों और स्वयं छात्रों द्वारा अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किए गए। ट्रेन के चलने के कुछ ही घंटों के भीतर ये वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से प्रसारित होने लगे।

वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह दर्जनों छात्र ट्रेन की गैलरी और सीटों पर बैठकर एक लय में देश के शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और छात्र एकजुटता के नारे बुलंद कर रहे हैं। इन वीडियो के इंटरनेट पर आते ही सोशल मीडिया पर भी इस आंदोलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। देशभर के डिजिटल यूजर रीवा के छात्रों के इस जज्बे की सराहना कर रहे हैं और वीडियो तेजी से ट्रेंड हो रहे हैं।

शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष रखने का संकल्प
दिल्ली पहुंच रहे युवाओं ने यह साफ कर दिया है कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह की अराजकता फैलाना नहीं है। वे पूरी तरह से गांधीवादी और संवैधानिक तरीकों का पालन करते हुए जंतर-मंतर पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। छात्रों के प्रतिनिधियों का कहना है कि देश की राजधानी में पहुंचकर वे प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे और अपनी मुख्य मांगों को रेखांकित करेंगे।

युवाओं की प्रमुख मांगें हैं कि:

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री तुरंत अपने पद से त्यागपत्र दें।
  • दिल्ली में छात्रों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
  • देश भर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
  • शिक्षा के व्यवसायीकरण पर तुरंत रोक लगाई जाए।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्र अधिकारों की मांग को लेकर उठते सवाल
रीवा से निकला यह छात्र दल इस बात का प्रमाण है कि असंतोष अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों तक फैल चुका है। जब देश का युवा इतनी बड़ी संख्या में अपनी पढ़ाई और करियर छोड़कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होता है, तो यह मौजूदा नीति-निर्माताओं के लिए गंभीर चेतावनी होती है।

विंध्य के छात्रों का कहना है कि सरकार यदि वास्तव में देश के विकास के प्रति गंभीर है, तो उसे सबसे पहले देश की युवा आबादी की आवाज सुननी होगी। शिक्षा जैसे मूलभूत विषय पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या दमनकारी रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जंतर-मंतर पर होने जा रहा यह विशाल जमावड़ा केंद्र सरकार पर नीतिगत बदलावों के लिए दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

देशव्यापी छात्र आंदोलन में विंध्य की युवाओं की मजबूत भागीदारी
संक्षेप में कहें तो, रीवा से दिल्ली के लिए रवाना हुए सैकड़ों छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि विंध्य की धरती हमेशा से सामाजिक और राजनीतिक बदलावों में अग्रणी रही है। ट्रेन के भीतर गूंजे नारे केवल आवाज़ें नहीं थीं, बल्कि वे देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से पीड़ित करोड़ों युवाओं की साझा पीड़ा का प्रकटीकरण थीं।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर रीवा के इन युवाओं की मौजूदगी निश्चित रूप से छात्र आंदोलन को एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगी। अब देखना यह होगा कि दिल्ली की सत्ता में बैठे जिम्मेदार अधिकारी इन आक्रोशित युवाओं की मांगों पर क्या सकारात्मक रुख अपनाते हैं।

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