नौकरी सरकारी, कंट्रोल प्राइवेट! बिजली विभाग आउटसोर्सिंग भर्ती का वो सच, जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएंगे : 1 लाख का एडवांस कमीशन
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। वर्तमान समय में बेरोजगारी का लाभ उठाकर युवाओं को ठगने और विभागों में बैकडोर एंट्री दिलाने वाले रैकेट सक्रिय हैं। एक हालिया संवाद के लीक होने से मध्य प्रदेश के बिजली विभाग के अंतर्गत होने वाली आउटसोर्सिंग भर्तियों की कड़वी सच्चाई सामने आई है। इस पूरे मामले में एक एजेंट और नौकरी के इच्छुक युवक के बीच हुई बातचीत से स्पष्ट होता है कि बिजली विभाग में सब स्टेशन ऑपरेटर (SSO) की नौकरी दिलाने के नाम पर करीब ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) तक की मांग की जा रही है।
यह पूरा खेल सरकारी विभाग की नाक के नीचे चल रहा है, जहाँ पद तो सरकारी विभाग का है लेकिन नियंत्रण निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों और कांट्रेक्टरों के हाथ में सौंप दिया गया है। एजेंटों और ठेकेदारों का यह गठजोड़ सीधे तौर पर बेरोजगार आईटीआई पास युवाओं को निशाना बना रहा है, जिन्हें जल्द से जल्द ज्वाइनिंग का लालच देकर फंसाया जाता है।
सब स्टेशन ऑपरेटर जॉब प्रोफाइल और जरूरी योग्यता क्या है?
यदि आप यह सोच रहे हैं कि बिजली विभाग में सब स्टेशन ऑपरेटर कैसे बने, तो इसके लिए विभाग द्वारा कुछ कड़े तकनीकी मापदंड निर्धारित किए गए हैं। बातचीत के अनुसार, इस नौकरी के लिए निम्नलिखित योग्यताएं अनिवार्य हैं:
शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता
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उम्मीदवार का इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में आईटीआई (ITI) पास होना अनिवार्य है। बिना इस तकनीकी सर्टिफिकेट के किसी भी ग्रिड या सब स्टेशन पर ऑपरेटर के रूप में नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
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उम्र सीमा: आवेदक की आयु लगभग 26 वर्ष (यानी जन्म वर्ष 2000 के आसपास) होनी चाहिए, जिससे वे लंबी अवधि तक ऊर्जावान रहकर सब स्टेशन की शिफ्ट संभाल सकें।
मुख्य कार्य और जिम्मेदारियां
एक सब स्टेशन ऑपरेटर का मुख्य काम ग्रिड से होने वाली बिजली सप्लाई की मॉनिटरिंग करना, ट्रिपिंग की स्थिति में फीडर को संभालना, और लॉग-शीट में हर घंटे का बिजली लोड दर्ज करना होता है। यह एक जिम्मेदारी भरा और जोखिम भरा तकनीकी कार्य है।
₹1,800 से ₹14,800 का वेतनमान: आउटसोर्सिंग कंपनियों का गणित
इस लीक हुए संवाद में सबसे चौंकाने वाला खुलासा वेतन संरचना (Salary Structure) को लेकर हुआ है। आउटसोर्सिंग के जाल में फंसे कर्मचारियों के वेतन में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है।
| नौकरी का श्रेणीकरण | शैक्षणिक योग्यता | मासिक मानदेय (₹) | पद की प्रकृति व शर्तें |
| अंकित वाली सामान्य जॉब | केवल 10वीं पास | ₹1,800 प्रति माह | अत्यंत न्यूनतम वेतन, जिसमें केवल हेल्पर या संविदा के निचले स्तर का कार्य शामिल है। |
| एजेंसी/कांट्रेक्टर के माध्यम से | आईटीआई इलेक्ट्रिशियन | ₹11,800 से ₹14,800 | यह पद सीधे सब स्टेशन ऑपरेटर का होता है। काम सरकारी ग्रिड पर होता है लेकिन भुगतान कंपनी करती है। |
एजेंट के अनुसार, जो नौकरियां मुख्य एजेंसी के थ्रू सीधे कांट्रेक्टर द्वारा दिलाई जाती हैं, उनमें सैलरी तो ठीक-ठाक (₹11,800 से ₹14,800) दिखती है, लेकिन इसके बदले में युवाओं से शुरुआती तौर पर एक लाख रुपये की मोटी सिक्योरिटी या एडवांस कमीशन वसूल लिया जाता है।
भर्ती के लिए मांगे जा रहे अनिवार्य दस्तावेज और औपचारिकताएं
संवाद से यह भी साफ हुआ है कि भले ही यह प्रक्रिया बैकडोर या पैसों के लेन-देन पर आधारित हो, लेकिन कागजी कार्रवाई को पूरी तरह से 'आधिकारिक और वैध' दिखाने की कोशिश की जाती है। यदि कोई उम्मीदवार इस जाल में आता है, तो उससे तत्काल निम्नलिखित दस्तावेजों के सेट मांगे जाते हैं:
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पहचान पत्र: आधार कार्ड (दो अलग-अलग साइज में) और पैन कार्ड (सामने के हिस्से का स्पष्ट स्कैन)।
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वित्तीय दस्तावेज: बैंक पासबुक की छायाप्रति (जिसमें वेतन ट्रांसफर किया जा सके)।
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तकनीकी दस्तावेज: यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जो पीएफ कटौती के लिए अनिवार्य है।
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अन्य: पासपोर्ट साइज फोटो, वैध ईमेल आईडी, सक्रिय व्हाट्सएप मोबाइल नंबर और डिजिटल/भौतिक हस्ताक्षर।
हिनौटा और सिमरिया सब स्टेशन पर नियुक्ति और ट्रांसफर का अंदरूनी सच
इस रैकेट का भौगोलिक नेटवर्क मध्य प्रदेश के मऊ, हिनौटा और सेमरिया क्षेत्रों में फैला हुआ है। एजेंट युवाओं को मनचाही पोस्टिंग का लालच देकर जाल में फंसाते हैं।
स्थानांतरण (Transfer) रोकने की डीलिंग
संवाद के मुताबिक, शुरुआत में उम्मीदवार को हिनौटा सब स्टेशन पर ज्वाइनिंग दी जाती है, जो कि मऊ क्षेत्र से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चूंकि इतनी दूरी पर अप-डाउन करना किसी भी स्थानीय युवा के लिए कठिन है, इसलिए वे सेमरिया सब स्टेशन (जो मऊ से मात्र 20 किलोमीटर है) में ट्रांसफर चाहते हैं।
एजेंट का दावा: "हिनौता से सेमरिया ट्रांसफर कराने या हिनौटा में ही ट्रांसफर रुकवाने के लिए ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) का अतिरिक्त खर्च आता है। कांट्रेक्टर से सेटिंग कर ट्रांसफर को मैनेज कर दिया जाएगा।"
क्या रिश्वत देना सुरक्षित है? लेबर कोर्ट और श्रमिक अधिकारों की हकीकत
बातचीत के अंतिम चरण में एजेंट उम्मीदवार को सुरक्षा का भरोसा दिलाने के लिए 'लेबर कोर्ट' का हवाला देता है। कांट्रेक्ट हर साल रिन्यू होता है और कंपनियां बदलती रहती हैं, जिससे नौकरी पर हमेशा तलवार लटकी रहती है।
कड़े अनुशासन के नियम
सब स्टेशन संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, इसलिए वहां कुछ कड़े नियम लागू किए गए हैं:
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ड्यूटी के दौरान या सब स्टेशन परिसर में शराब, गुटखा, सिगरेट, गांजा या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है। पकड़े जाने पर तत्काल बर्खास्तगी की जा सकती है।
क्या कानूनी सुरक्षा मिलती है?
एजेंट कहता है कि यदि कांट्रेक्टर या एजेंसी बीच में बिना किसी वैध कारण के नौकरी से निकालती है, तो कर्मचारी लेबर कोर्ट (श्रम न्यायालय) में शिकायत कर सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि जो नौकरी खुद ₹1 लाख की रिश्वत और अवैध माध्यम से शुरू हुई हो, उसे लेबर कोर्ट में साबित करना किसी भी पीड़ित युवा के लिए नामुमकिन हो जाता है।