सरकारी पैसे की ऐसी बंदरबांट? एक ही घर से पिता, माता और चाची सब बन गए पंच! रीवा की इस पंचायत का अनोखा कारनामा देख अधिकारियों के भी उड़े होश

 
XFCV
रीवा की ग्राम पंचायत कुइयां खुर्द में रोजगार सहायक पर पीएम आवास और मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोप; जिला पंचायत CEO से की गई शिकायत।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के अंतर्गत आने वाले जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान की ग्राम पंचायत कुइयां खुर्द से भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और शासकीय पद के दुरुपयोग का एक बेहद संगीन मामला प्रकाश में आया है। ग्राम पंचायत कुइयां खुर्द के उपसरपंच एडवोकेट राममणि मिश्रा द्वारा जिला पंचायत कार्यालय रीवा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) तथा जिला अध्यक्ष महोदय को एक विस्तृत और तथ्यपरक लिखित शिकायती आवेदन सौंपा गया है। इस शिकायत में ग्राम पंचायत में पदस्थ रोजगार सहायक कमलेश सोंधिया पर शासकीय योजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता बरतने, अपनों को आर्थिक लाभ पहुंचाने और पद का घोर दुरुपयोग करने के सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने रोजगार सहायक के तत्काल स्थानांतरण और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की पुरजोर मांग की है।

पी.एम. आवास योजना में बड़ी जालसाजी: बिना मकान बने खाते में आई राशि 
शिकायत पत्र के प्रथम बिंदु के अनुसार, रोजगार सहायक कमलेश सोंधिया, जो कि मौजा तमहा के पुस्तैनी निवासी हैं, अपनी प्रथम पदस्थापना के दिनांक से ही इस ग्राम पंचायत में पदस्थ हैं। आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना (फेस-1) के अंतर्गत आने वाले कई गरीब हितग्राहियों के हक पर डाका डाला है।

"कमलेश सोंधिया हितग्राहियों के मकान पूर्ण हुए बिना ही कागजों पर उसे पूर्ण दिखाकर पूरी शासकीय राशि स्वीकृत करा लेते हैं। इसके बाद उस राशि को सांठगांठ करके अपने निजी खातों में डलवाकर बंदरबांट करने में माहिर हैं। जब भी कोई गरीब ग्रामीण अपनी समस्या लेकर जाता है, तो ये हमेशा 'सर्वर डाउन' होने का बहाना बनाकर उन्हें टरका देते हैं, जिसके कारण अनेक वास्तविक पात्र लोग कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित रह गए हैं।" - एडवोकेट राममणि मिश्रा (उपसरपंच, कुइयां खुर्द)

एक ही छत के नीचे तीन निर्विरोध पंच: पद के दुरुपयोग का अनोखा खेल 
शिकायत के द्वितीय बिंदु में पंचायती राज व्यवस्था के भीतर भाई-भतीजावाद का एक अत्यंत अनोखा और हैरान करने वाला उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान पंचायत कार्यकाल के दौरान रोजगार सहायक कमलेश सोंधिया ने अपनी पत्नी को सरपंच पद का चुनाव लड़ाया था, हालांकि जनता ने उन्हें नकार दिया और वह चुनाव हार गईं। इसके बाद वर्तमान में श्रीमती राधा पटेल वहां की सरपंच निर्वाचित हुईं।

परंतु, रोजगार सहायक ने अपने पद के रसूख का इस्तेमाल करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपने घर की जागीर बना डाला। प्रशासनिक जांच का सबसे बड़ा विषय यह है कि कमलेश सोंधिया के पिता मंगलेशदास सोंधिया (वार्ड क्रमांक 16), उनकी माता श्रीमती सुमित्रा सोंधिया (वार्ड क्रमांक 18) तथा उनकी सगी चाची रेखा पत्नी रत्नेश सोंधिया (वार्ड क्रमांक 20) को एक ही योजना के तहत ग्राम पंचायत कुइयां खुर्द से निर्विरोध पंच निर्वाचित घोषित करवा दिया गया। एक ही घर से तीन-तीन लोग अलग-अलग वार्डों से निर्विरोध पंच कैसे बन गए, यह प्रशासनिक हलकों में भारी जांच और गहरी जनचर्चा का विषय बन चुका है।

चुनावी रंजिश और जनता से प्रतिशोध: सरकारी योजनाओं की जानकारी पर ताला 
शिकायत के तीसरे और चौथे बिंदु में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि चुनाव में अपनी पत्नी की करारी हार के बाद से ही रोजगार सहायक कमलेश सोंधिया ग्राम पंचायत कुइयां खुर्द की आम जनता के प्रति राजनीतिक द्वेषता और वैमनस्य का भाव रखने लगे हैं। प्रतिशोध की भावना के चलते वह शासन की महत्वपूर्ण और जनहितैषी योजनाओं की जानकारी जानबूझकर समय पर ग्रामीणों तक नहीं पहुंचने देते।

इसके अतिरिक्त, शासकीय राशि से ग्राम पंचायत के कार्यों के लिए जो लैपटॉप और मोबाइल क्रय किया गया था, उसका उपयोग आम जनता के कार्यों जैसे कि समग्र आईडी सुधार या के-वाईसी (KYC) के लिए नहीं किया जाता। पंचायत के सचिव श्री लक्ष्मीकांत शर्मा को कंप्यूटर का व्यावहारिक ज्ञान न होने का अनुचित लाभ उठाते हुए, रोजगार सहायक आईडी और पासवर्ड छुपाने का बहाना बनाते हैं और विकास कार्यों को पूरी तरह ठप करके रखते हैं, जिससे पूरी पंचायत की जनता मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रही है।

मनरेगा मजदूरी में अपनों को फायदा: सगे-संबंधियों के खातों में बंदरबांट 
भ्रष्टाचार की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। शिकायत पत्र के पांचवें बिंदु में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत किए जाने वाले भुगतानों में भी भारी धांधली की बात कही गई है। रोजगार सहायक द्वारा मनरेगा योजना के अंतर्गत वास्तविक मजदूरों से काम कराने के बजाय, अपने चहेतों और सगे-संबंधियों को बिना कार्य किए मस्टरोल में दर्ज कर उनके खातों में शासकीय मजदूरी की राशि सीधे हस्तांतरित कर दी जाती है।

बाद में उन रिश्तेदारों से वह नकद राशि वापस प्राप्त कर स्वयं हड़प लेते हैं। ठीक इसी प्रकार का खेल प्रधानमंत्री आवास योजना में भी खेला गया है, जहां बिना किसी भौतिक निर्माण के वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इन तमाम गंभीर और साक्ष्य-आधारित आरोपों को देखते हुए उपसरपंच ने दिनांक 04.06.2025 को रीवा जिला मुख्यालय पहुंचकर सक्षम अधिकारियों के समक्ष यह मामला दर्ज कराया है, ताकि इस भ्रष्ट तंत्र पर कड़ा कानूनी हंटर चलाया जा सके।

Related Topics

Latest News