अधिवक्ता परिषद चुनाव: रीवा से भोपाल और जबलपुर तक सुमिता सिंह की लहर, 5 आरक्षित सीटों के लिए विंध्य की एकमात्र महिला उम्मीदवार ने ठोकी ताल!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद (State Bar Council) के वर्ष 2026 के निर्वाचन को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार का चुनाव बेहद खास है क्योंकि प्रदेश स्तर पर महिलाओं के लिए 5 सीटें आरक्षित की गई हैं। इस चुनावी समर में रीवा जिले से एडवोकेट सुमिता सिंह गहरवार ने अपना नामांकन दाखिल कर हलचल मचा दी है। खास बात यह है कि रीवा जिले से वह एकमात्र महिला उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरी हैं, जो उन्हें विंध्य क्षेत्र की महिला अधिवक्ताओं का स्वाभाविक प्रतिनिधि बनाता है।

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रीवा जिले का संख्या बल और सुमिता सिंह की दावेदारी 

रीवा जिला अधिवक्ता संघ प्रदेश के सबसे बड़े संघों में से एक है। यहाँ 5000 से अधिक पंजीकृत अधिवक्ता हैं। सांख्यिकीय दृष्टि से देखा जाए तो मध्य प्रदेश में सबसे अधिक महिला अधिवक्ता रीवा जिले में ही सक्रिय हैं। ऐसे में सुमिता सिंह गहरवार की दावेदारी न केवल मजबूत मानी जा रही है, बल्कि इसे जिले की 'नारी शक्ति' के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। रीवा जिले से कई अन्य अधिवक्ता भी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन महिला प्रत्याशी के रूप में सुमिता सिंह का नाम सबसे अलग और प्रमुख होकर उभरा है।

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विंध्य और प्रदेश भर से मिल रहा भारी समर्थन 

सुमिता सिंह गहरवार के नामांकन के बाद उन्हें अधिवक्ताओं का व्यापक समर्थन मिलना शुरू हो गया है। उनके पक्ष में रीवा सहित प्रदेश के अन्य जिलों के बड़े नामों ने अपनी शुभकामनाएं और समर्थन दिया है:

  • रीवा से: एडवोकेट राजीव सिंह परिहार (शेरा सिंह), सुरेश विश्वकर्मा, संतोष कुशवाहा, तृषा कुशवाहा, साक्षी सिंह बघेल, संभव मिश्रा, गिरीश पटेल, बृजेन्द्र सिंह परिहार, नरेंद्र सिंह और रोहित यादव।

  • सिरमौर व क्षेत्रीय: एडवोकेट दिग्विजय सिंह और नीरज सिंह।

  • भोपाल से: एडवोकेट संतोष वर्मा और अरुण सिंह।

  • शहडोल संभाग: ब्यौहारी से अखिलेश सिंह और शहडोल से लवकुश सिंह।

  • जबलपुर से: रंगदेव सिंह, सचिन तिवारी और संजीव सिंह।

सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर उनकी जीत के लिए हुंकार भरी है।

चुनाव का महत्व: क्यों खास है यह निर्वाचन? 

राज्य अधिवक्ता परिषद प्रदेश के अधिवक्ताओं की सर्वोच्च संस्था है। इसमें महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान महिला वकीलों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। सुमिता सिंह गहरवार की सक्रियता और वरिष्ठों का मार्गदर्शन उन्हें इस पद के लिए एक सशक्त दावेदार बनाता है।

इतिहास रचने की दहलीज पर रीवा 

रीवा की धरती से इकलौती महिला प्रत्याशी के रूप में सुमिता सिंह गहरवार का चुनाव लड़ना इस बार के निर्वाचन को ऐतिहासिक बना रहा है। यदि रीवा की महिला और पुरुष अधिवक्ता एकजुट होकर मतदान करते हैं, तो राज्य परिषद में रीवा का प्रतिनिधित्व और अधिक मजबूत होगा। फिलहाल, पूरे प्रदेश की निगाहें इस चुनावी मुकाबले पर टिकी हैं।

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