रीवा में रील वाले 'डॉन' का निकला दिवाला! पुलिस ने सरेराह जुलूस निकाल कर तोड़ा गैंगस्टर का गुरूर : अब हथकड़ी में गिड़गिड़ा रहा रीवा का 'विकास दुबे'

 
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रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: ₹12,000 के इनामी बदमाश विकास दुबे का निकाला जुलूस। सोशल मीडिया पर रील बनाने वाले अपराधियों को पुलिस की सख्त चेतावनी।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) अक्सर देखा गया है कि समाज में कुछ कुख्यात चेहरों के पीछे एक खास तरह का 'जुनून' और 'गरम खून' जिम्मेदार माना जाता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, कुछ अपराधी अपनी हिंसक प्रवृत्तियों को मासूमियत के पीछे छुपाकर रखते हैं। यह एक खतरनाक संयोग है जहाँ अपराधी का दिमाग शांत दिखता है लेकिन इरादे खूंखार होते हैं। रीवा में हालिया मामला इसी तरह की 'गैंगस्टर मानसिकता' को चुनौती देने वाला रहा है।

रीवा का 'विकास दुबे': रील वाला गैंगस्टर अब सलाखों के पीछे 
उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी के नाम का सहारा लेकर अपनी दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे स्थानीय बदमाश विकास दुबे को रीवा पुलिस ने धर दबोचा। हत्या के प्रयास जैसे कई संगीन मामलों में फरार इस ₹12,000 के इनामी बदमाश का पुलिस ने सरेराह जुलूस निकाला। यह जुलूस केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उस दहशत के अंत का प्रतीक था जो वह शहर में फैला रहा था।

सोशल मीडिया का मायाजाल और युवाओं का भटकाव 
आरोपी विकास दुबे सोशल मीडिया पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करता था। लग्जरी गाड़ियों का काफिला, हवाई फायरिंग और रील में खुद को 'डॉन' की तरह पेश करना उसका हथियार था। इसका बुरा असर शहर के युवाओं पर पड़ रहा था, जो रील की चमक-धमक को असली जिंदगी समझकर अपराध की ओर आकर्षित हो रहे थे। पुलिस ने साफ़ किया कि सोशल मीडिया की यह 'फर्जी ताकत' कानून के सामने मिट्टी के समान है।

पुलिस का कड़ा संदेश: गुंडागर्दी का अंत सिर्फ जेल 
रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान और उनकी टीम ने इस गिरफ्तारी के जरिए समाज को एक स्पष्ट संदेश दिया है। सीएसपी राजीव पाठक के नेतृत्व में पुलिस ने अपराधी के हाथों में हथकड़ी पहनाकर उसे पैदल घुमाया, जिससे उसके गैंगस्टर बनने के सारे 'हौसले' पस्त हो गए। पुलिस का कहना है कि जो युवा इन अपराधियों को अपना आदर्श मानते हैं, उन्हें यह देख लेना चाहिए कि कानून की बेड़ियों में जकड़े जाने के बाद सारा रसूख खत्म हो जाता है।

अपराध की चमक का फीका सच 
अपराध की दुनिया बाहर से कितनी भी आकर्षक क्यों न लगे, उसका अंत हमेशा अंधकारमय होता है। रीवा पुलिस की यह कार्रवाई उन युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो सोशल मीडिया के दिखावे में आकर गलत रास्ता चुनते हैं। कानून की लाठी जब पड़ती है, तो न तो कोई 'गैंगस्टर' काम आता है और न ही उसकी 'रैली'।

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