विंध्य में नशा तस्करों के उड़े होश: 'खाकी' के जाल में फंसे अंतराज्यीय गिरोह के दो गुर्गे, ट्रक जब्त कर पुलिस ने काटा बवाल : मक्के के नीचे से निकला करोड़ों का काला गांजा
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के विंध्य संभाग के रीवा जिले से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। रीवा की मनगवां थाना पुलिस ने नशा माफियाओं के खिलाफ एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। शुक्रवार के दिन पुलिस ने एक संदिग्ध ट्रक को रोककर जब उसकी सघन तलाशी ली, तो उसमें से भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ यानी गांजा बरामद हुआ। नशा तस्करों ने इस पूरी खेप को राज्य की सीमाओं से पार कराने के लिए बेहद शातिर और अचूक तरीका अपनाया था, लेकिन कानून के लंबे हाथों से वे बच नहीं पाए।

तस्करों ने स्थानीय प्रशासन और हाईवे पर तैनात चेकिंग टीमों को गुमराह करने के लिए पूरे ट्रक में मक्के (Corn) और गीले नारियल की बोरियां ऊपर तक लोड कर रखी थीं। पहली नजर में देखने वाले किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को यही लगता कि इस वाहन में केवल किराना या कृषि उपज का वैध सामान ले जाया जा रहा है। परंतु, जब पुलिस ने इन बोरियों को हटाकर गहराई से पड़ताल की, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं।
मुखबिर का सटीक इनपुट और मनगवां थाना प्रभारी पुष्पेंद्र मिश्रा की घेराबंदी
रीवा में पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में नशे के कारोबार के समूल विनाश के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में मनगवां थाना प्रभारी पुष्पेंद्र मिश्रा को शुक्रवार की सुबह एक अत्यंत गोपनीय और पुख्ता मुखबिर सूचना (Secret Informer Input) प्राप्त हुई थी। सूचना में बताया गया था कि एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का ट्रक भारी मात्रा में नशीले पदार्थ लेकर मनगवां राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाला है।

सूचना की गंभीरता को समझते हुए थाना प्रभारी पुष्पेंद्र मिश्रा ने बिना किसी देरी के अपनी एक विशेष जांबाज टीम का गठन किया और हाईवे पर रणनीतिक रूप से नाकाबंदी (Gherabandi) कर दी। जैसे ही मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए और नंबर का ट्रक मनगवां थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता दिखाई दिया, सतर्क पुलिस बल ने उसे चारों तरफ से घेरकर रोक लिया। पुलिस की अचानक हुई इस घेराबंदी को देखकर ट्रक के चालक और उसके साथ बैठे क्लीनर ने भागने की कोशिश भी की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया।
तस्करों का शातिर प्लान: 120 बोरियों में भरा था अवैध मादक पदार्थ
जब पुलिस टीम ने जब्त किए गए ट्रक की सघन तलाशी शुरू की, तो तस्करों की चालाकी की परतें एक-एक कर खुलने लगीं। ट्रक के ऊपरी हिस्से में पूरी तरह से मक्के और नारियल की बोरियां व्यवस्थित ढंग से जमाई गई थीं ताकि किसी को भी किसी प्रकार का संदेह न हो।
लेकिन जब पुलिस ने उन व्यापारिक बोरियों को नीचे उतारा, तो उनके नीचे छिपाकर रखी गई कुल 120 अन्य बोरियां बरामद हुईं। इन सभी 120 बोरियों को जब खोलकर देखा गया, तो उनके भीतर उच्च गुणवत्ता वाला अवैध हरा गांजा ठसाठस भरा हुआ था। तस्करों का यह प्लान इतना सॉलिड था कि यदि पुलिस के पास सटीक इनपुट न होता, तो सामान्य चेकिंग के दौरान इस भारी खेप को पकड़ पाना लगभग नामुमकिन था।
नशीले पदार्थों की जब्ती और गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े कानूनी पहलू
मनगवां पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल उस पूरे मालवाहक ट्रक और उसमें लदे मक्के, नारियल समेत गांजे की सभी 120 बोरियों को अपनी कस्टडी में ले लिया। इसके साथ ही मौके से गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्ध आरोपियों को हथकड़ी लगाकर थाने लाया गया है।

थाना प्रभारी पुष्पेंद्र मिश्रा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बरामद किए गए अवैध गांजे का कुल वजन और उसकी सटीक बाजार कीमत अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की जा सकती है। वर्तमान में पुलिस थाने के प्रांगण में वजन तोलने वाली मशीन मंगाकर गांजे की तौल (Weighing Process) करवाई जा रही है। इसके साथ ही जब्तीनामा तैयार करने जैसी अन्य तमाम आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं भी पूरी की जा रही हैं। जैसे ही कागजी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी, वैसे ही वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से इस पूरे माल की कुल कीमत और सटीक वजन की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।
विंध्य क्षेत्र में फैलता जा रहा है अवैध नशा कारोबार और पुलिस की चुनौतियां
रीवा और उसके आसपास का विंध्य क्षेत्र पिछले कुछ समय से नशा तस्करों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट रूट (Transit Route) बनता जा रहा है। उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से आने वाली नशे की बड़ी खेपें अक्सर इसी मार्ग से होकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अन्य बड़े शहरों तक सप्लाई की जाती हैं।
इस अवैध कारोबार के कारण स्थानीय युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है, जो कि समाज के लिए एक अत्यंत चिंता का विषय है। मनगवां पुलिस की इस बड़ी सफलता से निश्चित रूप से नशा माफियाओं की रीढ़ की हड्डी टूटेगी। हालांकि, पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे नेक्सस (Nexus) के मास्टरमाइंड तक पहुंचना है, जो पर्दे के पीछे रहकर इन गरीब ड्राइवरों और क्लीनरों को पैसों का लालच देकर इस दलदल में धकेलता है।
एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत आगामी वैधानिक एवं अदालती प्रक्रिया
पुलिस ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक्स ड्रग्ज एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। इस कड़े कानून के तहत पकड़े जाने पर आसानी से जमानत नहीं मिलती है और आरोपियों को कई वर्षों की कठोर कारावास की सजा का प्रावधान है।

वर्तमान में मनगवां थाना पुलिस गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से रिमांड के दौरान बेहद कड़ाई से पूछताछ कर रही है। पुलिस मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर अपनी जांच केंद्रित कर रही है:
सप्लाई का स्रोत (Source of Supply): गांजे की यह इतनी बड़ी और विशाल खेप किस राज्य या शहर से लोड की गई थी?
डिलीवरी का ठिकाना (Destination): इस माल को रीवा के स्थानीय बाजार में खपाया जाना था या इसे उत्तर प्रदेश की सीमा में डिलीवर किया जाना था?
सिंडिकेट के अन्य सदस्य (Network Partners): इस पूरे काले कारोबार की फंडिंग कौन कर रहा है और रीवा जिले के भीतर उनके कौन-कौन से स्थानीय मददगार या डीलर सक्रिय हैं?
पुलिस को उम्मीद है कि आगामी 24 से 48 घंटों में आरोपियों के बयानों के आधार पर कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और रीवा के कई अन्य बड़े नशा सौदागरों के चेहरे से भी नकाब उतर सकता है।