एक तीर से दो शिकार: फर्जीवाड़े के आरोपी सुदामा गुप्ता के स्कूल में जली तीसरी आंख, रीवा शिक्षा विभाग में मंचा हड़कंप, आखिर 'साहब' 2 घंटे तक स्कूल में क्या छुपा रहे थे?

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिला मुख्यालय स्थित शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मार्तण्ड क्रमांक-2 में नीट (NEET) परीक्षा संपन्न होने के ठीक बाद लगी आग की घटना अब महज एक 'हादसा' नहीं नजर आ रही है। इस अग्निकांड ने प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के गलियारों में एक बड़ा सियासी और खोजी भूचाल ला दिया है। आम जनता से लेकर विभाग के भीतर तक अब यह चर्चा सरेआम होने लगी है कि इस आग के पीछे कोई बड़ा राज छिपाने की कोशिश की गई है। जनहित में अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

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इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह आग ठीक उस वक्त लगी जब देश की सबसे संवेदनशील परीक्षाओं में से एक 'नीट' का केंद्र यहाँ बनाया गया था। परीक्षा के तुरंत बाद जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी और घटना को दबाने के प्रयासों ने इस पूरे मामले को गहरे संदेह के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

सीसीटीवी का डीवीआर (DVR) स्वाहा: क्या नीट परीक्षा के सबूत मिटाने की रची गई सोची-समझी साजिश?
इस पूरी घटना का सबसे संदेहास्पद और गंभीर मोड़ सीसीटीवी कैमरों के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) का जलकर खाक होना है। हम सभी जानते हैं कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा की पूरी निगरानी बेहद सख्त तरीके से सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही थी। ऐसे में परीक्षा खत्म होते ही अचानक उस कमरे में आग लग जाना जहाँ सीसीटीवी का डीवीआर और परीक्षा से जुड़े अन्य साक्ष्य रखे थे, कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रहा है।

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विभागीय सूत्रों और जानकारों का सीधा सवाल है कि क्या यह आग सिर्फ एक शॉर्ट सर्किट थी या फिर नीट परीक्षा से जुड़े किसी बड़े खेल, साक्ष्य या रिकॉर्ड में हेराफेरी को छिपाने के लिए सीसीटीवी सिस्टम को जानबूझकर निशाना बनाया गया था? डीवीआर का इस तरह जल जाना यह साफ संकेत दे रहा है कि कैमरे में कुछ ऐसा रिकॉर्ड हो गया था जिसे बाहर आने से रोकना किसी के लिए बेहद जरूरी था। क्या दस्तावेज़ जानबूझकर जलवाए गए हैं या मामले को रफा-दफा करने की यह कोई सोची-समझी प्रशासनिक साजिश है? इसकी गहन पड़ताल होनी अभी बाकी है।

सवालों के घेरे में दागी प्राचार्य: फर्जीवाड़े में निलंबित सुदामा लाल गुप्ता पर क्यों उठ रही हैं उंगलियां?
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में विद्यालय के प्राचार्य सुदामा लाल गुप्ता हैं, जिन्हें इस बेहद संवेदनशील नीट परीक्षा का पूरा दायित्व और केंद्र की कमान सौंपी गई थी। सुदामा लाल गुप्ता का प्रशासनिक इतिहास विवादों से भरा रहा है। यह वही सुदामा लाल गुप्ता हैं जो इससे पहले रीवा के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के पद पर तैनात थे और अनुकंपा नियुक्ति के एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े और घोटाले में दोषी पाए जाने के बाद निलंबित किए गए थे।

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हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े फर्जीवाड़े में सस्पेंड होने के बाद भी, कथित तौर पर 'कमिश्नर महोदय की विशेष कृपा' के चलते उन्हें बहाल किया गया और रीवा शहर के सबसे प्रतिष्ठित और उत्कृष्ट विद्यालय मार्तण्ड क्रमांक-2 में प्राचार्य के पद पर उपकृत कर दिया गया। एक दागी और पूर्व में निलंबित अधिकारी को नीट जैसी परीक्षा का सर्वेसर्वा बनाना ही प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाता है। अब जब उनके कार्यकाल में परीक्षा के तुरंत बाद महत्वपूर्ण सबूत जल गए हैं, तो उंगलियों का उनकी तरफ उठना स्वाभाविक है।

लापरवाही या साजिश: घटना के समय गायब चौकीदार, पानी के निशान नहीं और पुलिस को 2 घंटे बाद सूचना क्यों?
घटना के दिन के घटनाक्रम पर नजर डालें तो लापरवाही और साजिश की परतें साफ दिखाई देती हैं। सुबह करीब 7:30 बजे जब यह आग लगी, तब स्कूल की सुरक्षा के लिए तैनात चौकीदार अपनी ड्यूटी से गायब था। आग लगने के बाद भी इसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों या फायर ब्रिगेड को क्यों नहीं दी गई, इसका कोई जवाब नहीं है।

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  • फायर ब्रिगेड को न बुलाना: जब स्कूल जैसी बड़ी सरकारी इमारत में आग लगी थी, तो तुरंत दमकल विभाग को फोन क्यों नहीं किया गया?
  • पानी के झूठे दावे: चौकीदार द्वारा बाद में यह अजीबोगरीब दावा किया गया कि उसने खुद पानी डालकर आग बुझाई। लेकिन मौके पर पहुंचे विभागीय अधिकारियों के बीच इस बात की कानाफूसी चल रही है कि घटनास्थल के फर्श या दीवारों पर पानी का एक भी स्पष्ट निशान या नमी नहीं मिली। तो फिर आग बुझी कैसे?

पुलिस को दो घंटे बाद सूचना: सबसे बड़ा संदेह तब पैदा होता है जब खुद प्राचार्य सुदामा लाल गुप्ता मौके पर पहुंच गए थे। उनके आने के बाद भी पुलिस को तुरंत सूचना देने के बजाय करीब दो घंटे तक मामले को दबाए रखा गया। इस दो घंटे के 'गोल्डन पीरियड' में स्कूल के भीतर क्या खेल हुआ, कौन से कागजात हटाए गए या बदले गए, यह एक बड़ा अनुत्तरित प्रश्न है।

44 लाख के बजट का खेल: क्या पुराने कबाड़ को जलाकर नया भ्रष्टाचार छिपाने की तैयार हुई पटकथा?

  • स्कूल का बजट ठिकाने लगाने के लिए आग लगाई गई क्या और इसके पीछे क्या सच है?
  • इस रहस्यमयी आग के पीछे सिर्फ नीट परीक्षा का ही एंगल नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारी वित्तीय भ्रष्टाचार की बू भी आ रही है। शिक्षा विभाग के ही विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस चालू वित्तीय वर्ष में मार्तण्ड क्रमांक-2 विद्यालय को शासन की ओर से लगभग 44 लाख रुपये का एक भारी-भरकम बजट आवंटित हुआ था।

इस बजट के आने के बाद से ही स्कूल में साजो-सामान की खरीद-फरोख्त को लेकर तैयारियां चल रही थीं। अब विभागीय गलियारों में यह चर्चा बहुत तेजी से फैल रही है कि कहीं इस 44 लाख रुपये के बजट को ठिकाने लगाने और कागजों पर खर्च दिखाने के लिए तो यह आग नहीं लगवाई गई? आशंका जताई जा रही है कि स्कूल के पुराने फर्नीचर, बंद पड़े टीवी और अन्य अनुपयोगी कबाड़ सामग्री को आग के हवाले कर दिया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि सब कुछ जलकर खाक हो गया है और अब नए बजट से नई खरीदी का रास्ता साफ हो सके। पुराना रिकॉर्ड जलने से पुराना वित्तीय ऑडिट भी ठप हो जाएगा, जिससे 'एक तीर से दो शिकार' करने की योजना साफ नजर आती है।

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जनता अब साफ तौर पर मान रही है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, न्यायिक या किसी स्वतंत्र एजेंसी से गहन जांच कराई जाए, तो आग लगने के असली और डरावने कारणों के साथ-साथ इस पूरे खेल के पीछे बैठे सफेदपोशों और जिम्मेदार अधिकारियों का असली चेहरा भी बेनकाब हो जाएगा।

भोपाल पुलिस को देखते ही चपरासी हुआ बेहोश                                                       
आगजनी की घटना मे मुख्य रूप से डीवीआर के जलने से तरह-तरह की चर्चाये हो रही है क्योंकि नीट परीक्षा के दौरान सभी कमरों के CCTV फुटेज डाटा DVR में ही होते हैं, सोशल मीडिया में खबर चलने के बाद रीवा से दिल्ली तक आग की खबर आग की तरफ फैल गई, और विभाग मे हलचल मच गई, विश्वविद्यालय की पुलिस एवं बम स्कॉड टीम ने मौका मुआयना किया, वही नीट परीक्षा के साक्ष्य नष्ट होते देख राजधानी भोपाल से पुलिस एवं अधिकारियों की एक विशेष टीम शाम 7:00 बजे मार्तण्ड क्रमांक 2 पहुंची , जैसे ही उन्होंने विद्यालय के चपरासी अमित साकेत से पूछताछ प्रारंभ की वह वहीं पर बेहोश हो गया, आनंन फानन में उसे संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां अब स्वस्थ बताया जा रहा है, बहरहाल नीट परीक्षा के बाद प्राचार्य के कक्ष में आग लग जाना, सीसीटीवी डीवीआर सहित अन्य उपकरणों का जलना तरह-तरह की शकाओं को जन्म देता है, जिसके पीछे विद्यालय के वर्तमान प्राचार्य सुदामालाल गुप्ता की पुरानी कहानी जुड़ी हुई है, उन्होंने डीईओ पद पर रहते हुए 06 ऐसी फर्जी अनुकंपा नियुक्ति की थी जिनके माता-पिता  शासकीय सेवक सेवा में नहीं थे उक्त मामले में वह निलंबित भी हो चुके हैं, इसके बाद कमिश्नर रीवा द्वारा उन्हें बहाल कर मार्तण्ड क्रमांक 2 का प्राचार्य बनाया गया है.

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