'उड़ता रीवा': नेशनल हाईवे पर बिखर गई पुलिस के दावों की पोल! सरेआम मिली नशीली सिरप तो भड़की कांग्रेस, पूछा- काले धंधे का असली आका कौन?

 
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रीवा। विंध्य क्षेत्र की रीवा पुलिस और प्रशासनिक अमला भले ही कागजों पर 'नशा मुक्ति अभियान' के बड़े-बड़े दावे करता रहे, लेकिन जमीनी हकीकत समय-समय पर खुद सड़क पर बिखर कर अपनी कहानी बयां कर देती है। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला रीवा-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) से सामने आया है, जहां मनगवां थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अगडल गांव के पास हुए एक सड़क हादसे ने जिले में कफ सिरप की अवैध तस्करी के फलते-फूलते काले साम्राज्य की पोल खोलकर रख दी है। हाईवे के बीचों-बीच भारी मात्रा में संदिग्ध और नशीली कफ सिरप की शीशियां बिखरने की इस घटना ने अब एक तरफ जहां प्रशासनिक चौकसी पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ रीवा के सियासी पारे को भी पूरी तरह से गरमा दिया है।

दो बाइकों पर लोड थीं कफ सिरप की पेटियां, भीड़ जुटते ही तस्कर फरार
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना उस वक्त हुई जब दो तेज रफ्तार मोटरसाइकिलों पर सवार चार संदिग्ध युवक कफ सिरप से भरी भारी-भरकम पेटियां लादकर प्रयागराज मार्ग की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान अगडल गांव के पास अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण एक मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर नेशनल हाईवे की सड़क पर ही पलट गई। बाइक फिसलते ही उस पर बंधी कफ सिरप की पेटियां फट गईं और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में संदिग्ध सिरप की शीशियां पूरे हाईवे पर बिखर गईं।

हादसे के तुरंत बाद घायल और घबराए हुए तस्कर युवकों ने बदहवासी में बिखरी हुई शीशियों को दोबारा समेटने और मौके से साक्ष्य मिटाने का पुरजोर प्रयास किया। लेकिन दिनदहाड़े हाईवे पर हुए इस हंगामे को देखकर आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों की भारी भीड़ मौके पर जुटने लगी। खुद को जनता के बीच घिरता देख और पुलिस कार्रवाई के डर से चारों नशा तस्कर अपनी गाड़ियों और माल को वहीं छोड़कर सरेराह रफूचक्कर हो गए। घटना की सूचना मिलते ही मनगवां थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और सड़क पर बिखरी अवैध सिरप की शीशियों को जब्त कर थाने ले आए।

नशे के मुद्दे पर गरमाई सियासत: कांग्रेस ने सरकार और कानून व्यवस्था को घेरा
जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैली, रीवा में नशा माफिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह से हमलावर हो गया। गुरुवार को कांग्रेस के आला नेताओं ने इस घटना को मुख्य हथियार बनाते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस का आरोप है कि रीवा जिला पिछले कुछ वर्षों में नशीली सिरप, कोरेक्स और अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थों की तस्करी का सबसे बड़ा ट्रांजिट हब बन चुका है, लेकिन सत्ता के संरक्षण और प्रशासनिक नपुंसकता के कारण इन अपराधियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

संगठित सिंडिकेट के खुलासे की मांग: नेशनल कॉर्डिनेटर कुंवर सिंह का सीधा हमला
इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक (National Coordinator) कुंवर सिंह ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा:

"रीवा-प्रयागराज नेशनल हाईवे पर इतनी बड़ी तादाद में संदिग्ध कफ सिरप का सरेराह मिलना इस बात का सीधा और पुख्ता सबूत है कि जिले के भीतर नशा माफिया का एक बहुत बड़ा, ताकतवर और संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। पुलिस केवल छोटे-मोटे पेडलर्स को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेती है, जबकि इस काले धंधे के असली आका और मगरमच्छ वातानुकूलित कमरों में बैठकर इस पूरे अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं।"

कुंवर सिंह ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की लीपापोती करने के बजाय एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कमेटी बनाई जाए जो कफ सिरप की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से लेकर उसके अंतिम सप्लायर तक के पूरे रूट का पर्दाफाश करे और दोषियों को सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेजे।

रीवा पुलिस का दावा: हर पहलू पर हो रही है गहन जांच, तस्करों पर कसा जाएगा शिकंजा
सियासी बवंडर और कांग्रेस के तीखे हमलों के बीच रीवा पुलिस विभाग भी पूरी तरह से मुस्तैद और डिफेंसिव मोड में आ गया है। इस पूरे मामले पर रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) गुरुकरण सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिले के भीतर नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री और तस्करी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों और विशेषकर उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे मनगवां, चाकघाट और सोहागी थानों को नाकेबंदी कर संदिग्ध वाहनों की चौबीसों घंटे सघन चेकिंग करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

मनगवां पुलिस के अनुसार, बरामद की गई कफ सिरप की शीशियों के बैच नंबर और उस पर छपे केमिकल कंपोजिशन की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह प्रतिबंधित कोडीन फॉस्फेट युक्त नशीली सिरप की श्रेणी में आती है या नहीं। इसके साथ ही पुलिस की सायबर सेल और मुखबिर तंत्र उन चार फरार बाइक सवार युवकों के हुलियें और गाड़ी के नंबरों के आधार पर उनकी धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दे रहे हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी होते ही यह साफ हो जाएगा कि यह खेप कहां से लाई जा रही थी और रीवा या उसके आसपास के किन क्षेत्रों में इसकी अवैध सप्लाई होनी थी।

रीवा-प्रयागराज हाईवे की इस घटना ने एक बार फिर विंध्य की धरा पर युवाओं की रगों में घोले जा रहे नशे के धीमे जहर की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। जब तक रीवा पुलिस और श्रम विभाग जैसी एजेंसियां सड़कों पर केवल दिखावटी कार्रवाई करेंगी और मुख्य सरगनाओं पर हाथ डालने से कतराएंगी, तब तक ऐसे हादसे और ऐसी बरामदगी आम बात बनी रहेगी। राजनीति से इतर, रीवा की आम जनता और युवा पीढ़ी के भविष्य को बचाने के लिए अब प्रशासन को इस 'कफ सिरप सिंडिकेट' के खिलाफ आर-पार की जंग लड़नी होगी, वरना उड़ता पंजाब की तर्ज पर 'बर्बाद होता रीवा' देखने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।

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