"विंध्य में सिक्का अघोषित पाबंदी: क्या सरकारी खजाने का अपमान कर रहे हैं बैंक और दुकानदार? Rewa News Media की ग्राउंड रिपोर्ट!"
रीवा समेत विंध्य के 9 जिलों में 5 साल से सिक्के नहीं ले रहे दुकानदार और बैंक, Rewa News Media की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट।
ऋतुराज द्विवेदी, विंध्य क्षेत्र/ मध्य प्रदेश: क्या आप जानते हैं कि भारत के एक बड़े हिस्से में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के नियम नहीं, बल्कि चंद स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों की मर्जी चलती है? जी हां, हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की, जहाँ के 9 जिलों—रीवा, सीधी, सतना, शहडोल, सिंगरौली, उमरिया, मऊगंज, मैहर और अनूपपुर—में पिछले 5 वर्षों से भारतीय सिक्के आर्थिक व्यवहार से लगभग गायब हो चुके हैं। यहाँ 'सिक्का' देना मतलब विवाद को दावत देना है।
ग्राउंड जीरो से Rewa News Media का स्टिंग ऑपरेशन
जनता की इस बड़ी समस्या को देखते हुए हमारी टीम ने क्षेत्र के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर जाकर सच्चाई जांची। परिणाम चौंकाने वाले थे:

पेट्रोल पंप: विश्वविद्यालय मार्ग स्थित पेट्रोल पंप पर ₹310 के भुगतान में जब ₹10 का सिक्का दिया गया, तो कर्मचारी ने उसे हाथ में लेने तक से मना कर दिया। तर्क मिला— "सालों से यही चल रहा है, हम नहीं लेंगे।"

डेयरी और किराना: यहाँ तक कि दूध-दही जैसी रोजमर्रा की चीजों के लिए भी सिक्के स्वीकार नहीं किए गए। दुकानदारों का कहना है कि "बड़े व्यापारी नहीं लेते, तो हम लेकर क्या करेंगे?"


मेडिकल स्टोर: दवाओं के भुगतान में भी सिक्कों को 'अछूत' माना जा रहा है। एक संचालक ने तो यहाँ तक कह दिया कि वे खुद सिक्के चलाने के लिए शहर से बाहर जाते हैं।

डिलीवरी बॉय और ऑटो चालक: ऑनलाइन आर्डर हो या ऑटो का सफर, सिक्के देखते ही लोग हाथ खड़े कर देते हैं। इससे आम जनता, खासकर गांव से आने वाले मजदूरों को भारी अपमान और परेशानी झेलनी पड़ती है।
धार्मिक परंपराओं पर भी पड़ा असर
विंध्य की संस्कृति में 'शगुन' के रूप में ₹1 के सिक्के का बड़ा महत्व रहा है। लेकिन पंडित राजेश शास्त्री बताते हैं कि अब लोग मजबूरन नोट देने लगे हैं, जिससे पुरानी परंपराएं खत्म हो रही हैं। दान पेटी में आए सिक्कों को बैंक जमा नहीं करते, जिससे मंदिरों के प्रबंधन में भी दिक्कत आ रही है।

बैंकों की लापरवाही: मुख्य समस्या की जड़
व्यापारी संघ के अध्यक्ष नरेश काली और कई कियोस्क संचालकों का मानना है कि इस समस्या की असली जड़ बैंक हैं। जब कोई व्यापारी बड़ी मात्रा में सिक्के लेकर बैंक जाता है, तो वहां स्टाफ उन्हें गिनने में आलस दिखाता है या सीधे मना कर देता है। घंटों लाइन में खड़ा रहने के डर से व्यापारियों ने ग्राहकों से सिक्के लेना ही बंद कर दिया है।

कानूनी पहलू: क्या यह राजद्रोह है?
कानून के जानकारों और अधिवक्ता बीके माला के अनुसार, RBI द्वारा जारी वैध मुद्रा को लेने से मना करना एक गंभीर अपराध है।
- IPC की धारा 124-A: इसके तहत भारतीय मुद्रा का अपमान राजद्रोह की श्रेणी में आ सकता है।
- भारतीय मुद्रा अधिनियम: सभी बैंक और नागरिक ₹1, 2, 5, 10 और 20 के सिक्के लेने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।
- शिकायत प्रक्रिया: यदि कोई बैंक या दुकानदार सिक्के नहीं लेता, तो आप नजदीकी पुलिस स्टेशन या RBI के टोल-फ्री नंबर 14440 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
प्रशासन का पक्ष
इस गंभीर विषय पर एसडीएम अनुराग तिवारी का कहना है कि सिक्के पूरी तरह वैध हैं। प्रशासन जल्द ही बैंक अधिकारियों के साथ बैठक कर एक ठोस समाधान निकालेगा ताकि आम जनता को इस अघोषित पाबंदी से निजात मिल सके।