'4 साल में क्या झख मारा?' रीवा में 12 घंटे की बारिश से खुला सिंकदर का सच! डिप्टी सीएम बोले- नालों पर कब्जा, तो महापौर ने दागे 2016 के तीखे सवाल!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य अंचल के रीवा शहर में मानसून की महज़ 12 घंटे की अनवरत बारिश ने ही नगर निगम के प्री-मानसून दावों की हवा निकाल दी है। शहर के निचले इलाकों, मुख्य सड़कों और व्यावसायिक क्षेत्रों में पानी भर जाने से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। इस गंभीर नागरिक समस्या के सामने आते ही रीवा की राजनीति में प्रचंड उबाल देखने को मिला।

जल निकासी की लचर व्यवस्था और सड़कों पर जमा पानी को लेकर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और रीवा नगर निगम के महापौर अजय मिश्रा बाबा के बीच सीधा सियासी टकराव छिड़ गया है। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे की नीति, नीयत और प्रशासनिक विफलताओं पर तीखे हमले बोले जा रहे हैं, जिसके चलते बाढ़ और जलभराव का यह संकट अब पूर्णतः राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है।

महापौर अजय मिश्रा बाबा के तीखे सवाल: 2016 बाढ़ सर्वे की फाइल धूल फांक रही, अधूरा मास्टर प्लान जिम्मेदार
शहर में उपजे इस गंभीर जलसंकट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रीवा महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' ने शासन और पूर्व की निर्माण योजनाओं पर सीधा निशाना साधा। महापौर ने स्मरण कराया कि वर्ष 2016 में आई भीषण बाढ़ के बाद एक उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित की गई थी, जिसने शहर के प्राकृतिक जल निकास मार्गों और अति-संवेदनशील क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की थी।

महापौर ने आरोप लगाया कि उस रिपोर्ट के सुझावों पर शासन स्तर से अपेक्षित बजट और बुनियादी कार्य स्वीकृत नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि:
- शहर के जिन नए और पुराने इलाकों में बड़े नालों का निर्माण प्रस्तावित था, वे आज तक अधूरे पड़े हैं।
- रिंग रोड के अवैज्ञानिक निर्माण से प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हुआ है।
- बीहर नदी के रेड ज़ोन में हुए अनियंत्रित पक्के निर्माणों और संकरे पुल-पुलियों ने जल निकासी की क्षमता को घटा दिया है।
- इसी वजह से इस बार उन मोहल्लों में भी कमर तक पानी भर गया, जहाँ पहले कभी जलभराव की स्थिति निर्मित नहीं होती थी।
भाजपा जिलाध्यक्ष का तीखा पलटवार: 4 साल से कांग्रेस के पास नगर निगम, महापौर ने क्या किया?
महापौर द्वारा राज्य सरकार पर लगाए गए आरोपों का भारतीय जनता पार्टी ने पुरजोर खंडन किया है। भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने महापौर अजय मिश्रा बाबा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि रीवा की जनता ने पिछले चार वर्षों से नगर निगम की कमान कांग्रेस पार्टी और अजय मिश्रा बाबा के हाथों में सौंपी है। नगर निगम की मुख्य जिम्मेदारी नालों की समय पर सफाई, जल निकासी का सुचारू प्रबंधन और मानसून से पूर्व की तैयारियां सुनिश्चित करना है।

उन्होंने सवाल उठाया कि चार साल के लंबे कार्यकाल में महापौर ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को सुधारने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए? भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि अपनी प्रशासनिक नाकामियों और सफाई में हुई हीलाहवाली का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना कांग्रेस की पुरानी आदत बन चुका है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का पक्ष: अवैध प्लाटिंग, संकरे नाले और बीहर का बढ़ता जलस्तर मुख्य वजह
शहर के बिगड़ते हालातों पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्थानीय विधायक राजेंद्र शुक्ल ने स्थिति की तकनीकी और व्यावहारिक वजहें जनता के सामने रखीं। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बेलहा, कोष्टा और आसपास के विशाल जलग्रहण क्षेत्रों का पानी स्वाभाविक रूप से अमहिया और फूलमती मंदिर के बड़े नालों के माध्यम से बाहर निकलता है।
उपमुख्यमंत्री ने जलभराव के मुख्य कारणों को रेखांकित करते हुए कहा:
अवैध प्लाटिंग व पक्के निर्माण: बीते वर्षों में नालों के कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर हुई प्लाटिंग और अवैध निर्माणों के कारण नालों की चौड़ाई घट गई, जिससे जल प्रवाह अवरुद्ध हुआ।
- बीहर नदी का उफान: सबसे बड़ा कारण बीहर नदी का जलस्तर अत्यधिक बढ़ना है। जब नदी उफान पर होती है, तो शहर के मुख्य नालों का पानी नदी में डिस्चार्ज नहीं हो पाता और बैक-वॉटर के कारण अंदरूनी बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनती है।
- राहत और मुआवजा: उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर शासन के नियमानुसार पीड़ित परिवारों को उचित राहत राशि तुरंत प्रदान की जाएगी।