NAG PANCHAMI 2020 : कोरोना काल और लाॅक डाउन के बीच कल मनेगी नागपंचमी : ऐसे करें नागदेवता की पूजा


ग्वालियर। श्रावण मास की शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि 25 जुलाई को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र व शिवयोग में नागपंचमी मनाई जाएगी। पंचमी की तिथि 24 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से प्रांरभ होकर 25 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। नागपंचमी के अलावा प्रत्येक माह की पंचमी तिथि के देव नागदेवता ही होते हैं।


ज्योतिषाचार्य सुनील चौपड़ा के अनुसार नागपंचमी का ज्योतिष में काफी महत्व होता है। इस दिन जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प, पितृदोष, सहित अन्य दोष होते है, उनका निवारण भी होता है। नागदेवता की पूजा आराधना कर लोग अपने घर में ही कालसर्प, पितरदोष आदि दोषों के प्रभाव को कम कर सकते हैं। इसके लिए जातक को नागपंचमी के दिन नागदेव के दर्शन करना चाहिए।


साथ ही नागदेवता के निवास स्थल बांबी आदि की सुंगध, पुष्प, चंदन आदि से पूजा आराधना करना चाहिए। साथ ही नागदेवता के सामने अपने समर्पण स्वरूप दूध रखना चाहिए। हालांकि सांप दूध नहीं पीते हैं, लेकिन दूध का रंग सफेद होता है और यह समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसलिए प्राचीनकाल से यह मान्यता है कि नागदेवता के सामने अपना समर्पण करने से वह कभी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।


कोरोना काल में मंदिर के स्थान पर घर में करेंगे पूजा

कोरोना महामारी के चलते इस समय किसी भी देवता अथवा भगवान की मूर्ति को छूना मना है। साथ ही किसी भी मंदिर में नागदेवता पर दूध आदि अर्पित नहीं कर सकते हैं। इसलिए भक्त अपने घरों पर ही नागदेवता की पूजा अर्चना करेंगे। भक्त नागदेवता की तस्वीर अथवा मिट्टी व धातु से बनी प्रतिमा की पूजा करें। नागदेवता को दूध, धान, खील व दूबा अर्पित करें।


सपेरों से कराएं नागदेवता को मुक्त, मिलेगा मनोवांछित फल

नागपंचमी के साथ ही अगर लोग किसी भी दिन सपेरों से नागदेवता को खरीदकर अथवा किसी अन्य उपाय से मुक्ति दिलाकर उन्हें जंगल में सुरक्षित छोड़ते हैं तो ऐसे जातकों को राहु के प्रकोप में कमी आती है। साथ ही अगर किसी की जन्मपत्रिका में राहु का दोष है तो उससे भी मुक्ति मिलती है।


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