खुशखबरी : कोरोना की वैक्सीन को लेकर अमेरिका से अच्छी खबर, 18 से 55 साल के लोगों में दिखा ऐसा असर



कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इसकी वैक्सीन को लेकर कई देशों से अच्छी खबर सामने आ रही हैं। रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन तैयार कर ली है, जिसका सितंबर में बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा और अक्तूबर से टीकाकरण अभियान शुरू होगा। इस बीच अमेरिका से भी अच्छी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी कंपनी फाइजर और जर्मनी की जैव प्रौद्योगिकी कंपनी बायोनटेक द्वारा संयुक्त रूप से विकसित कोविड-19 वैक्सीन ने स्वस्थ व्यस्कों पर बेहतर असर दिखाया है। 


अमेरिकी कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायोनटेक द्वारा विकसित की जा रही है, जो क्लिनिकल ट्रायल के फेज में है। चिकित्सकीय परीक्षण के शुरुआती चरण में वैक्सीन ने 18 से 55 वर्ष तक के स्वस्थ वयस्कों में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ एक मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न की है।


हेल्थ रिसर्च जर्नल 'नेचर' में बुधवार को प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में यह बात कही गई। इसमें अनुसंधानकर्ताओं ने टीके के बारे में बताया है कि बीएनटी162बी1 एक आरएनए टीका है। यह नए कोरोना वायरस द्वारा संक्रामक प्रोटीन बनाने को इस्तेमाल किए जाने वाले एमआरएनए अणु के सहारे व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करता है।


शोधकर्ताओं ने कहा कि इस तरह के टीकों को आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है। यह टीका उन कई आरएनए टीकों में से एक है, जिनका परीक्षण को आगे बढ़ाने के लिए समानांतर अध्ययन किया जा रहा है। इस टीके के शुरुआती परीक्षण में 18 से 55 साल तक की उम्र के 45 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया।


मालूम हो कि भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, चीन समेत कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने के काफी करीब हैं। भारत में दो वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल में बेहतर परिणाम दे रही है। वहीं, ब्रिटेन के रिसर्च पर भारतीय कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट कोविशील्ड नाम से वैक्सीन का उत्पादन करने वाली है। अन्य देशों में भी वैक्सीन के ट्रायल में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।


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