HIGHCOURT : अब नाबालिग से दुष्कर्म करने वालों को नहीं मिलेगी जमानत

जबलपुर। अदालत ने तल्ख टिप्पणी में कहा कि समाज में नाबालिगों से दुष्कर्म की घटनाओं में इजाफा बेहद चिंताजनक है। लिहाजा, आरोपित की जमानत नहीं दी जा सकती। अभियोजन के मुताबिक पीड़िता ने 9 मई 2020 को थाना शहपुरा भिटौनी में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह खेरमाई मंदिर पूजा के लिए जाती थी। इसी दौरान आरोपित गोविंद से जान पहचान हुई थी। 

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इसी बीच आरोपित ने एक दिन रात में उसे खेरमाई मंदिर बुलाया, तब वह आरोपित से मिलने गई। आरोपित ने उसको गन्ने के खेत के पास ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया और धमकी दी कि यह बात किसी को मत बताना, जब बुलाउंगा तब आना नहीं तो बदनाम कर दूंगा। आरोपित द्वारा उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। पीड़िता ने यह बात किसी को नहीं बताई करीब तीन माह तक शरीर की आवश्यक प्रक्रिया सुचारू न होने के कारण 9 मई, 2020 को चेकअप कराने अपनी मम्मी के साथ सरकारी अस्पताल शहपुरा गई। तब डॉक्टर ने गर्भवती होना बताया और मेडिकल अस्पताल जबलपुर रेफर कर दिया। रास्ते में मम्मी की पीड़िता ने सारी बात बताई। 

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फरियादी की उक्त रिपोर्ट के आधार पर थाना शहपुरा ने धारा 376 (2) ग़्,376 (3) ,506 भादवि एवं धारा 5 एल, 6 पाक्सो का प्रकरण दर्ज किया गया था। उक्त आरोपों का अभियोग पत्र तैयार कर अभियुक्त गोविंद गौंड को गिरफ्तार कर न्यायालय इन्द्रा सिंह विशेष न्यायाधीश पाक्सो जबलपुर में पेश किया गया। अभियुक्त ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। प्रभारी उपसंचालक अभियोजन शेख वसीम के निर्देशन में शासन की ओर से अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीमती स्मृतिलता बरकड़े द्वारा विरोध प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखते हुए जमानत का विरोध किया गया।

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अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी स्मृतिलता बरकड़े ने तर्क देते हुए बताया कि अपराध गंभीर प्रकृति का है यदि ऐसे अपराधों में आरोपित को जमानत का लाभ दिया जाता हैं तो समाज में न्याय के विरुद्ध विपरीत संदेश जाएगा। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा व्यक्त किये गये तर्को से सहमत होते हुए व अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपित की जमानत निरस्त कर आरोपित को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। 

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