MP : चार दरिंदे उसे नाेंच रहे थे, वह चीखती हुई मेरे पास आई, मैंने डंडा उठाकर दुष्कर्मियों को ललकारा तो भाग खड़े हुए : श्रीबाई

 

MP : चार दरिंदे उसे नाेंच रहे थे, वह चीखती हुई मेरे पास आई, मैंने डंडा उठाकर दुष्कर्मियों को ललकारा तो भाग खड़े हुए : श्रीबाई

सागर के आबचंद गांव की 50 साल की श्रीबाई धानक ने सितंबर में साहस दिखाते हुए एक गैंगरेप पीड़िता को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाया था। बदमाशों ने उसे बच्चों सहित बंधक बनाकर रखा था। जब श्रीबाई धानक के साहस की कहानी पुलिस को पता चली तो एसपी अतुल सिंह ने उनका नाम सम्मान के लिए भोपाल भेजा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के ऐसे रियल हीरो को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसी जिले में सम्मानित करने जा रहे हैं। एडिशनल एसपी विक्रम सिंह ने बताया कि सोमवार को 1.30 बजे श्रीबाई का सम्मान होगा। 

श्रीबाई की जुबानी... जानिए, क्या हुआ था उस दिन

पेट्रोल दिखाकर बोला- चली जा वर्ना जिंदा जला दूंगा

27 सितंबर की दोपहर... मैं खेत में तिली की फसल काट रही थी। अचानक आवाज सुनी- अम्मा हमें बचा लो। देखा तो एक महिला दो बच्चों को लिए चीखती हुई मेरी तरफ आ रही थी। उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। पीछे चार लोग आ रहे थे। मैंने चिल्लाकर कहा, ' क्यों इसे परेशान कर रहे हो। सुनकर तीन लोग भाग गए। चौथा एक बोतल में पेट्रोल लिए मेरे पास आकर बोला- ये मेरी साली है। यहां से चली जा, वरना तुझे भी जिंदा जला दूंगा।

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मैंने पास में पड़ा एक डंडा उठाया और जोर से अपने बेटे देवराज को आवाज दी। वह दूर काम कर रहा था। देवराज जैसे ही पहुंचा तो मोहन नाम का व्यक्ति पेट्रोल की बोतल वहीं छोड़कर भाग गया। इसके बाद हम लोगों ने गांव के कोटवार प्रहलाद राय को बुलाया। उन्होंने सानौधा पुलिस को सूचना दी। मैंने घर से अपनी साड़ी मंगवाकर उसे शरीर ढंकने के लिए दी। उसके 2 साल व 6 महीने के बच्चे दो दिन से भूखे थे। मैंने देवराज से 100 रुपए का दूध मंगाया और बच्चों को पिलाया। पीड़ित महिला को खाना भी खिलाया कराया। वह रिपोर्ट लिखाने से भी डर रही थी। हमने उसे हिम्मत बंधाई और अगले दिन खुद भी थाने जाकर बयान दर्ज कराए।' (जैसा श्रीबाई पति सलकू धानक ने बताया)

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पीड़िता ने कहा- वे लोग मुझे बेचना चाहते थे

'5 साल पहले मेरी शादी बलेह में हुई थी। मेरे दो बच्चे हैं। पति मजदूरी करते हैं। झांसी से मजदूरी करके उस दिन सुबह करीब 5 बजे मैं सागर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरी थी। जब प्लेटफार्म से बलेह जाने के लिए निकली तो बाहर मुझे एक व्यक्ति मिला। उसने पूछा कहां जाना है। मैंने कहा, बलेह। उसने कहा बस स्टैंड चली जाओ। वहां से बस मिल जाएगी। मैं बस स्टैंड पहुंची तो बस वाले ने बताया, बस 8.30 बजे आएगी।

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वही व्यक्ति पीछे से फिर आ गया। बोला कि मैं गढ़ाकोटा का हूं। वहीं जा रहा हूं। मेरे साथ चलो। बलेह के लिए बस आगे से मिलती है। मैं उसके साथ चली गई। वह मुझे धोखे से आबचंद ले आया। यहां मुझे एक टपरिया में बंधक बनाकर रखा। रात में मेरे साथ गलत काम किया। वे चार लोग थे। मुझे बेचने की फिराक में थे। एक बोतल में पेट्रोल लेकर आए थे। मुझे जिंदा जलाने की धमकी दे रहे थे। पास में ही खेत में काम कर रही अम्मा ने मेरी जान बचाई।

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(जैसा कि पीड़िता ने सानौधा पुलिस को दिए बयानों में कहा था)

गांव पहुंचाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया था आरोपी, सुनसान झोपड़ी में बंधक बनाया

26 सितंबर को झांसी से लौटी पीड़िता को रहली निवासी आरोपी मोहन अहिरवार गढ़ाकोटा से बलेह गांव पहुंचाने की कहकर अपने साथ ले गया था। उसे आबचंद के सुनसान इलाके में बनी झोपड़ी में बंधक बनाकर रखा। मोहन और उसके दो भाई समेत चार लोगों ने उसके साथ हैवानियत की सारी हदें लांघ दी। पूरी रात वह झोपड़ी में रही। बच्चे भूख-प्यास से बिलखते रहे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप का केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है।

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