मध्यप्रदेश के किसानों को सरकार ने दी कुछ हद तक राहत : अब लघु-सीमांत किसानों का भी कर्ज होगा माफ : रुकेगी वसूली

भोपाल। नए कृृषि कानूनों को लेकर किए जा रहे आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश में किसानों को राहत देने के काम जारी है। मंगलवार को शिवराज कैबिनेट ने लघु और सीमांत किसानों के साथ भूमिहीन कृृषि श्रमिकों के उस कर्ज को शून्य (माफ) करने का फैसला किया है, जो गैर लायसेंसी साहूकारों से लिया गया है। इसके लिए मध्य प्रदेश ग्रामीण (सीमांत व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृृषि श्रमिक) ऋण विमुक्ति विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई है।इस अधिनियम के लागू होने पर गैर लाइसेंसी साहूकारों से लिया गया कर्ज और ब्याज गैर कानूनी घोषित हो जाएगा। अर्थात ना तो किसान को यह राशि चुकानी होगी और ना ही इसकी वसूली की जा सकेगी। गौरतलब है कि प्रदेश में एक करोड़ से ज्यादा खातेदार किसानों में से 67 प्रतिशत किसान लघु और सीमांत हैं। सरकार के इस फैसले से लाखों किसानों को लाभ होगा और करोड़ों रुपये का कर्ज माफ होगा। इससे पहले 89 अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासियों का कर्ज माफ करने का अधिनियम विधानसभा से पारित करके लागू किया जा चुका है।

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अनुमति के लिए राष्ट्रपति को भेजेंगे

मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक के मसौदे को कैबिनेट की मंजूूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति को अनुमति के लिए भेजा जाएगा। विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद यह लागू होगा।

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साहूकारों पर हो चुकी है कार्रवाई

सरकार द्वारा ऋण विमुक्ति दिए जाने के बाद छतरपुर के ग्राम फुटवारी में ऋण वसूलने के लिए धमकियां देने पर साहूकार गोविंद सिंह पर कार्रवाई की गई है। सिंह ने कलन बाई को ऋण दिया था। साहूकार की धमकियों से तंग आकर कलन बाई ने कीटनाशक दवा खा ली थी। इसी तरह प्रदेश के बड़वानी जिले के आंवली गांव के किसान दिनेश ने सूदखोर से परेशान होकर गत वर्ष पांच अगस्त को आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में खड़गसिंह व एक महिला के नाम का उल्लेख था, जिसके आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है।

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