REWA : PM स्वनिधि योजना के तहत फिर से नए हितग्राहियों को मिलेगा दस हजार का बिना ब्याज का ऋण : पढ़ ले ये खबर

रीवा। लॉकडाउन की वजह से छोटे व्यवसायों से जुड़े लोगों के सामने उत्पन्न हुई विपरीत परिस्थितियों से उबारने के लिए शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना का टारगेट पूरा करने सरकार का सख्त निर्देश है। इधर नगर निगम के कर्मचारी हितग्राहियों के पास चक्कर काट रहे हैं लेकिन वह अब ऋण के रूप में राशि लेने के लिए अधिक इच्छुक नजर नहीं आ रहे हैं।

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दस हजार रुपए का बिना ब्याज का ऋण देने के लिए नगर निगम अब दस्तावेज तैयार कराने में भी हितग्राही की मदद करा रहा है लेकिन अधिकांश का कहना है कि अब उनकी दिनचर्या ठीक हो गई है, वह ऋण का भार अपने ऊपर नहीं रखना चाहते हैं।

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मुख्यमंत्री छह जनवरी को इंदौर में पीएम स्वनिधि के हितग्राहियों को राशि वितरित करने के साथ ही प्रदेश के कई हिस्सों से हितग्राहियों से संवाद भी करेंगे। इसलिए निगम के अधिकारियों ने पूरी ताकत इसी काम के लिए झोंक दी है। करीब दर्जन हितग्राहियों को तैयार किया गया है कि यदि जरूरत पड़ी तो सीएम से उनका संवाद कराया जाएगा। उनसे कहा गया है कि योजना के बारे में सकारात्मक फीडबैक दें। बीते करीब दो सप्ताह से नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी भोपाल से लगातार योजना की समीक्षा कर रहे हैं।

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सत्यापन में आधे हितग्राही हो चुके हैं अपात्र

पीएम स्वनिधि योजना का लाभ देने के लिए स्ट्रीट वेंडर्स से आनलाइन आवेदन कराए गए थे। जिसमें शहर के 11372 लोगों ने आवेदन किया था। जब इनके दस्तावेजों और दुकान लगाने के स्थानों का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि वहां पर संबंधित कारोबार नहीं करता। शुरुआती दौर में दस हजार रुपए मिलने की चाहत में आवेदन कर दिया था। इस पर करीब आधे हितग्राही 5800 अपात्र घोषित कर दिए गए हैं। जिसमें कुछ से दोबारा आवेदन लेकर सत्यापन कराया गया है और उन्हें योजना से जोडऩे का प्रयास है। वर्तमान में 3125 हितग्राहियों के आवेदन में ऋण के योग्य बताते हुए बैंकों को दस्तावेज भेजे गए हैं।

बैकों की खानापूर्ति भी बन रही अड़चन

छोटे व्यवसायियों के रोजगार को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजना कई नियमों के पेंच में भी उलझती जा रही है। जिसकी वजह से कई हितग्राहियों ने इससे दूरी बनाई है। जो स्ट्रीट वेंडर्स गांवों से आकर यहां कारोबार कर रहे हैं और योजना का लाभ लेना चाहते हैं उनके लिए कई तरह के दस्तावेज जुटाने पड़ रहे हैं। दस हजार रुपए के ऋण के लिए एक हजार से अधिक राशि उनकी किरायानामा, शपथ पत्र एवं अन्य दस्तावेज तैयार कराने में ही खर्च हो रही है। निकायों द्वारा बैंकों को भेजे गए मामलों में भुगतान की स्थिति अन्य शहरों से रीवा की बेहतर मानी जा रही है फिर भी करीब आधे हितग्राहियों को ही भुगतान मिल सका है। बैंकों द्वारा आवेदनों के अनुसार राशि जारी करने के मामले में नगर निगम रीवा 50.38 प्रतिशत, खंडवा 43.38 प्रतिशत, कटनी 48.12 प्रतिशत, मुरैना 28.73, इंदौर 35.98 प्रतिशत एवं भोपाल में 36.53 प्रतिशत ही मामलों का निराकरण हो सका है।

मैं भी डिजिटल अभियान शुरू

शासन के निर्देश पर नगर निगम ने 'मैं भी डिजिटलीं नाम का एक नया अभियान स्ट्रीट वेंडर्स के लिए शुरू किया है। जिसमें 4 से 22 जनवरी तक डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसमें सभी स्ट्रीट वेंडर्स जिनके पास एंड्रायड फोन हैं उनसे डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा, साथ ही इसके माध्यमों के बारे में भी बताया जाएगा।

केस-1

सड़क किनारे हर दिन सायं सब्जी बेचने वाली मानवती बताती हैं कि उनके कुछ परिचितों ने पीएम स्वनिधि से दस हजार का ऋण लिया है। लेकिन वह ऋण का भार नहीं लेना चाहती। हर दिन मंडी से सब्जी खरीदकर लाती हैं और सायं बेंचकर कुछ रुपए कमा लेती हैं जिससे परिवार चल रहा है।

केस-2

अंडे का ठेला लगाने वाले रहीम खान का कहना है कि पिछले साल लॉकडाउन के दिनों में संकट हुआ था लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है कि कर्ज लेकर काम करना पड़े। इसलिए नगर निगम के कर्मचारियों से भी कहा है कि वह आवेदन नहीं करना चाहते हैं।

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