REWA : होली की छुट्टी में घर आने का वादा कर तीन घंटे बाद शहीद हो गया बेटा : 7 साल और 3 साल की बेटी हादसे से अनजान

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रीवा. सुबह के 9:30 बजे जब लक्ष्मीकांत ने फोन पर पिता से बात की, उन्हें भरोसा दिया कि कुछ ही दिन की तो बात है, होली के अवकाश में घर आकर आपका बेहतर इलाज कराएंगे, तो किसी को क्या पता था कि ये पिता-पुत्र की आखिरी बात होगी। उस फोन कॉल के कुछ ही देर बाद लक्ष्मीकांत नक्सली हमले में शहीद हो गए। यह सूचना इस परिवार के लिए कितनी दुःखदायी होगी उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन नियति को शायद यही मंजूर था।

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छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (सीएएफ) 22वीं बटालियन का वीर जवान,त्योंथर तहसील बरछा गांव निवासी लक्ष्मीकांत द्विवेदी छत्तीसगढ़ में तैनात थे। उनकी ड्यूटी ई-कंपनी कैम्प छिंदनगर दंतेवाड़ा में थी। सुबह 9:30 बजे उन्होंने अपने घर वालों से आखिरी बार फोन पर बात की थी और अपने पिता को यह भरोसा दिलाया था कि छुट्टी में आकर वे उनका इलाज करवाएंगे, लेकिन चंद घंटों बाद ही उनके शहादत की खबर घर पहुंच गई।

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परिवार को नहीं हो रहा विश्वास

उनके शहादत की खबर सुनकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए। आंखें छलछला उठीं, जिस पुत्र ने कुछ ही देर पहले पिता से उनका इलाज करवाने का वादा किया था उसकी शहादत की खबर पर अभी भी पिता को विश्वास नहीं हो रहा है। उनकी दो बेटियां हैं। इनमें बड़ी बेटी रुचि (7 साल) और छोटी बेटी पारुल (3 साल) की हैं। वो इस हादसे को कुछ समझ नहीं पा रही हैं।

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राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि

नक्सली हमले में शहीद हुए जवान लक्ष्मीकांत द्विवेदी का पार्थिव शरीर शुक्रवार की दोपहर तक उनके गृह ग्राम बरछा पहुंचने की उम्मीद है। हेलीकॉप्टर से पार्थिव शरीर रायपुर लाया गया है और वहां से विशेष वाहन से पार्थिव शरीर उनके गृह ग्राम बरछा लाया जाएगा। यहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद के अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन ने सारी तैयारियां पूरी कर ली गईं है।

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