प्रदेश के अस्पतालों में 94% ICU और 83% ऑक्सीजन बेड फुल, जगह नहीं मिलने से दम तोड़ रहे मरीज

मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों के कारण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं दम तोड़ने लगी हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी पड़ गई है। प्रदेश के अस्पतालों में कुल आईसीयू बेड में से 94ऽ बेड भरे हुए हैँ। वहीं, 83ऽ ऑक्सीजन बेड भी भर चुके हैं। नतीजा, एक-एक बेड के लिए मारामारी हो रही है। जबलपुर, इंदौर और शिवपुरी में बेड नहीं मिलने से कई मरीजों की मौत हो चुकी है। दो दिन पहले गुना में 6 अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी प्राचार्य को भर्ती नहीं किया, इससे उनकी मौत हो गई।

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सबसे ज्यादा खराब हालत इंदौर, भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में है। यहां आईसीयू में जगह नहीं है। सागर, होशंगाबाद, गुना समेत अन्य मझोले और छोटे शहरों में भी ऐसे ही हालात हैं। कुछ दिन पहले छिंदवाड़ा, खंडवा और उज्जैन में बेड न मिलने की वजह से जमीन पर लिटाकर ऑक्सीजन देनी पड़ी थी।

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प्रदेश में कोविड के लिए सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में वर्तमान में कुल 48 हजार 624 बेड हैं। इसमें से 35 हजार 257 मरीज (73ऽ) भर्ती हैं। इसमें से आईसीयू और एचडीयू के 9059 बेड हैं, इनमें से 8534 बेड भरे हैं। राहत सिर्फ सामान्य बेड को लेकर है। कोविड केयर सेंटर खुल जाने से कुल 32 हजार 670 बेड हो गए हैं। आधे से थोड़े कम पर मरीज हैं।

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इंदौर: कोविड के अलावा अन्य मरीजों के सामने भी दिक्कत

लगातार बढ़ती संख्या के कारण कोरोना मरीजों के लिए अस्पतालों में आईसीयू और ऑक्सीजन बिस्तर तो दूर, अब सामान्य बिस्तर भी नहीं मिल पा रहे हैं। यहां आईसीयू और एचडीयू में 2323 बेड हैं, सभी फुल हैं। यही हाल ऑक्सीजन बेड की है। 3371 ऑक्सीजन बेड हैं, जिस पर 1362 संक्रमित भर्ती हैं। यहां शुक्रवार रात एक गर्भवती महिला की मौत वेंटिलेटर नहीं मिलने की वजह से हो गई। शुक्रवार को ही एक आशा कार्यकर्ता की मौत बेड न मिलने के कारण हो गई। उसका बेटा अस्पतालों के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया।

भोपाल में सबसे ज्यादा वेंटिलेटर पर मरीज

प्रदेश में सबसे ज्यादा भोपाल में 345 पेशेंट वेंटिलेटर पर हैं। आईसीयू में निजी अस्पतालों में गिनती के ही बेड बचे हैं। सरकारी फुल हो चुके हैं। यही हालत ऑक्सीजन बेड की है। यहां सबसे ज्यादा 3687 ऑक्सीजन बेड हैं, जिस पर 3485 मरीज हैं।

जबलपुर के हालात भी काफी खराब, बेड के इंतजार में लोग

यहां सरकारी आंकड़े में सामान्य और ऑक्सीजन बेड खाली दिख रहे हैं, लेकिन हकीकत में नए मरीजों को भर्ती ही नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह ऑक्सीजन की कमी हे। ऑक्सीजन की प्रतिदिन की जरूरत 32 टन है, लेकिन सप्लाई उससे कम हो रही है। पिछले 10 दिनों में चार अस्पतालों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। 6 अप्रैल को यहां कोरोना संक्रमित बुजुर्ग महिला की इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई थी। बेटा कार में उसे लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन बेड की कमी बता कर उसे भर्ती नहीं किया गया।

सागर की स्थिति भी चिंताजनक

जिला अस्पताल, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और 4 प्राइवेट अस्पतालों में करीब 1 हजार बेड हैं। इसमें से ऑक्सीजन और आईसीयू के सभी बेड फुल हैं। बिना ऑक्सीजन वाले बेड जरूर कुछ खाली हैं।

होशंगाबाद: ऑक्सीजन बेड और वेंटिलेटर फुल

होशंगाबाद में कोविड मरीजों के लिए डेढ़ सौ से ज्यादा प्राइवेट और सरकारी में ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था है। लेकिन आज की तारीख में एक भी खाली नहीं हैं। इस स्थिति में मरीजों को भोपाल जाना पड़ रहा है।

गुना: एक भी ऑक्सीजन बेड खाली नहीं

ऑक्सीजन सपोर्टेड कुल 90 बेड हैं। सभी फुल हैं। 22 अप्रैल को एक प्राचार्य की मौत बेड न मिलने की वजह से हो गई। 6 अस्पतालों ने उन्हें भर्ती नहीं किया। आइसोलेशन बेड 44 रिक्त हैं। प्रतिदिन 70-80 सिलेंडर ऑक्सीजन की आवश्यकता है। अभी फिलहाल आपूर्ति है। शनिवार को 16 टन लिक्विड ऑक्सीजन आई है।

प्रदेश के लिए थोड़ी राहत की 3 बातें

1- संक्रमण दर में मामूली कमी- कोरोना की पॉजिटिविटी दर कम हो रही है। गुरुवार को प्रदेश का कोरोना संक्रमण दर 24.29ऽ थी, जो शुक्रवार को घट कर 23.76 ऽ हो गई है। वर्तमान में प्रतिदिन 50 हजार से अधिक टेस्ट किए जा रहे हैं।

2- 15 जिलों में नए केस से ज्यादा रिकवर: राहत की बात है कि पिछले 24 घंटे में 15 जिलों में जितने कोरोना के नये केस आये हैं, उससे कहीं ज्यादा मरीज इन जिलों में रिकवर भी हुए हैं। इसमें इंदौर,उज्जैन, भिंड, आगर मालवा, सागर, छतरपुर, गुना, छिंदवाड़ा,शाजापुर, रायसेन, खरगोन, कटनी, बालाघाट, पन्ना और अनूपपुर शामिल हैं।

3- 320 बेड के साथ 20 आइसोलेशन कोच तैयार: भोपाल में रेलवे ने 20 आइसोलेशन कोच तैयार किए हैं। हर ओर संक्रमण से जारी संकट के समाधान के लिए प्रयासों में लोग जुटे हैं। इसमें 320 बेड हैं। 25 अप्रैल से यह अपना काम शुरू करेगा।

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