कोरोना का अटैक फेफड़ों और लीवर पर, इन्हें मजबूत करने वाली आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री 30% बढ़ी

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उज्जैन. कोरोना संक्रमण से फेफड़ों में इंफेक्शन से बढ़ते मौत के आंकड़ों ने आयुर्वेद की उन दवाओं की बिक्री बढ़ा दी है, जो फेफड़ों और लीवर को मजबूत करती हैं। यह दवाएं महंगी होने के बावजूद बड़ी मात्रा में बिक रही हैं। दवाओं की बिक्री में 30 फीसदी इजाफा हुआ है। इधर सरकार ने भी आयुष विभाग के कोरोना प्रोटोकॉल में नई दवाइयां बढ़ा दी हैं, जाे इम्युनिटी बढ़ाने वाली हैं। इनके अलावा होम्योपैथी और यूनानी पद्धति की दवाओं के लिए भी सरकार ने नई दवाओं के आदेश दिए हैं।

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कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शुरूआती दौर में 2020 में आयुष विभाग ने घरों और अस्पतालों में त्रिकटू काढ़ा, गिलोय वटी और अणु तेल बांटा था। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को काढ़ा और वटी का सेवन कराया गया था। इससे मरीजों को ठीक होने में काफी मदद मिली थी। इसका असर आयुर्वेदिक औषधियों के बाजार पर भी पड़ा था। कोरोना संक्रमण कम हो जाने के बाद लोगों ने इनका उपयोग कम कर दिया या बंद कर दिया था। कोरोना का दूसरा दौर पहले से काफी घातक उभरा है। वायरस की प्रकृति बदलने से इस बार वह फेफड़ों और लीवर को कमजोर कर रहा है।

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फेफड़ों में तेजी से इंफेक्शन फैलने से मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार ने आयुष विभाग को संशमनी वटी, त्रिकटू काढ़ा, अणु तेल के अलावा गुडुची, आंवला, हल्दी, तुलसी, अश्वगंधा चूर्ण का भी वितरण करने को कहा है। इसके अलावा होम्योपैथी की आर्सेनिक एल्ब-30 और यूनानी की जौशांदा, खमीरा मरवारीद, त्रियाक नजला, शर्बत उन्नाब, रोगन बनफशां, अर्क अजीब, हब्बे एक्सीर बुखार, हब्बे असगंध व सफूफ गिलो जैसी दवाओं की अनुशंसा की है। आयुर्वेद कॉलेज उज्जैन के प्राचार्य डॉ. जेपी चौरसिया के अनुसार सरकार के निर्देशों के अनुसार दवाइयों का वितरण चिमनगंज थाने के पास स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल से किया जा रहा है। यहां दवा वितरण के लिए अलग काउंटर है। नागरिक वहां से दवाएं ले सकते हैं।

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फेफड़ों की दवाइयों में स्वर्ण और अभ्रक भस्म

आयुर्वेदिक दवाओं के विक्रेता बताते हैं कि पिछले साल इम्युनिटी बढ़ाने वाले काढ़े व दवाइयां ज्यादा बिकी थीं। इस बार इम्युनिटी के अलावा फेफड़ों का इंफेक्शन रोकने व लीवर मजबूत करने वाली दवाइयों की मांग है। विक्रेता राकेश शर्मा बताते हैं कि फेफड़ों के इंफेक्शन रोकने वाली दवाओं में स्वर्ण, अभ्रक, जस्ता, नाग भस्म, मोती पिष्टी, प्रवाल पिष्टी, वंग भस्म, केशर आदि के उपयोग वाली दवाइयां ली जा रही हैं। लीवर के लिए पहले से जो दवाएं आ रहीं थी वही है लेकिन उपयोग बढ़ गया है। कोरोना से बचाव करने के साथ पॉजिटिव होने के बाद भी इन दवाओं का उपयोग लाभकारी है। कोरोना से निकले लोगों को लीवर कमजोर होने की शिकायतें भी आ रही हैं। फेफड़ों की दवाएं रिकवरी में मदद करती हैं। यह दवाएं इम्युनिटी भी बढ़ाती हैं।

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