REWA : नहीं थम रही जिला अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में खून की दलाली : गायनी में प्रसव के दौरान मांगा जाता है खून

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रीवा। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को देने का दावा भले ही प्रदेश सरकार करती हो लेकिन जिला अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में खून की दलाली के किस्से सहज ही सुनाई देते हैं। जी हां आज हम बात करने जा रहे हैं विंध्य क्षेत्र के जीवनदायिनी अस्पताल के रूप में मशहूर श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के संजय गांधी अस्पताल की। जहां के गायनी एवं सर्जरी विभाग में पेशेंट के पहुंचने के तुरंत बाद खून की माग की जाती है। जिसके बाद से ही परिजन खून की तलाश में होते हैं। यहां सक्रिय खून की दलाली करने वाले गिरोह के सहज ही शिकार हो जाते हैं। कई बार दलाली करते हुए लोग पकडे गए । 

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हर बार प्रबंधन ने पुलिस को सौंपने एवं कार्रवाई करने की बात की ,लेकिन कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। वर्तमान समय में खून की दलाली में प्रबंधन का हाथ लाल होता दिखाई दे रहा है। कहने के लिए तो संजय गांधी अस्पताल में ब्लड बैंक उपलब्ध है। जब कभी किसी को खून की जरूरत पडी तो हर बार ब्लड बैंक खून की कमी होने की बात कहकर हाथ खडा कर देता है। ऐसे में एक बार पुनः मरीज के तमीरदार को लायंस क्लब द्वारा बनाए गए हेल्पलाइन या फिर खून की दलाली करने वाले लोगों से ही संपर्क करना पड़ता है। जिसके चलते तमीरदारो को खून की दुगनी कीमत चुकानी पड़ती है।

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पूर्व की घटना पर एक नजर

बता दे कि सिविल लाइन थाना अंतर्गत संजय गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक में 2 माह पूर्व एक युवक उस समय पकड लिया गया था। जब वह ब्लड बैंक में ब्लड की दलाली कर रहा था। बताया गया था कि लोगों को ब्लड दिलवाए जाने के नाम पर वह सौदाबाजी कर ही रहा था । अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों की नजर जैसे ही उक्त युवक पर पडी वे समय गवाएं बिना उसे पकड कर अस्पताल प्रशासन के हवाले किया गया था। पकड़े गए युवक की पहचान देवेंद्र शुक्ला निवासी रेरूआ थाना गुढ़ के रूप में की गई थी।

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मरीज के परिजनों को बनाते हैं निशाना

संजय गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक में दलाली किए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं था बल्कि अस्पताल मे सक्रिय दलाल को लेकर ब्लड विभाग अक्सर चर्चाओं में रहता है। यही वजह है कि ब्लड बैंक पहुंचने वाले मरीजों के परिजनों को सक्रिय दलाल अपने चंगुल में लेकर उनसे ब्लड दिलाए जाने के नाम पर सौदा करते है। बताया जा रहा है कि 10 हजार रूपए से लेकर इससे ऊपर की रकम में ब्लड दिलवाए जाने की बात तय करने के साथ ही उन्हें अपने झांसे में ले लेते हैं।

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संदेह के घेरे में स्टाफ

ब्लड बैंक में दलाली को लेकर विभाग का स्टाफ भी संदेह के घेरे में रहा है। बता दें कि इसके पूर्व भी ब्लड बैंक में दलाली तथा सौदेबाजी को लेकर मामला सुर्खियों में पहुंचा था। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने इसमें सख्ती बरतने के साथ ही ब्लड बैंक में सुरक्षा गार्ड तैनात किए थे। तो वही ब्लड बैंक पहुंचने वालों पर नजर रखने के लिए तीसरी आंख का सहारा लिया गया और उसे सीसीटीवी कैमरे से लैस किया गया था। जिससे खून का सौदा और उसके सौदागर प्रशासन की चंगुल में आ सकें। दिलचस्प पहलू यह है कि दलाल इतने चालक है कि उक्त कैमरे से अपनी नजर बचाकर ग्राहकों की तलाश करने के साथ ही सौदेबाजी करते सहज ही देखे जा सकते हैं।

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ब्लड की कमी बताकर होता है सौदा

बताया जा रहा है कि अस्पताल के ब्लड बैंक के आसपास दलाल घूमतें रहते है। जरूरतमंदों को ब्लड बैंक तक पहुंचने के पूर्व अपने झांसे में ले लेते हैं। कई बार तो ब्लड बैंक से निकलने के बाद मरीज के परिजनों को जब ब्लड नहीं मिलता है और उक्त ग्रुप का ब्लड तलाश करने के लिए वे परेशान रहते, इसका फायदा उठाते हुए दलाल उन्हें अबिलंब ब्लड दिलाए जाने की बात कहकर सौदेबाजी करते हैं।

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