MP : छात्र पर अगर आपराधिक केस हुआ तो प्राचार्य नहीं दे सकेंगे कॉलेज में प्रवेश , गलत जानकारी देने पर तीन साल तक नहीं मिलेगा प्रवेश

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काॅलेजों में एक अगस्त से शुरू हो रही दाखिले की प्रक्रिया में ऐसे छात्रों को प्रवेश देने के लिए प्राचार्य अधिकृत नहीं होंगे, जिन पर कोर्ट में आपराधिक प्रकरण चल रहे हैं या चालान प्रस्तुत किया जा चुका हो। ऐसे छात्र को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा जिन्होंने पूर्व सत्र में किसी छात्र, अधिकारी-कर्मचारी के साथ मारपीट की हो। अगर ऐसे छात्रों में चेतावनी देने के बाद भी सुधार नहीं हुआ है तो उन्हें भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

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उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है। इधर, प्रदेश के बाहरी छात्रों को काॅलेज में दाखिले के दौरान शपथ पत्र भी देना अनिवार्य किया गया है। इसमें गलत जानकारी पाए जाने की स्थिति में संबंधित छात्र का प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा। इसी के साथ प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अगले 3 साल तक प्रवेश नहीं मिलेगा। राज्य के बाहर के छात्राें को प्रवेश के पहले, प्राचार्यों द्वारा संंबंधित राज्यों और स्थानीय केंद्र के माध्यम से पुलिस सत्यापन करवाना जरूरी होगा।

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अन्य राज्यों के छात्रों को प्रवेश : ऐसे पाठ्यक्रम जिसमें प्रदेश के छात्र पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं होंगे, उन विषयों में दूसरे राज्य के छात्रों काे प्रवेश दिया जा सकेगा। मप्र के छात्रों के लिए 80 प्रतिशत और अन्य राज्य के छात्रों के लिए 20 प्रतिशत स्थान आरक्षित करने की व्यवस्था होती है।

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