MP : आज तीसरे सोमवार पर बारिश के बीच 13 हजार श्रद्धालुओं ने किए महाकाल के दर्शन : शाम 4 बजे से निकलेगी शाही सवारी

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महाकाल की नगरी उज्जैन में तीसरे सोमवार को उत्सव का माहौल है। सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी है। भीड़ की वजह से आज भी सभी भक्तों के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए। दोपहर एक बजे से मंदिर में प्रवेश बंद कर दिया गया। अब तक 13 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए थे। शाम 4 बजे बाबा महाकाल की शाही सवारी निकलेगी। सवारी के मंदिर लौटने के तुंरत बाद से दर्शन शुरू हो जाएंगे।

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इसके पहले तड़के महाकाल की भस्मारती में बेलपत्रों से बनी विशेष माला अर्पित की गई। भांग, चंदन, फूल और वस्त्र आदि से भगवन महाकालेश्वर का आलौकिक श्रृंगार किया गया। इसी दौरान गर्भ गृह के सामने वाले नंदी हाल को भी फूलों से सजाया गया।

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तीसरे सोमवार को बाबा के दर्शन के लिए सुबह 3 बजे से ही भक्तों की लाइन लग गई। कोविड प्रोटोकॉल के साथ सुबह 5 बजे से भक्तों के दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया और पूरा मंदिर महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आए भक्तों के लिए पिछले दो सोमवारों की तरह इस बार भी फ्री फॉर आल कर दिया गया है।

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पंडित संजय शर्मा पंडित ने बताया कि भगवान महाकालेश्वर की श्रावण भाद्रपद माह में तीसरे सोमवार को भगवान श्री चन्द्रमौलीश्वर चांदी की पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। श्री मनमहेश हाथी पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। कोविड के प्रोटोकॉल के तहत श्रावण माह की तीसरी सवारी में भी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा।


                    मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम भी दर्शन के लिए महाकाल मंदिर पहुंचे।

बाबा की तीसरी सवारी

आज शाम सावन की तीसरी सवारी निकाली जाएगी। बाबा अपने लाव लश्कर के साथ मंदिर प्रांगण से पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर प्रजा का हाल जानने निकलेंगे। कोरोना के कारण श्रद्धालुओं के प्रवेश पर सवारी में भी प्रतिबंध रहेगा। बाबा महाकाल के टीआई सवारी में शासकीय सलामी पश्चात पालकी में सवार होकर ठीक शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से निकलेंगे। सवारी मार्ग मंदिर के ऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव रहेगी। श्रद्धालु घर बैठे www.mahakaleshwar.nic.in देख सकते हैं।

सवारी मंदिर के मुख्य द्वार से बड़ा गणेश होती हुई हरसिद्धि पाल नरसिंह घाट से क्षिप्रा नदी पहुंचेगी। यहां पूजन के बाद रामानुजकोट आश्रम, हरिद्धि द्वार होते हुए शाम 6 बजे तक मंदिर लौटेगी। सवारी में पुजारी, पंडे और कहार ही शमिल होंगे।

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