MP HIGH COURT : शादी का झांसा देकर युवती का यौन शोषण करने पर अग्रिम जमानत नहीं

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शादी का झांसा देकर युवती का यौन शोषण करने के आरोपित को अग्रिम जमानत नहीं दी। न्यायमूर्ति वीरेंदर सिंह की ग्रीष्म अवकाशकालीन एकलपीठ ने कहा कि सबूतों पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। इस मत के साथ कोर्ट ने अग्रिम जमानत की अर्जी निरस्त कर दी। अभियोजन के अनुसार हनुमानताल थानांतर्गत निवासी युवती ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके अनुसार आरोपी अभिषेक घनघोरिया युवती का दूर का रिश्तेदार है। उसने रिश्तेदारी का नाजायज फायदा उठाते हुए पीड़िता को विवाह का प्रलोभन देकर दुष्कर्म किया। 

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शादी के लिए दबाव डालने पर वह मुकर गया। शिकायत पर हनुमानताल थाना पुलिस ने आरोपित घनघोरिया के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया। इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। कोर्ट ने यह तर्क स्वीकार किए और आरोपित को झटका दिया।

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हाई कोर्ट ने एक दुष्कर्म पीड़िता के 15 सप्ताह के गर्भस्थ भ्रूण का दो शिशुरोग विशेषज्ञों की निगरानी में गर्भपात करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान पीड़िता के स्वास्थय के मद्देनजर पूरी एहतियात बरती जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने भ्रूण को डीएनए टेस्ट के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए। इस मत के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की अवकाशकालीन एकलपीठ ने इस मत के साथ पीड़िता की उस याचिका का निराकरण कर दिया जिसमें गर्भपात की मांग की गई थी।

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पीड़िता की ओर से अधिवक्ता दिव्यकीर्ति बोहरे ने पक्ष रखा। कोर्ट ने 30 मई को शासन को पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पेश करने कहा था, ताकि गर्भपात की मांग पर निर्णय ले सकें। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता वेदप्रकाश तिवारी ने कोर्ट को बताया कि गर्भस्थ भ्रूण 15 सप्ताह का है और डाक्टर्स ने सलाह दी है कि हल्के जोखिम के साथ गर्भपात कराया जा सकता है। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट का वातावरण बेहद संजीदा रहा। कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीरता से लेकर निर्णय सुनाया।

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