MPPSC ने शिवराज सरकार को दिया बड़ा झटका : आयोग ने DSP पदों पर निरीक्षकों को प्रमोट करने से इनकार, अब भर्ती प्रक्रिया से भरे जाएंगे DSP के 138 पद

 

MPPSC ने शिवराज सरकार को दिया बड़ा झटका : आयोग ने DSP पदों पर निरीक्षकों को प्रमोट करने से इनकार, अब भर्ती प्रक्रिया से भरे जाएंगे DSP के 138 पद

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने शिवराज सरकार को झटका दिया है। आयोग ने डीएसपी पदों पर निरीक्षकों को प्रमोट करने से इनकार कर दिया है। सरकार ने निरीक्षकों के प्रमोशन को लेकर राय मांगी थी, लेकिन आयोग ने इससे इनकार कर दिया। अब MPPSC डीएसपी के 138 पदों को भर्ती प्रक्रिया के जरिए ही भरेगा।

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गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया, पिछले महीने पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव प्राप्त हुआ था कि प्रमोशन में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में इन पदों पर प्रभार देकर नियुक्ति की जा सकती है। इस प्रस्ताव से सरकार सहमत थी, लेकिन आयोग ने असहमति जताई। डॉ. राजौरा के मुताबिक DSP के 138 रिक्त पद पदोन्नति के बजाय सीधी भर्ती से ही भरे जा सकेंगे।

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बता दें, DSP का पद सीधी भर्ती और पदोन्नति वाला दोनों है। इसमें 50-50% पद दोनों प्रक्रियाओं से भरे जाते हैं। प्रदेश में अभी DSP के करीब 200 पद रिक्त हैं। पुलिस मुख्यालय का यह प्रस्ताव सीधी भर्ती के लिए तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अवसर कम करने वाला होगा।

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इससे सीधी भर्ती के पद निश्चित रूप से कम होंगे। यह भी बताया जा रहा है, पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने से इन पदों पर भी उच्च पद का प्रभार देकर नियुक्ति की जा सकती है। अधिकारियों ने ऐसा प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की पुष्टि की है।

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इंटरव्यू के अंक कम करने की मांग

उधर, DSP समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इंटरव्यू के अंक कम करने की मांग भी उठ रही है। उम्मीदवारों का कहना है, लिखित परीक्षा में अधिक अंक होने के बाद भी इंटरव्यू में दिए जाने वाले अंकों से रिजल्ट प्रभावित होता है। प्रदेश में अभी साक्षात्कार के लिए 175 अंक दिए जाते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और केरल में यह अंक 100 हैं। बिहार में 120 अंक का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में इसी वर्ष 100 अंकों का प्रावधान है।

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