रीवा के जंगलों में दिलीप बिल्डकॉन का 'नंगा नाच': जल जीवन मिशन की आड़ में वन भूमि पर डाका, "रीवा न्यूज़ मीडिया" के हंटर से टूटी अधिकारियों की सेटिंग, मैनेजर समेत 9 पर केस

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के गुढ़ क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। विकास कार्यों की आड़ में वन संपदा को नुकसान पहुँचाने वाली नामी कंपनी दिलीप बिल्डकॉन अब कानून के शिकंजे में है। गुढ़ के बरसैता वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध उत्खनन करने के मामले में वन विभाग ने कड़ी कार्यवाही करते हुए कंपनी के लाइजनिंग मैनेजर समेत 9 लोगों पर वन अपराध (POR) दर्ज कर लिया है।

लाइजनिंग मैनेजर आकाश मिश्रा और 8 ऑपरेटरों पर गाज
वन विभाग द्वारा दर्ज किए गए मामले में मुख्य आरोपी दिलीप बिल्डकॉन के लाइजनिंग मैनेजर आकाश मिश्रा को बनाया गया है। इसके अलावा मौके पर पकड़े गए सभी 8 वाहनों के ऑपरेटरों के खिलाफ भी वन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। डीएफओ रीवा ने इस कार्यवाही की पुष्टि करते हुए बताया कि पीओआर नंबर जनरेट कर दिया गया है और जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा रही है।

6 दिनों का 'वेटिंग गेम' और विभागीय खींचतान
हैरानी की बात यह है कि उत्खनन करते हुए वाहन पिछले बुधवार को ही जब्त कर लिए गए थे, लेकिन केस दर्ज करने में विभाग को 6 दिन लग गए। सूत्रों की मानें तो विभाग के कुछ ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी मामले को दबाने और 'सेटल' करने की जुगत में थे। लेकिन डिप्टी रेंजर विनय दुबे की टीम की मेहनत और मीडिया के दबाव के चलते आखिरकार सोमवार को यह मामला दर्ज करना ही पड़ा।

जब्त मशीनों का जखीरा: बरसैता में खड़ी हैं 8 गाड़ियां
कार्यवाही के दौरान वन विभाग ने भारी मात्रा में मशीनरी जब्त की है, जिसमें शामिल हैं:

  • 02 चेन माउंटेन मशीनें (खुदाई के लिए)
  • 01 जेसीबी मशीन
  • 05 डीजी कंप्रेसर मशीनें
  • इन सभी को बरसैता में ही वन विभाग की निगरानी में खड़ा किया गया है।

आदतन अपराधी! दिसंबर में भी दर्ज हुआ था मामला
दिलीप बिल्डकॉन के लिए वन नियमों को तोड़ना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले दिसंबर में भी कंपनी के खिलाफ बदवार क्षेत्र में अवैध उत्खनन का मामला दर्ज हुआ था, जहाँ तीन कंप्रेसर ट्रैक्टर जब्त किए गए थे। महज तीन महीनों के भीतर दूसरी बड़ी कार्यवाही यह साबित करती है कि कंपनी शासन के मिशन की आड़ में नियमों को ठेंगा दिखा रही है।

क्या अधिकारियों का मिल रहा है 'अंदरूनी' समर्थन?
वन क्षेत्र में बिना अनुमति के इतनी बड़ी मशीनों के साथ प्रवेश करना और खुदाई करना बिना किसी संरक्षण के मुमकिन नहीं है। बरसैता मामले में जिस तरह से पीओआर दर्ज करने में हीलाहवाली की गई, उसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कंपनी को किसी बड़े अधिकारी का मूक समर्थन हासिल है? यह अब रीवा के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

रसूख और कानून की जंग
दिलीप बिल्डकॉन जैसी रसूखदार कंपनी पर वन अपराध दर्ज होना उन ईमानदार वनकर्मियों की जीत है जो अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों की रक्षा करते हैं। अब देखना यह है कि क्या कंपनी पर सिर्फ मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाएगा या फिर भविष्य के लिए कोई सख्त मिसाल कायम की जाएगी।

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