एक्सपोज़: रीवा के रेस्टोरेंट्स में परोसी जा रही 'गंदगी', स्टिंग के बाद एक्शन मोड में प्रशासन; स्ट्रीट किचन का लाइसेंस रद्द
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा शहर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से मंगाई गई वेज बिरयानी में कीड़ा निकलने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। ताला हाउस स्थित 'स्ट्रीट किचन रेस्टोरेंट' से आई बिरयानी में कीड़ा मिलने की शिकायत उपभोक्ता द्वारा की गई थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित कर उसे सील कर दिया है।

रीवा न्यूज़ मीडिया का स्टिंग और सिस्टम की पोल
यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। कुछ दिन पहले ही 'रीवा न्यूज़ मीडिया' ने शहर के कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट्स पर एक विशेष स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस दौरान MP-17 पार्किंग जैसे प्रमुख स्थानों सहित कई जगहों पर स्वच्छता के मानकों में भारी कमी पाई गई थी। इस स्टिंग ऑपरेशन के सभी सबूतों और शिकायतों को खाद्य विभाग और एसडीएम अनुराग तिवारी को सौंपा गया था। एसडीएम को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से इन रेस्टोरेंट्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। उस समय प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया था, जिसके बाद अब खाद्य विभाग की टीम हरकत में आई है।

कैसे खुले में चल रहा था 'स्ट्रीट किचन'?
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमरीश दुबे, साबिर अली और उनकी टीम ने जब 'स्ट्रीट किचन' पर दबिश दी, तो वहां की स्थिति चौंकाने वाली थी। रेस्टोरेंट का किचन खुले में संचालित हो रहा था। वहां न तो साफ-सफाई का कोई इंतजाम था और न ही खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के मानक अपनाए जा रहे थे। इसी घोर लापरवाही के कारण खाने में कीड़े और अन्य दूषित तत्व पनप रहे थे। फिलहाल, जब तक प्रबंधन व्यवस्था में पूरी तरह सुधार नहीं करता, प्रतिष्ठान को बंद रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
मिलावट से मुक्ति अभियान: मैंगो शेक की हकीकत
कलेक्टर के निर्देश पर चल रहे "मिलावट से मुक्ति अभियान" के तहत शहर भर में जांच जारी है। सिरमौर चौराहा क्षेत्र में मोबाइल फूड लैब के जरिए मैंगो शेक के सैंपल लिए गए। जांच में पाया गया कि कई जगह आम के जूस के नाम पर फूड कलर, शक्कर का पानी और दूध मिलाकर ग्राहकों को परोसा जा रहा था। हालांकि, लैब रिपोर्ट में किसी जहरीले रसायन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खाद्य सामग्री के साथ यह खिलवाड़ जनता के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।

विभाग की कार्यप्रणाली पर जनता के सवाल
इस कार्रवाई के बाद शहर में बहस छिड़ गई है कि क्या प्रशासन केवल मीडिया के दबाव या शिकायत मिलने के बाद ही जागेगा? सैकड़ों रेस्टोरेंट शहर में खुले हैं, लेकिन नियमित निगरानी का अभाव साफ दिखता है। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि पिछले महीनों में जो सैंपल्स विभाग ने लिए थे, उनकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? जनता पारदर्शिता की मांग कर रही है। विभाग का कहना है कि लगातार जांच जारी रहेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
दैनिक रीवा न्यूज़ मीडिया का Reality Check: सिरमौर चौराहे की MP-17 चौपाटी में मिला कड़वा सच
हमारी खोजी टीम ने जमीनी हकीकत जानने के लिए रीवा शहर के अलग-अलग कोनों में चल रही चौपाटियों का सघन जायजा लिया। इस पड़ताल में जो सबसे हैरान और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई, वह सिरमौर चौराहे के ठीक पीछे स्थित शहर की सबसे बड़ी और हाइफ़ाई चौपाटी 'MP-17' की है।

शाम होते ही सजने वाले इस आलीशान खान-पान केंद्र की लगभग सभी दुकानों में नियमों का सरेआम कबाड़ा किया जा रहा था। मौके पर पड़ताल के दौरान एक भी ऐसा काउंटर या दुकान नहीं मिली, जहां नियमानुसार नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग हो रहा हो। यहाँ व्यापार करने वाले रसूखदारों ने कानून को पूरी तरह अपनी जेब में रख लिया है। वही लगातार खबर लिखे जाने के बाद चौपाटी 'MP-17' में अब कई लोगो ने अब घरेलू सिलेंडर हटा कर कमर्शियल सिलेंडर उसे करना शुरू कर दिया है। बावर्ची फ़ूड स्टाल सहित अन्य।
रीवा के इन नामी समोसा सेंटर्स और होटलों में गंदगी का अंबार: पढ़िए पीछे का घिनौना सच
रीवा के जागरूक नागरिकों और ग्राउंड जीरो से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, शहर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित और भीड़भाड़ वाले समोसा सेंटर्स पर जनता की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। आइए इन चेहरों को बेनकाब करते हैं:
रीवा के इन नामी समोसा-चाट सेंटर्स और होटलों में गंदगी का अंबार
ब्रांड के पीछे का घिनौना सच, रीवा के जागरूक नागरिकों और ग्राउंड जीरो से मिली प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, शहर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित और भीड़भाड़ वाले समोसा व चाट ठिकानों पर जनता की सेहत के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। आइए इन चेहरों को बेनकाब करते हैं:
राधा स्वामी रेस्टोरेंट (सिरमौर चौराहा): शहर के इस सबसे व्यस्त चौराहे पर स्थित इस रेस्टोरेंट के बाहर खुले में चाउमीन, मंचूरियन और समोसे सजा कर रखे जाते हैं। दिनभर में गुजरने वाली हजारों गाड़ियों का काला धुआं, कार्बनिक गैसें और धूल के गुबार सीधे इन खाद्य पदार्थों पर जमते हैं। बिना किसी ढक्कन या कांच के कैबिनेट के, इसी 'धूल-धूसरित' और दूषित चाउमीन-समोसे को ग्राहकों की प्लेट में परोस दिया जाता है।
मामा चाट (पड़रा): पड़रा इलाके में इस स्टॉल पर शाम होते ही भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन यहाँ चाट और टिक्की बनाने के लिए जिस पानी और मसालों का इस्तेमाल होता है, उसकी शुद्धता भगवान भरोसे है। काउंटर के आसपास फैली गंदगी और नालियों की सड़ांध के बीच यहाँ सरेआम बीमारियां परोसी जा रही हैं।
दिल्ली दरबार : साईं मंदिर के पास और उसके ठीक सामने चौपाटी के स्टॉल्स सहित दिल्ली दरबार पड़रा पर हाइजीन के मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं। वही मंदिर के सामने श्रद्धा से आने वाले लोग यहाँ का रुख करते हैं, लेकिन इन्हें नहीं पता कि यहाँ चाट के बर्तनों को धोने के लिए जिस पानी का बार-बार इस्तेमाल किया जाता है, वह कीटाणुओं का घर बन चुका है।
राजू समोसा (खन्ना चौराहा): खन्ना चौराहे का यह नामी समोसा भी लापरवाही में पीछे नहीं है। कड़ाही के पीछे झांकते ही रूह कांप जाएगी। रात का बचा हुआ बासी आलू का मसाला सुबह के ताजे लॉट में मिलाकर खपाना यहाँ का रोज का ढर्रा बन चुका है।
पुराने और नए बस स्टैंड के होटल्स: रीवा के पुराने और नए बस स्टैंड पर स्थित होटलों की हालत तो नरक से भी बदतर है। बाहर से आने वाले मुसाफिर मजबूरन इन होटलों में खाते हैं। यहाँ सड़ी-गली सब्जियों, खटारे मैदे और मक्खियों से भिनभिनाते काउंटरों के बीच खाना तैयार होता है। इन होटलों के बैकस्टेज यानी किचन के भीतर अगर कोई ग्राहक कदम रख ले, तो वह जीवन में कभी यहाँ का पानी पीना भी पसंद न करे।
बिहारी समोसा (अमहिया), तिवारी होटल (ढेकहा) व शगुन स्वीट्स: इन सभी बड़े नामों के चमचमाते काउंटरों के पीछे के बेसमेंट या किचन की असलियत बेहद घिनौनी है। सड़े हुए आलू और कीड़े लगी पत्तागोभी को बिना धोए सीधे कतर दिया जाता है।
FSSAI गाइडलाइंस की उड़ी धज्जियां: न ग्लव्स, न कैप; गंदे हाथों से सचेत हो रहा है कोढ़
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की साफ गाइडलाइन है कि भोजन बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों को प्रॉपर हाइजीन मेंटेन करनी होगी। लेकिन रीवा के इन सभी होटलों में FSSAI के नियम केवल कागजी पन्नों तक सिमट कर रह गए हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ देखा जा सकता है कि खाना बनाने वाले कारीगर और टेबल पर सर्व करने वाले कर्मचारी:
- हाथों में किसी भी प्रकार के ग्लव्स (Gloves/Apron) का इस्तेमाल नहीं करते।
- सिर पर शेफ कैप (Topi) नहीं पहनते, जिससे कई बार खाने में बाल गिरने की शिकायतें आम होती हैं।
गंदे, पसीने से लथपथ हाथों से ही सीधे समोसे को तोड़ना, कचौड़ी उठाना और चाउमीन को प्लेट में सजाना यहाँ की रोज की कार्यप्रणाली है। बिना हाथ धोए कर्मचारी उसी गंदे हाथ से पैसे का लेनदेन करते हैं और उसी हाथ से दोबारा खाद्य सामग्री छूते हैं, जो सीधे तौर पर बैक्टीरिया को आमंत्रण है।
खौफनाक हकीकत: जले हुए काले तेल का बार-बार इस्तेमाल और एसिडिक चटनी का तड़काइन समोसा सेंटर्स का सबसे खौफनाक सच वह तेल है, जिसमें इन्हें छाना जाता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, कुकिंग ऑयल को एक या अधिकतम दो बार से ज्यादा गर्म नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इसके बाद वह 'ट्रांस फैट' (Trans Fat) और कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) में बदल जाता है।
लेकिन बिहारी समोसा, तिवारी होटल और राधा स्वामी समेत रीवा के इन तमाम सेंटर्स पर कड़ाही का तेल तब तक नहीं बदला जाता जब तक वह जलकर तारकोल (डामर) जैसा काला न हो जाए। रोज बचे हुए जले तेल में ही नया तेल ऊपर से डाल दिया जाता है। यह काला तेल रीवा के युवाओं की धमनियों को ब्लॉक कर रहा है, जो कम उम्र में हार्ट अटैक और लिवर डैमेज का सबसे बड़ा कारण है।
इसके साथ जो मुफ्त में असीमित 'मीठी लाल चटनी' दी जाती है, उसे सड़े हुए अमचूर, केमिकल कलर्स (नॉन-फूड ग्रेड) और भारी मात्रा में कृत्रिम मिठास (Saccharin) से तैयार किया जाता है। यह एसिडिक चटनी पेट में अल्सर, भयंकर एसिडिटी और आंतों में घाव पैदा कर रही है।
कमर्शियल एरिया में घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध खेल: किसी बड़े हादसे का इंतजार?लापरवाही सिर्फ गंदगी और खराब तेल तक सीमित नहीं है; इन होटल संचालकों की दादागिरी और चोरी का आलम यह है कि ये कमर्शियल उपयोग के लिए बड़े नीले सिलेंडरों के बजाय सरकार द्वारा आम जनता को सब्सिडी पर दिए जाने वाले लाल घरेलू गैस सिलेंडरों (Domestic LPG Cylinders) का धड़ल्ले से अवैध उपयोग कर रहे हैं।
व्यावसायिक क्षेत्रों में इस तरह घरेलू सिलेंडरों का रिसाव और असुरक्षित इस्तेमाल एक बड़े विस्फोट या भीषण आगजनी को बुलावा दे रहा है। इन होटलों के पास आग जैसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए न तो कोई फायर सेफ्टी (Fire Safety) के पुख्ता इंतजाम हैं और न ही फायर एनओसी। रसूख के दम पर यह अवैध खेल रीवा के रिहायशी और कमर्शियल दोनों इलाकों में खुलेआम चल रहा है।