स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही : शिक्षक को कोरोना पॉजिटिव बताकर 3 दिन किया इलाज, बाद में कहा आप गलती से आ गए....

Telegram

पन्ना। पन्ना के कोविड केयर सेंटर में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां पर पन्ना नगर के निवासी एक शिक्षक को कोरोना पॉजिटिव बताकर 3 दिन तक कोविड केयर सेंटर में रखकर इलाज कर दिया। जबकि शिक्षक कोविड पॉजिटिव नहीं थे और तीन दिन बाद में उन्हें बताया कि आप गलती से आ गए आप कोरोना पॉजिटिव नहीं थे।


इसी बात को लेकर बीती रात कोविड केयर सेंटर पन्ना में स्वास्थ्य विभाग व शिक्षक के परिजनों के बीच घंटो तक विवाद चलता रहा। परिजनों ने शिक्षक को घर ले जाने से इंकार इसलिए कर दिया क्योंकि शिक्षक की नेगेटिव की कोई रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं दी गई थी औऱ न ही डिस्चार्ज करने का पर्चा दिया। बाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शिक्षक व उनके परिजनों को समझाया औऱ फिर शिक्षक को अलग से कमरे में रखवाकर सुबह होते ही फिर से सेंपल लेंकर जांच कराने की बात कही। तब कही जाकर मामला शांत हुआ।


क्या है पूरा मामला

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कोविड को लेकर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाहियां उजागर हो रही है। कहीं मरीज कोविड सेंटर से फरार हो रहे हैं, तो कहीं स्वस्थ्य व्यक्ति को कोविड बताकर इलाज किया जा रहा है। ताजा मामला पन्ना शहर में मॉडल स्कूल में बनाये गए कोविड केयर सेंटर से सामने आया है। जहां पर बीती रात पन्ना नगर के निवासी एक शिक्षक को कोविड केयर सेंटर से डिस्चार्ज कर दिया गया लेकिन परिजनों ने शिक्षक को घर ले जाने से इंकार कर दिया।


लाया गया कोविड सेंटर

कारण पता करने पर शिक्षक ने बताया कि उन्हें तीन दिन पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा फोन कर जानकारी दीं गई थी कि वह कोरोना पॉजिटिव आये हैं। जिसके बाद उन्हें स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कोविड केयर सेंटर लाया गया। जहां पर उनका कोरोना पॉजिटिव की तरह तीन दिन इलाज किया गया। उनके घर को कंटेन्मेंट जॉन बनकर सील कर दिया गया। पूरे परिवार के सेम्पल लिए गए औऱ तीन दिन बाद बीती रात शिक्षक को स्टाफ़ के द्वारा बताया गया कि आपको गलती से लाया गया था आप कोरोना पॉजिटिव नहीं आये थे।


एक जैसे नाम होने के कारण हुई गलती

दो व्यक्तियों के एक से नाम होने की वजह से यह मिस्टेक हो गई। जिसके बाद उन्हें कोविड केयर सेंटर से डिस्चार्ज कर दिया गया। शिक्षक को लेने पहुंचे परिजनों ने उन्हें घर ले जाने से मना कर दिया और जांच रिपोर्ट व डिस्चार्ज पर्ची लेने के अड़ गए। परिजनों इस बात पर विवाद करते रहे कि जब उनके पिता को कोरोना पॉजिटिव नहीं थे तो क्यों कोविड सेंटर लाकर उनका इलाज किया गया और कोविड पॉजिटिव मरीजों के साथ रखा गया। हो सकता है कि वह अब कोरोना पॉजिटिव हो गए हो।


इस बात को लेकर शिक्षक के परिजन व स्वास्थ्य विभाग के बीच बात रात करीब दो घंटे तक बात विवाद चलता रहा। जिसके बाद मामला जिले के वरिष्ट अधिकारियों तक पहुंचा। फिर मौके पर डॉक्टर की टीम पहुंची औऱ शिक्षक व उनके परिजनों को समझाया कि गलती हुई है। सुबह उनकी एक बार फिर से सेम्पल लेकर जांच रिपोर्ट दे दी जाएगी। फिर कही जाकर मामला शांत हुआ।


लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोविड जैसी संवेदनशील महामारी में भी स्वास्थ विभाग इस प्रकार की लापरवाही के कारण स्वास्थ्य सिस्टम की बदनामी के साथ-साथ आमलोगों में भी ख़ौफ पनप रहा है क्योंकि किसी को उठाकर कोरोना पॉजिटिव बताकर इलाज किया जा रहा है। जिससे जिले में कहीं कोरोना मरीज कोविड सेंटर से फरार हो रहे हैं तो कही स्वस्थ्य व्यक्ति का इलाज किया जा रहा है। इस प्रकार की लापरवाहियों से आम लोग जांच कराने से भी डर रहे हैं।


Powered by Blogger.