REWA : UPPSC में दूसरी रैंक प्राप्त कर सुचिता सिंह बनी डिप्टी एसपी : पढ़िए सफलता की कहानी

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा। प्रशासनिक सेवा करते हुए पुलिस विभाग में अधिकारी बनने सुचिता सिंह यूपीपीएससी में शामिल हुई और दूसरी रैंक प्राप्त करते हुए वे डिप्टी एसपी पद पर चयनित हुए हैं। परीक्षा परिणाम आते ही सुचिता और उनके परिवार के लोगों में प्रसन्नता हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में वे यूपीएससी की परीक्षा में शमिल हुई थीं और अगस्त में उनका साक्षात्कार भी हुआ था। नौकरी करने के साथ ही शेष बचे हुए समय में वे इस परीक्षा की तैयारी भी करती थीं। सफलता तो उन्हें मिलेगी यह उनका विश्वास था लेकिन इस तरह की सफलता के लिए वे भगवान का ही धन्यवाद करती हैं।

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विरासत में मिली शिक्षा

सुचिता सिंह ने बताया कि उनका परिवार प्रशासनिक सेवा में शुरू से काम कर रहा है। पढ़ाई के दौरान वे भी इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रेरित हुई। अपने तीन भाई बहनों में सुचिता दूसरे नंबर की हैं। वे मूलत उत्तर-प्रदेश के प्रतागढ़ जिले की रहने वाली हैं तथा जिले के सिरमौर जनपद के सीईओ के पद पर काम कर रही हैं। वर्ष 2015 में वे एमपी पीएससी में चयनित हुई थीं। उनके पिता एके सिंह मप्र प्रशासनिक सेवा में काम कर रहे हैं। वर्तमान में वे मनगंवा एसडीएम के पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जनपद में सीईओ के पद पर रहते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास को लेकर उन्होंने काफी काम किया है।

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गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं सुचिता

सुचिता सिंह शुरू से ही पढ़ाई के मामले में मेघावी छात्रा रही हैं। इन्होंने कक्षा आठवीं तक की पढ़ाई पिता के साथ रहकर गुना में की एवं कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई हिंदू गर्ल्स स्कूल वाराणसी में की। वे लगातार टॉप स्थान पर आती रही हैं। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज में बीए एवं एमए की पढ़ाई में वे टॉप करती रहीं तथा बीए एवं एमए में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं। पेटिंग सहित अन्य क्षेत्र में भी काफी रूचि रखती हैं।

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महिलाओं में कानून के प्रति विश्वास पैदा करना प्रथमिकता

उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में वे काम करते हुए यह प्रयास करेंगी कि महिलाएं कानून के प्रति जागरूक हों और अपने साथ होने वाले अन्याय के लिए थानों में पहुंच कर लड़ाई लड़ें। उनका कहना है कि आज भी महिलाएं थानों मे जाने से डरती हैं। उनके अंदर यह भय न हो तथा थानों में महिलाओं के साथ अच्छा व्यावहार और न्याय हो।



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