MP : पत्नी के चरित्र पर था शक, दोस्तों के मोबाइल से पत्नी को पति करता था मैसेज, पूछा तो बोला देख रहा था व्यवहार


इंदौर । पति की नादानी और शादी के डेढ़ साल बाद भी पत्नी के चरित्र पर शक करने की स्थिति ने एक घर टूटने की कगार पर ला दिया। पत्नी ने समझदारी दिखाई और वन स्टॉप सेंटर पहुंच गई। यहां पर उसने पूरी स्थिति बताकर मदद मांगी। वन स्टॉप सेंटर से पति-पत्नी की तीन बार काउंसिलिंग की गई। जिसमें पति ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आगे से इस तरह की हरकतें नहीं करने का वादा किया और पत्नी के साथ घर चला गया।

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पिछले तीन दिनों में वन स्टॉप सेंटर में दो ऐसे मामले सामने आए जिसमें पति-पत्नी की जिद के कारण परिवार टूटने की नौबत तक आ गई। कई महीनों से चल रहे इन विवादों को काउंसिलिंग के माध्यम से सुलझाया गया। तीन दिनों में ही दो परिवारों की काउंसिलिंग हुई और सभी साथ रहने को तैयार हुए। लॉकडाउन के बाद कई लोगों की नौकरी भी चली गई है। ऐसे में परिवार चलाना मुश्किल हो चुका है। यह भी एक वजह पारिवारिक विवाद को लेकर सामने आ रही है।

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मामला-एक : 29 वर्षीया मरीमाता निवासी एक महिला 11 नवंबर को वन स्टॉप सेंटर पहुंची। उसने बताया कि उसका पति अपने दोस्तों के मोबाइल से मैसेज भेजता है और फिर घर आकर पूछताछ करता है। हर बार नए नंबरों से मैसेज आते हैं और फिर वह खुद बता भी देता है कि मैंने ही मैसेज किए थे। मैंने बार-बार उन्हें समझाया लेकिन वह मैसेज में रिप्लाई को लेकर झगड़ा करते हैं। वन स्टॉप सेंटर में काउंसलर मनीषा व्यास ने पूरी स्थिति जानने के बाद पति से बात की तो पति ने सही जानकारी नहीं देते हुए परिवार में पत्नी द्वारा झगड़ा करने की शिकायत की। जब पता किया गया तो रिश्तेदारी में ही शादी होना पाया गया तथा उसकी पत्नी व भाभी सगी बहनें पाई गईं। ऐसे में यह स्थिति भी स्पष्ट हो गई कि बड़ी बहन होने से वह झगड़ा भी नहीं करती होगी। पति की काउंसिलिंग करने पर पति ने इन बातों को स्वीकार किया और आगे से ऐसी कोई भी गलती नहीं होने का वादा किया। पत्नी ने भी परिवार में साथ रहने की इच्छा जताई और दोनों घर लौट गए।

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मामला-2ः खजराना निवासी 31 वर्षीया महिला वन स्टॉप सेंटर पहुंची। संयुक्त परिवार में रहने और अपनी सास व मौसी सास की छोटी-छोटी बातों के लिए परेशान करने की शिकायत की। कई बार तो मारपीट तक की नौबत पहुंच चुकी थी। सेंटर पर महिला के पति को बुलाया गया और समझाइश दी गई। पति ने बताया कि वह पत्नी के साथ ही रहना चाहता है और परिवार भी नहीं छोड़ना चाहता। ऐसे में दोनों परिवारों को तीन बार काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया। छह अक्टूबर को काउंसिलिंग के दौरान दोनों ने अलग रहने की इच्छा जताई। जिससे कि परिवार बच सके। परिजनों ने भी इसे लेकर कोई आपत्ति नहीं ली।

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सेंटर में महिलाओं को न्याय दिलाने और परिवार को बचाने के लिए काउंसिलिंग की जा रही है। हाल ही में ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें लॉकडाउन के कारण नौकरी चली गई। यह भी पारिवारिक तनाव का कारण बन रहा है।


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