REWA : कालेजों में सीटें बढ़ाने NSUI ने किया प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपकर कहा- सीटें नहीं बढ़ीं तो करेंगे उग्र प्रदर्शन


ऋतुराज द्विवेदी,रीवा। कालेजों में प्रवेश के लिए शुरुआत से ही इस बार मारामारी बनी रही है। लगातार करीब दो महीने से प्रवेश नहीं पाने वाले छात्रों को आखिरी चरण में उम्मीदें थी लेकिन इसमें अधिक अंक वाले छात्र भी शामिल हो गए जिसके चलते कम सीटें होने की वजह से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रवेश से वंचित हो गए। अधिकांश प्रमुख सरकारी कालेजों में सीटें भर गई हैं जिसकी वजह से अब प्रवेश की उम्मीदें भी समाप्त होने की स्थिति में हैं। जिसके चलते कालेजों के बाहर नारेबाजी और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।


बताया गया है कि अधिक अंकों वाले अधिकांश छात्रों ने इंजीनियरिंग एवं अन्य प्रमुख कोर्सों में भी प्रवेश के लिए आवेदन कर रखा था, जिसके चलते उनका नाम पहली और दूसरी आनलाइन प्रवेश की सूची में आया लेकिन फीस जमाकर प्रवेश नहीं लिया। इस कारण आनलाइन काउंसिलिंग में ही उनका नाम इस बार प्रतीक्षा सूची से अगल हो गया था। सीएलसी राउंड शुरू हुआ तब भी अधिक अंकों से उत्तीर्ण होने वाले छात्रों ने पहले प्रवेश के लिए आवेदन नहीं किया। अब आखिरी चरण होने की वजह से सभी को अवसर दिया गया है, जिसके चलते ऐसे प्राप्तांक वाले छात्रों ने आवेदन कर दिया है, जो अब तक के सबसे अधिक मेरिट में शामिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि रुक जाना नहीं और पूरक परीक्षा पास होकर आए अधिकांश छात्रों के प्राप्तांक अधिक हैं।


87 प्रतिशत अंक वाली छात्रा ने लिया प्रवेश
कई ऐसे छात्रों ने आखिरी चरण में प्रवेश लिया है जो प्रतिभावान छात्र रहे हैं। उनका नाम पहली सूची में ही आ गया था। शासकीय कन्या महाविद्यालय में गणित समूह में सीएलसी के चौथे राउंड में 87 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण एक छात्रा ने प्रवेश लिया है। जबकि इसके पहले उससे काफी कम अंकों की छात्राओं को प्रवेश मिल चुका है। उक्त छात्रा ने कहा कि वह पहले इंजीनियरिंग में जाना चाह रही थी लेकिन अब बीएससी करने के लिए प्रवेश लिया है। इसी तरह अन्य कक्षाओं की भी स्थिति बताई गई है। जीडीसी में ही कुछ कक्षाओं में पहले ६५ प्रतिशत तक के प्रवेश हुए लेकिन अब 70-75 तक कटआफ पहुंच रहा है।

प्रमुख कालेजों में सीटें भरने से परेशानी
शहर की प्रमुख सरकारी कालेजों में अधिकांश छात्रों द्वारा प्रवेश के लिए आवेदन किए गए हैं। जहां पर आनर्स पाठ्यक्रमों की अधिक डिमांड है। इनमें सीटें भर जाने की वजह से अब प्रवेश नहीं हो पा रहा है। माडल साइंस कालेज, जीडीसी और टीआरएस कालेज में सबसे अधिक समस्या बताई जा रही है। कालेज लेवल काउंसिलिंग के चौथे चरण में कई कक्षाओं में दो से दस तक की संख्या में सीटें खाली रहीं उनमें प्रवेश के लिए सैकड़ों की संख्या में आवेदन जमा किए गए हैं।


अतिरिक्त संचालक को ज्ञापन सौंपकर कहा सीटें नहीं बढ़ीं तो करेंगे उग्र प्रदर्शन
कालेजों में सीटे भर जाने के बाद प्रवेश प्रक्रिया से बड़ी संख्या में वंचित हुए छात्रों के समर्थन ने छात्र संगठन एनएसयूआइ ने प्रदर्शन किया। अतिरिक्त संचालक कार्यालय पहुंचकर धरना दिया। काफी देर तक नारेबाजी करने के बाद अतिरिक्त संचालक पंकज श्रीवास्तव पहुंचे छात्रों का ज्ञापन लिया। जिसमें छात्रों ने मांग उठाई है कि टीआरएस कालेज में 25 प्रतिशत और अन्य सभी प्रमुख कालेजों में 10-10 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएं। एनएसयूआइ कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यदि कालेजों में सीटें नहीं बढ़ाई जाएंगी तो सड़क पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे।


दो सीट के लिए सैकड़ा भर से अधिक छात्रों के आवेदन हर कालेज में हैं। एनएसयूआई के प्रदेश सचिव अभिषेक तिवारी, छात्र नेता संदीप पाण्डेय आदि ने बताया कि कोरोना काल में मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने आर्थिक संकट है। इन परिवारों के छात्र प्राइवेट कालेजों में फीस नहीं दे सकते। साथ ही सरकारी कालेजों में स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश लेना मुश्किल है। इसलिए छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए सीटें बढ़ाकर प्रवेश दिए जाएं। इस दौरान अखिलेश अहिरवार, शुभम तिवारी, बादल भारती, रोहित शुक्ला, विपिन चतुर्वेदी,अमर चौधरी, शिवम तिवारी, विपिन कुशवाहा, सूरज मिश्रा, मोनू पांडेय, रोहित गुप्ता, अखिलेश पांडेय, अजय मिश्रा, स्वरूपानन्द तिवारी, विवेक मिश्रा, अमित पांडेय, रामनरेश सेन, शुभम सोनी सहित सहित अन्य मौजूद रहे।


छात्राएं ज्ञापन देने कलेक्ट्रेट पहुंची
जीडीसी में प्रवेश नहीं मिलने के बाद दर्जनों की संख्या में छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंची। जहां पर ज्ञापन देकर मांग उठाई है कि सीटें बढ़ाकर उन्हें प्रवेश दिलाया जाए। छात्राओं ने कहा कि वह प्राइवेट कालेज या फिर स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में फीस देने की स्थिति में नहीं है। इसलिए उनके हितों को ध्यान में रखते हुए प्रवेश दिए जाएं।
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